जेन जी पर सियासत: राहुल की छात्रों की गूंज बनाम भाजपा का युवा संवाद
पेपर लीक, अटकी भर्तियां और बेरोजगारी... युवाओं के ये सवाल अब सियासत के केंद्र में हैं। राहुल गांधी ‘छात्रों की गूंज’ के जरिए अलग-अलग शहरों में छात्रों के बीच पहुंच रहे। बीते हफ्ते इंदौर में हुए कार्यक्रम में छात्रों ने अपनी परेशानी सीधे उनके सामने रखी। दूसरी तरफ शुक्रवार को जयपुर के बिरला ऑडिटोरियम में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने युवाओं से संवाद किया।
दोनों कार्यक्रम युवाओं से जुड़े थे, लेकिन तरीका अलग रहा। इंदौर में छात्रों ने शिक्षा, नौकरी और भर्ती से जुड़े सवाल उठाए। ओबीसी आरक्षण के कारण अटकी नियुक्तियों का मामला सामने आया तो राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव को चिट्ठी लिखी। जयपुर में भाजपा के मंच पर सफल युवाओं के अनुभव, सरकार की नौकरियों और योजनाओं पर ज्यादा बात हुई। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भर्ती का हिसाब रखा तो नितिन नवीन ने मेहनत, धैर्य और जिंदगी में शॉर्टकट नहीं लेने की बात कही।
यानी युवाओं तक पहुंचने की कोशिश भाजपा और कांग्रेस दोनों की तरफ है। कांग्रेस छात्रों की शिकायतों और रोजगार-भर्ती के मुद्दों को आगे रख रही। भाजपा सरकार अपने काम, नौकरियों और आगे की योजनाओं के जरिए युवाओं तक पहुंचने की कोशिश कर रही।
राहुल की 'छात्रों की गूंज' में सवालों पर जोर
राहुल गांधी का ‘छात्रों की गूंज’ अभियान कोटा से शुरू हुआ था। इसके बाद देहरादून, प्रयागराज, पुणे और इंदौर में कार्यक्रम हुए। कांग्रेस इस अभियान में पेपर लीक, महंगी शिक्षा, भर्ती में गड़बड़ी और बेरोजगारी जैसे मुद्दे उठा रही। इंदौर के कार्यक्रम में छात्रों ने राहुल के सामने अपनी समस्याएं रखीं। इनमें मध्य प्रदेश में 27% ओबीसी आरक्षण से जुड़ी भर्तियों का मुद्दा भी था। एक अभ्यर्थी ने बताया कि परीक्षा और चयन प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद नियुक्ति नहीं मिली।
मध्य प्रदेश में 27% OBC आरक्षण का मामला कानूनी विवाद में है। इसके बाद भर्तियों के लिए 87:13 व्यवस्था अपनाई गई। इसके तहत 87% पदों पर नियुक्तियां की जाती हैं, जबकि विवाद से जुड़े 13% पदों को कोर्ट के फैसले तक रोककर रखा गया।
इंदौर में सवाल उठा, राहुल ने CM को लिखी चिट्ठी
इंदौर में उठा ओबीसी आ मामला कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहा। राहुल गांधी ने 22 सितंबर को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखा। इसमें उन्होंने 27% OBC आरक्षण के मुद्दे का समाधान निकालने और चयन के बावजूद वर्षों से नियुक्ति का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों के मामले में कदम उठाने की मांग की।
राहुल ने अपने पत्र में इंदौर के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम का भी जिक्र किया। उन्होंने लिखा कि छात्रों ने शिक्षा, रोजगार और भविष्य को लेकर अपनी परेशानियां बताई थीं। उनके मुताबिक 13% पदों पर चयनित अभ्यर्थी 2022 से नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं।
दरअसल, 19 सितंबर को इंदौर में हुए ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में मध्य प्रदेश की भर्तियों में 13% पद होल्ड रखने का मुद्दा उठा था। राजगढ़ की सपना गुर्जर और सतना के अखिल भारती क्रांति ने मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग समेत दूसरी भर्तियों में इन पदों पर नियुक्तियां अटकी होने की बात कही थी। सपना गुर्जर ने बताया कि मार्च 2019 में OBC आरक्षण 14% से बढ़ाकर 27% किया गया था। मामला कोर्ट पहुंचने के बाद बढ़े हुए 13% आरक्षण से जुड़े पदों को अंतिम फैसले तक होल्ड कर दिया गया। राहुल गांधी ने एमपी के मुख्यमंत्री को लिखी चिठ्ठी में इसका हल निकालने को कहा है।
जयपुर में BJP के युवा संवाद का अंदाज अलग
इसी बीच जयपुर के बिरला ऑडिटोरियम में भाजपा का युवा संवाद हुआ। नितिन नवीन के जयपुर दौरे में इसे पार्टी के यूथ आउटरीच कार्यक्रम के तौर पर रखा गया था। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ भी इसमें शामिल हुए। यहां बातचीत का तरीका ‘छात्रों की गूंज’ से अलग रहा। कार्यक्रम में अलग-अलग क्षेत्रों में आगे बढ़े युवाओं ने अपनी सफलता के अनुभव बताए। वहीं नितिन नवीन और मुख्यमंत्री ने अपनी बात युवाओं के सामने रखी। कार्यक्रम में पेपर लीक, बेरोजगारी या भर्ती में देरी जैसे मुद्दों पर खुला सवाल-जवाब देखने को नहीं मिला। एक छात्रा ने स्कूलों में बच्चों की रुचि के हिसाब से क्लब शुरू करने का सुझाव जरूर दिया।
यहीं दोनों कार्यक्रमों का फर्क दिखता है। राहुल के मंच पर छात्रों की समस्याएं और सवाल ज्यादा सामने आए। जयपुर में सरकार के काम, सफल युवाओं के अनुभव और आगे की योजनाओं पर ज्यादा जोर रहा।
नितिन नवीन बोले- जिंदगी 100 मीटर की रेस नहीं
नितिन नवीन ने युवाओं से कहा कि जिंदगी में कोई शॉर्टकट नहीं होता और किसी काम को छोटा नहीं समझना चाहिए। बड़ी सोच और लगातार मेहनत से ही आगे बढ़ा जा सकता है। उन्होंने छात्रों में आत्महत्या की घटनाओं पर चिंता जताते हुए कहा कि एक असफलता इतनी बड़ी नहीं हो सकती कि कोई अपना जीवन खत्म कर दे। उन्होंने युवाओं से कहा कि जिंदगी 100 मीटर की रेस नहीं है, इसमें लंबे समय तक टिके रहने का स्टेमिना चाहिए। नवीन ने युवाओं से राजनीति में आने की अपील भी की। उनका कहना था कि राजनीति देश को दिशा देती है, इसलिए युवाओं को इसमें भागीदारी बढ़ानी चाहिए।
भजनलाल ने युवाओं के सामने रखा नौकरियों का हिसाब
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अपने संबोधन में भर्ती और रोजगार पर सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार के ढाई साल में 400 से ज्यादा परीक्षाएं हुईं और एक भी पेपर लीक नहीं हुआ।
मुख्यमंत्री के मुताबिक सरकार 1.90 लाख नौकरियां दे चुकी। करीब 1.22 लाख नौकरियों की प्रक्रिया चल रही है और 1.25 लाख पदों के लिए भर्ती कैलेंडर जारी किया गया है। उन्होंने निजी क्षेत्र में छह लाख रोजगार देने की बात भी कही। यानी राहुल गांधी जहां भर्ती में फंसे अभ्यर्थियों और छात्रों की शिकायतों को मुद्दा बना रहे, वहीं भजनलाल सरकार भर्ती के आंकड़ों और पेपर लीक रोकने के अपने रिकॉर्ड को सामने रख रही।
दिल्ली के युवा आंदोलन ने भी खींचा ध्यान
युवाओं के मुद्दों की अहमियत दिल्ली में हुए कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन से भी सामने आई। जुलाई में हजारों प्रदर्शनकारी संसद की ओर मार्च करने निकले थे। आंदोलन में परीक्षा के पेपर लीक और भर्ती व्यवस्था से जुड़े सवाल प्रमुख थे। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी शामिल थी। इस आंदोलन को किसी चुनावी नतीजे से सीधे जोड़ना मुश्किल है, लेकिन इससे इतना जरूर दिखा कि परीक्षा और भर्ती व्यवस्था को लेकर युवाओं का एक वर्ग सड़क पर उतरकर अपनी नाराजगी जता रहा है। ऐसे माहौल में राजनीतिक दलों के लिए युवाओं से सीधा संवाद अहम हो गया है।
राजस्थान में अब अलग यूथ बजट की तैयारी
भजनलाल सरकार ने युवाओं पर अपना फोकस और बढ़ाया है। मुख्यमंत्री ने 17 सितंबर को मुख्यमंत्री निवास पर युवाओं से बातचीत के दौरान घोषणा की थी कि सरकार अलग ‘यूथ बजट’ लाएगी। उस कार्यक्रम में युवाओं से रोजगार, शिक्षा, तकनीकी ज्ञान और स्किल डेवलपमेंट जैसे मुद्दों पर सुझाव भी लिए गए। सरकार इसके जरिए युवाओं से जुड़े अलग-अलग मुद्दों को एक एजेंडे में लाने की तैयारी कर रही है। भर्ती प्रक्रिया, रोजगार, स्किल और स्वरोजगार इसमें अहम हिस्से हो सकते हैं। इसके साथ मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना, विश्वकर्मा युवा उद्यमी प्रोत्साहन योजना और मुख्यमंत्री युवा सम्बल जैसी योजनाओं के जरिए भी सरकार युवाओं तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
कांग्रेस सवाल उठा रही, BJP अपना रिकॉर्ड बता रही
राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ और भाजपा के युवा संवाद को देखें तो युवाओं को लेकर दो अलग राजनीतिक रणनीतियां नजर आती हैं। राहुल के कार्यक्रमों में छात्रों की समस्या सुनने और उसे राजनीतिक मुद्दा बनाने पर जोर है। इंदौर में OBC भर्ती का सवाल उठा तो उन्होंने तीन दिन बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिख दिया।
दूसरी तरफ भाजपा के जयपुर कार्यक्रम में सरकार का रिकॉर्ड और आगे की योजनाएं ज्यादा सामने आईं। मुख्यमंत्री ने नौकरी और भर्ती परीक्षाओं के आंकड़े रखे, जबकि नितिन नबीन ने युवाओं से मेहनत, धैर्य और राजनीति में भागीदारी की बात की। यह कहना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा कि भाजपा ने जयपुर का कार्यक्रम सिर्फ राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ के जवाब में किया। लेकिन दोनों दलों की हाल की गतिविधियां इतना जरूर बताती हैं कि युवा अब राजनीतिक एजेंडे के केंद्र में हैं।
आखिर में सवाल नौकरी और भर्ती का ही
युवाओं के बीच कौन-सा संवाद ज्यादा असर करेगा, इसका फैसला किसी एक कार्यक्रम की भीड़ या भाषण से नहीं होगा। असली सवाल वही हैं जो छात्र लगातार उठा रहे हैं-परीक्षा समय पर होगी या नहीं, पेपर लीक रुकेगा या नहीं, भर्ती पूरी होने में कितना वक्त लगेगा और पढ़ाई के बाद नौकरी के कितने मौके मिलेंगे।
कांग्रेस इन सवालों को सरकार के सामने रख रही है। भाजपा अपने भर्ती रिकॉर्ड और योजनाओं के जरिए उनका जवाब देने की कोशिश कर रही है। राजस्थान सरकार का आने वाला यूथ बजट भी इसी कसौटी पर परखा जाएगा कि उसमें घोषणाओं के साथ युवाओं की नौकरी, भर्ती और स्किल से जुड़ी जरूरतों का कितना ठोस हल निकलता है।
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