9 साल की उम्र में हुआ था बाल विवाह, कानूनी लड़ाई का सहारा लिया, कोर्ट ने अब सुनाया आजादी का फैसला
News In Short
- 9 साल की उम्र में सीमा का हुआ था बाल विवाह।
- सीमा ने रिश्ते को स्वीकार करने से किया इनकार।
- बाल विवाह को रद्द करने के लिए वाद दायर किया।
- कोर्ट ने सुनवाई के बाद बाल विवाह को किया निरस्त।
- सीमा ने कहा, अब मैं आज़ाद, अपना भविष्य संवारूंगी।
News In Detail
Jodhpur: राजस्थान के जोधपुर में एक युवती को बाल विवाह के बरसों पुराने बोझ से मुक्ति मिल गई है। जोधपुर के पारिवारिक न्यायालय संख्या-2 ने फैसला सुनाते हुए नौ साल की उम्र में हुए एक बाल विवाह को शून्य (निरस्त) घोषित कर दिया है। यह कहानी सीमा (बदला हुआ नाम) की है, जिसने सामाजिक बेड़ियां तोड़कर आज़ादी की खुली हवा में सांस ली है।
9 साल की उम्र में थोपा गया था रिश्ता
मामला वर्ष 2015 का है, जब ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाली सीमा की उम्र महज 9 वर्ष थी। जिस उम्र में बच्चों के हाथों में खिलौने और स्कूल की किताबें होनी चाहिए, उस मासूम उम्र में सामाजिक दबाव के चलते सीमा का विवाह कर दिया गया था।
हालांकि, जैसे-जैसे सीमा बड़ी हुई, उसने इस थोपे गए रिश्ते को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। करीब एक दशक तक वह भारी सामाजिक दबाव, पारिवारिक उलझनों और कठिन परिस्थितियों से जूझती रही, लेकिन उसने हार नहीं मानी।
अदालत में मिली कानूनी जीत
सीमा ने अपनी आज़ादी के लिए साहस दिखाया और कानूनी लड़ाई लड़ने का फैसला किया। करीब सवा साल पहले उसने सारथी ट्रस्ट की मदद से न्यायालय में इस विवाह को रद्द करने के लिए वाद दायर किया था।
सुनवाई के दौरान मामला तब और पेचीदा हो गया जब कथित पति ने अदालत में बाल विवाह होने की बात से ही साफ़ इनकार कर दिया। ऐसे चुनौतीपूर्ण मोड़ पर सारथी ट्रस्ट की मैनेजिंग ट्रस्टी और प्रसिद्ध पुनर्वास मनोवैज्ञानिक डॉ. कृति भारती ने कमान संभाली।
उन्होंने अदालत के समक्ष पुख्ता दस्तावेजी साक्ष्य और ठोस प्रमाण पेश किए। पूरे घटनाक्रम की स्पष्टता और सबूतों की मज़बूती को देखते हुए न्यायाधीश वरुण तलवार ने प्रस्तुत साक्ष्यों को विश्वसनीय माना और बाल विवाह को निरस्त करने का आदेश जारी किया।
लड़ाई में इनका मिला सहयोग
इस लड़ाई में डॉ. कृति भारती की भूमिका मार्गदर्शक की रही है। बाल विवाह उन्मूलन की दिशा में कार्यरत डॉ. भारती ने न केवल कानूनी मोर्चा संभाला, बल्कि सीमा को मानसिक रूप से भी मज़बूत बनाए रखा। उनके द्वारा पेश किए गए साक्ष्यों ने ही इस केस की दिशा बदली और अदालत को इस निष्कर्ष पर पहुंचाया कि यह विवाह पूरी तरह गैर-कानूनी था।
अब मैं आज़ाद हूं और अपना भविष्य संवारूंगी
न्यायालय का फैसला आने के बाद सीमा के चेहरे पर जीत की मुस्कान और आंखों में सुनहरे भविष्य के सपने थे। भावुक होते हुए सीमा ने कहा कि इतने सालों का संघर्ष आज सफल हुआ। मैं अब उन बेड़ियों से पूरी तरह आज़ाद हूं जिन्होंने मेरा बचपन और मेरी खुशियां छीन ली थीं। अब मैं अपनी मर्जी से जिऊंगी, पढ़ाई पूरी करूंगी और अपना भविष्य संवारूंगी।
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