चूरू में साधु की मौत के 50 घंटे बाद समाधि से निकाला शव, परिजनों ने लगाया हत्या का आरोप, 6 पर केस दर्ज
राजस्थान के चूरू जिले में एक साधु की मौत के बाद हंगामा खड़ा हो गया है। रतनगढ़ के सांगासर गांव में दो संतों के बीच विवाद के बाद साधु बन्नानाथ की मौत हो गई। आरोप है कि उनकी मौत के बाद परिवार को बताए बिना ही शव को समाधि दे दी गई। जब परिजनों को इसकी जानकारी मिली तो उन्होंने हत्या का आरोप लगाते हुए पुलिस से शिकायत की। इसके बाद पुलिस ने करीब 50 घंटे बाद समाधि खुलवाकर शव बाहर निकलवाया। मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम कराया गया। पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर दो लोगों को हिरासत में लिया है।
हरियाणा के रहने वाले थे साधु बन्नानाथ
मृतक साधु की पहचान बन्नानाथ के रूप में हुई है। वे हरियाणा के सिरसा जिले के धौलपालिया गांव के रहने वाले थे। परिजनों के मुताबिक, बन्नानाथ ने वर्ष 2004 में संन्यास ले लिया था। इसके बाद वे साधु के रूप में रहने लगे थे। वे रावतसर स्थित बालकनाथ के आश्रम से भी जुड़े हुए थे। परिवार का आरोप है कि बालकनाथ के साथ विवाद होने के बाद बन्नानाथ की मौत हुई। इसके बावजूद किसी ने परिवार को इसकी सूचना नहीं दी। परिजनों का कहना है कि उन्हें बन्नानाथ की मौत और शव को समाधि देने की जानकारी बाद में मिली। इसके बाद परिवार के लोगों ने पूरे मामले पर सवाल उठाए और पुलिस से जांच की मांग की।
सांगासर पहुंचने के बाद बन्नानाथ से टूट गया था संपर्क
चुरू पुलिस को दी गई रिपोर्ट के मुताबिक, बन्नानाथ कुछ दिन पहले चूरू जिले के सांगासर गांव पहुंचे थे। परिजनों को बाद में पता चला कि बालकनाथ उन्हें सांगासर में बजरंगनाथ के पास छोड़कर गए थे।
इसके बाद परिवार का बन्नानाथ से संपर्क नहीं हो पाया। जब काफी समय तक उनसे बात नहीं हुई तो परिजनों ने उनके बारे में जानकारी जुटानी शुरू की। इसी दौरान परिवार को पता चला कि संतों के बीच किसी बात को लेकर झगड़ा हुआ था। इसके बाद बन्नानाथ की मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि झगड़े के दौरान बन्नानाथ के साथ मारपीट की गई थी। इसी वजह से उनकी जान गई।
हालांकि, मौत की असली वजह अभी सामने नहीं आई है। पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट और दूसरे सबूतों के आधार पर मामले की जांच कर रही है।
परिजनों का आरोप- हत्या के बाद शव को समाधि दी
बन्नानाथ के परिजनों ने पुलिस को दी शिकायत में गंभीर आरोप लगाए हैं। परिवार का कहना है कि बन्नानाथ के साथ पहले मारपीट की गई। इसके बाद उनकी हत्या कर दी गई। आरोप यह भी है कि घटना को छिपाने के लिए परिवार को सूचना दिए बिना ही शव को समाधि दे दी गई। परिजनों ने सवाल उठाया कि जब बन्नानाथ की मौत हुई तो परिवार को तुरंत जानकारी क्यों नहीं दी गई। उनका कहना है कि मौत किन हालात में हुई, इसकी जांच होनी चाहिए। साथ ही घटना में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
परिजनों की शिकायत के आधार पर पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर लिया है। फिलहाल ये सभी आरोप जांच के दायरे में हैं।
मौत के 50 घंटे बाद पुलिस ने समाधि से निकलवाया शव
परिजनों की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। चूंकि बन्नानाथ के शव को पहले ही समाधि दी जा चुकी थी, इसलिए मौत की वजह पता लगाने के लिए शव बाहर निकालना जरूरी था।
इसके बाद उपखंड मजिस्ट्रेट यानी एसडीएम के आदेश पर समाधि खोलने की कार्रवाई की गई। तहसीलदार अंकित मिमानी की मौजूदगी में पुलिस ने करीब 50 घंटे बाद समाधि से शव बाहर निकलवाया।
इस दौरान मेडिकल टीम और एफएसएल की टीम भी मौजूद रही। एफएसएल टीम का काम घटनास्थल से ऐसे सबूत जुटाना होता है, जिनसे जांच में मदद मिल सके। समाधि से निकालने के बाद शव को मोर्चरी पहुंचाया गया। यहां मेडिकल बोर्ड ने पोस्टमार्टम किया। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। अब पुलिस को मेडिकल रिपोर्ट का इंतजार है। इससे मौत की वजह समझने में मदद मिल सकती है।
बालकनाथ और बजरंगनाथ समेत अन्य के खिलाफ केस दर्ज
पुलिस ने परिजनों की शिकायत पर हत्या का मामला दर्ज किया है। मामले में बालकनाथ, बजरंगनाथ, मुकेशनाथ, लूणनाथ और लक्ष्मीनारायण सहित अन्य लोगों के नाम सामने आए हैं। शिकायत में छह लोगों को नामजद करने और कुछ अन्य लोगों पर भी आरोप लगाने की बात कही गई है। पुलिस ने फिलहाल दो लोगों को हिरासत में लिया है। उनसे पूछताछ की जा रही है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि बन्नानाथ और दूसरे संतों के बीच किस बात को लेकर विवाद हुआ था। इसके अलावा पुलिस यह भी जांच रही है कि बन्नानाथ की मौत कब और किन हालात में हुई। मौत के बाद शव को समाधि देने का फैसला किसने लिया और परिवार को इसकी सूचना क्यों नहीं दी गई।इन सवालों के जवाब मिलने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की तस्वीर साफ हो सकेगी।
साधु की मौत से नाराज लोगों ने सालासर मार्ग पर लगाया जाम
बन्नानाथ की मौत और हत्या के आरोपों की जानकारी मिलने के बाद सांगासर गांव में लोगों की नाराजगी बढ़ गई। घटना के विरोध में ग्रामीण और अन्य लोग सड़क पर उतर आए। उन्होंने सालासर मार्ग पर जाम लगा दिया। जाम लगने की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शन कर रहे लोगों से बातचीत की और उन्हें समझाने की कोशिश की। करीब एक घंटे की समझाइश के बाद लोगों ने रास्ता खोल दिया। इसके बाद सड़क पर आवाजाही सामान्य हो सकी। समाधि से शव निकालने के दौरान भी बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर मौजूद रहे। माहौल को देखते हुए पुलिस ने सुरक्षा के अतिरिक्त इंतजाम किए। सीआई संदीप कुमार सहित पुलिस का अतिरिक्त जाब्ता मौके पर तैनात रहा।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट से साफ होगी मौत की वजह
फिलहाल इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि बन्नानाथ की मौत कैसे हुई। परिजनों ने मारपीट और हत्या का आरोप लगाया है। दूसरी तरफ पुलिस अभी सबूत जुटा रही है। मेडिकल बोर्ड की पोस्टमार्टम रिपोर्ट इस जांच में अहम होगी। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि मौत की वजह क्या थी और शरीर पर किसी तरह की चोट के निशान थे या नहीं। पुलिस हिरासत में लिए गए लोगों से पूछताछ के साथ घटना से जुड़े दूसरे लोगों की भूमिका भी जांच रही है।
अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट, एफएसएल जांच और पुलिस की पड़ताल के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि बन्नानाथ की मौत किन परिस्थितियों में हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।