अनुभवी जज समाज की बावड़ी के समान, संकट में वही बुझाते हैं न्याय की प्यास, जयपुर में बोले CJI सूर्यकांत
News In Short
- सीजेआई ने सुनाई कवि दुष्यंत कुमार की कविता
- न्यायाधीशों को जनता का भरोसा जीतने की दी सीख
- सीएम भजनलाल बोले,समाज जजों के पदचिह्नों पर चलता है
- त्वरित न्याय के लिए डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर और विधिक जागरूकता वाहनों को दिखाई हरी झंडी
News In Detail
सुप्रीम कोर्ट चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने न्यायिक संस्थाओं पर आम जनता के अटूट विश्वास को बनाए रखने पर जोर दिया है। शनिवार को जयपुर के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में आयोजित दी बेंच बियॉन्ड रिटायरमेंट कॉन्फ्रेंस में मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए उन्होंने सेवानिवृत्त जजों की तुलना राजस्थान की पारंपरिक बावड़ियों से की। उन्होंने कहा कि जिस तरह बावड़ियां संकट के समय प्यास बुझाती हैं, उसी तरह अनुभवी न्यायाधीश जटिल कानूनी विवादों में समाज का मार्गदर्शन करते हैं।
कवि दुष्यंत कुमार की कविता सुनाई
सीजेआई ने प्रसिद्ध कवि दुष्यंत कुमार की कविता वो आदमी नहीं मुक्कमल बयान सुनाते हुए कांफ्रेंस में मौजूद न्यायाधीशों और न्यायिक अधिकारियों से कहा कि वह इन लाईनों को हमेशा न्यायपालिका के नजरिए से अपने करीब महसूस करते हैं। अच्छा हो कि आप भी इसका ध्यान रखें तो ना केवल जनता का विश्वास अटूट रहेगा, बल्कि वह ओर ज्यादा बढ़ेगा।
बावड़ी के समान हैं रिटायर जज
सीजेआई ने कहा कि राजस्थान में बावड़ी होती हैं। उन्होंने बताया कि वह चूरू जिले के पास के रहने वाले हैं और उनके नजदीक के जिले में भी बावड़ियां होती हैं। बावड़ी में बारिश का पानी इकठ्ठा कर लिया जाता है। संकट के समय में यही बावड़ियां लोगों की प्यास बुझाती हैं।
उन्होंने कहा कि हमारे बुजुर्ग और अनुभवी न्यायाधीश भी समाज की ऐसी ही बावड़ियां हैं। जब भी न्याय व्यवस्था किसी संकट,जटिल विवाद या मार्गदर्शन की स्थिति में होती है,तब हमें इन्हीं अनुभवी लोगों की ओर देखना चाहिए।
उन्होंने कहा कि एक बुद्धिमान न्यायपालिका इन अनुभवों को केवल दूर से सम्मान नहीं देती, बल्कि उन्हें संरक्षित करती है और समय आने पर उनसे शक्ति प्राप्त करती है।
समाज आपका अनुसरण करता है
कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए सीएम भजनलाल शर्मा ने कहा कि वह हमेशा जनता के मन में आपके लिए सम्मान देखते हैं। क्योंकि आप जो कहते हैं समाज उसका अनुसरण करता है। समाज को आप पर विश्वास है।
आपके एक वक्तव्य को वह अपने जीवन का आधार बना लेता है। क्योंकि आप न्याय की प्रतिमूर्ति हो। आपके प्रति समाज में सम्मान है और उस सम्मान के कारण समाज आपके पद चिन्हों पर भी चलता है। आप जो भी दिशा देते हैं, समाज में उसको मान्यता मिलती है। जब समाज उस मान्यता को आगे बढ़ाता है तो समाज के अंदर सकारात्मक परिवर्तन होता है और वह परिवर्तन हमारी न्याय की आधारशिला बनता है। इसलिए आपका काम हमेशा चलता है आप सेवानिवृत्ति के बाद भी आप समाज को दिशा देते हैं।
तकनीक के उपयोग से मिलेगा त्वरित न्याय
राजस्थान हाई कोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस एस.पी.शर्मा ने कहा कि अदालतों में मुकदमों की भरमार होने से आमजन को न्याय मिलने में देरी हो रही है। समय के साथ डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर बढ़ने से न्यायिक प्रक्रिया में भी तकनीक का उपयोग बढ़ा है। उन्होंने कहा कि एक जज की यात्रा रिटायर होने के बाद समाप्त नहीं होती है। पूर्व जज न्याय दिलाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
कॉन्फ्रेंस के बाद राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को दिए गए मल्टी यूटिलिटी वाहनों को सीजेआई, हाईकोर्ट के एक्टिंग सीजे और सीएम भजनलाल शर्मा ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। ये वाहन प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में जाकर लोगों को उनके अधिकारों और विधिक सेवा प्राधिकरण की योजनाओं के बारे में जागरूक करेंगे।
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