CM भजनलाल ने की गोवर्धन की 21 किमी परिक्रमा, बाद में ली अधिकारियों की बैठक
समझें क्या है पूरा मामला
- CM भजनलाल ने रात भर चलकर पूरी की 21 किमी परिक्रमा
- सुबह 4 बजे तक चली गिरिराज जी की सप्तकोसीय परिक्रमा
- पत्नी संग किए दर्शन, श्रद्धालुओं को अपने हाथों से बांटी प्रसादी
- पूजा-अर्चना के बाद डीग के अधिकारियों के साथ ली बैठक
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने मंगलवार को डीग में गिरिराज धरण (गोवर्धन पर्वत) की सप्तकोसीय परिक्रमा भक्तिभाव के साथ संपन्न की। यह परिक्रमा सोमवार शाम शुरू हुई और मंगलवार सुबह करीब 4 बजे पूरी हुई।
मुख्यमंत्री ने पत्नी के साथ पूंछरी का लौठा स्थित श्रीनाथ जी के दर्शन किए और गिरिराज जी की विधिवत पूजा-अर्चना की। इसके बाद उन्होंने श्रद्धालुओं को प्रसादी वितरित की और डीग-भरतपुर के विकास कार्यों पर अधिकारियों के साथ बैठक भी की।
रात भर पैदल चलकर पूरी की परिक्रमा
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अपने दो दिवसीय डीग प्रवास के दौरान गोवर्धन पर्वत की सप्तकोसीय परिक्रमा पूरी की। यह परिक्रमा करीब 21 किलोमीटर लंबी है।
सोमवार की शाम परिक्रमा शुरू हुई और मुख्यमंत्री रात भर चलते हुए मंगलवार सुबह लगभग 4 बजे इसे पूरा कर सके। परिक्रमा पूरी होने के बाद उन्होंने पूंछरी का लौठा में आमजन से मुलाकात की।
श्रीनाथ जी के दर्शन और गिरिराज जी का अभिषेक
मुख्यमंत्री ने सपत्नीक पूंछरी का लौठा स्थित श्रीनाथ जी के दर्शन किए। इसके बाद मुकुट मुखारविंद मंदिर की तलहटी पर दुग्ध एवं जलाभिषेक कर गिरिराज जी की विधिवत पूजा-अर्चना की।
पूजा के दौरान उन्होंने प्रदेश की निरंतर खुशहाली, सुख और समृद्धि के लिए मंगलकामना की।
श्रद्धालुओं से आत्मीय मुलाकात, बांटी प्रसादी
श्रीनाथ जी मंदिर परिसर में उपस्थित संतों, स्थानीय नागरिकों और दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं को मुख्यमंत्री ने अपने हाथों से प्रसादी वितरित की।
इस दौरान उन्होंने श्रद्धालुओं से आत्मीय संवाद कर यात्रा के दौरान मिल रही सुविधाओं की जानकारी ली और उनका कुशलक्षेम जाना।
विकास कार्यों पर अधिकारियों संग बैठक
आस्था के इस दौरे के साथ-साथ मुख्यमंत्री ने भरतपुर और डीग जिले के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर क्षेत्र के विकास कार्यों पर चर्चा की और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
बैठक में गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम, राजस्थान धरोहर प्राधिकरण अध्यक्ष ओंकार सिंह लखावत, विधायक डॉ. शैलेष सिंह और बहादुर सिंह कोली सहित अन्य जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे।
FAQ
- गोवर्धन की सप्तकोसीय परिक्रमा क्या होती है?
सप्तकोसीय परिक्रमा का अर्थ है सात कोस यानी लगभग 21 किलोमीटर की पैदल परिक्रमा। यह गिरिराज (गोवर्धन) पर्वत की पूरी परिधि को पैदल चलकर पूरा करने की परंपरा है जिसे अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। - पूंछरी का लौठा क्यों है खास?
पूंछरी का लौठा गोवर्धन परिक्रमा मार्ग पर स्थित एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है। यहां श्रीनाथ जी का प्रसिद्ध मंदिर है। मान्यता है कि परिक्रमा यहीं से शुरू और यहीं पर पूरी होती है।
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