निकाय चुनाव की शिकायत लेकर DGP से मिली कांग्रेस: जूली बोले- पुलिस राजनीतिक दबाव में ना करें काम
राजस्थान में नगरीय निकाय चुनाव खत्म होने के बाद अब सियासी टकराव पंचायतीराज चुनाव पर आ गया। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने सोमवार को पुलिस महानिदेशक (DGP) राजीव शर्मा से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने निकाय चुनाव के दौरान पुलिस के कथित गलत इस्तेमाल की शिकायत की और इस संबंध में ज्ञापन सौंपा। कांग्रेस नेताओं का दावा है कि उन्होंने इससे जुड़े सबूत भी राजस्थान के डीजीपी को दिए हैं।
कांग्रेस नेताओं ने मांग की है कि आगामी पंचायती राज चुनाव में पुलिस बिना किसी राजनीतिक दबाव के काम करे। टीकाराम जूली ने चेतावनी दी कि निकाय चुनाव जैसी घटनाएं दोबारा हुईं और कानून व्यवस्था बिगड़ी तो इसकी जिम्मेदारी पुलिस प्रशासन की होगी।
टीकाराम जूली बोले-पुलिस पार्षद पकड़ रही थी
राजस्थान के डीजीपी राजीव शर्मा से मुलाकात के बाद नेता प्रतिपक्ष जूली ने मीडिया से कहा कि निकाय चुनाव के दौरान पुलिस का जो बर्ताव रहा, वह निंदनीय है। उन्होंने कहा, 'पुलिस का काम कानून व्यवस्था संभालना है, लेकिन पूरा प्रदेश देख रहा था कि पुलिस पार्षद पकड़ रही थी।' जूली ने दावा किया कि निकाय चुनाव में हुई घटनाओं की पूरी जानकारी डीजीपी को सबूत के साथ दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ अधिकारियों के कामकाज से पुलिस की छवि खराब हुई।
जूली ने कहा कि राजस्थान में भाजपा की सरकार रही हो या कांग्रेस की, इससे पहले इस तरह पार्षदों को पकड़ने के आरोप सामने नहीं आए। उन्होंने दावा किया कि निकाय चुनाव में पुलिस की भूमिका को लेकर काफी सवाल उठे हैं।
जूली ने अफसरों के तबादलों पर उठाए सवाल
राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष जूली ने खाटू श्यामजी में हुए चुनाव का मामला भी उठाया। उन्होंने दावा किया कि वहां के एसडीएम और पुलिस अधिकारी को चुनाव नतीजे आने के बाद अभी हाल ही में हटाया गया है। जूली ने इसे निकाय चुनाव में बोर्ड गठन से जोड़ते हुए आरोप लगाया कि अधिकारियों ने सरकार के मुताबिक काम नहीं किया, इसलिए उनके खिलाफ कार्रवाई की गई।
जूली ने सरकार पर निकाय चुनाव में सरकारी मशीनरी के इस्तेमाल का आरोप भी लगाया। हाल में कांग्रेस ने निकाय चुनाव में क्रॉस वोटिंग और दूसरी शिकायतों की जांच के लिए पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी की अध्यक्षता में कमेटी भी बनाई है।
राजस्थान के डीजीपी से मुलाकात के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि निकाय चुनाव से जुड़े मामलों के सबूत डीजीपी को सौंपे गए हैं। हर मामले पर अलग-अलग बात भी हुई।
उन्होंने चेतावनी दी कि निकाय चुनाव के दौरान पुलिस का जैसा रवैया रहा, वैसा ही पंचायत चुनाव में भी रहा तो हालात बिगड़ सकते। लोगों का गुस्सा बढ़ सकता है और वे कानून हाथ में लेने पर मजबूर हो सकते हैं। ऐसी स्थिति की जिम्मेदारी पुलिस महानिदेशक की होगी।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में ऐसा माहौल नहीं बनना चाहिए, जहां लोगों के विरोध को रोकने के लिए पुलिस को सख्त कदम उठाने पड़ें। डोटासरा ने इस दौरान जंतर-मंतर का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि राजस्थान में ऐसी नौबत नहीं आनी चाहिए कि आक्रोश दबाने के लिए पेलेट गन तक इस्तेमाल करनी पड़े।
डोटासरा ने आरोप लगाया कि निकाय चुनाव में सरकार ने पुलिस की मदद से पार्षदों पर दबाव बनाया। उन्हें डराने की कोशिश की गई। उन्होंने मांग की कि आगामी पंचायत चुनाव में पुलिस निष्पक्ष तरीके से काम करे और किसी राजनीतिक दबाव में चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित न होने दे।
राजस्थान में पंचायत चुनाव से पहले कांग्रेस ने बढ़ाया दबाव
राजस्थान के डीडीपी DGP से कांग्रेस नेताओं की यह मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब प्रदेश में पंचायती राज चुनाव का कार्यक्रम घोषित हो चुका। जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के लिए चार चरणों में 23 अक्टूबर, 29 अक्टूबर, 4 नवंबर और 14 नवंबर को वोट डाले जाएंगे। वहीं पंच और सरपंच के चुनाव 25 अक्टूबर, 31 अक्टूबर, 6 नवंबर और 16 नवंबर को होंगे।
प्रदेश में 41 जिला परिषद, 457 पंचायत समितियों और 14403 ग्राम पंचायतों के लिए चुनाव हो रहे। ऐसे में कांग्रेस की मांग है कि निकाय चुनाव में जिन घटनाओं को लेकर उसने शिकायत की है, वे पंचायत चुनाव में न दोहराई जाएं।
जूली पहले भी सरकारी मशीनरी के बेजा इस्तेमाल का आरोप लगा चुके
जूली ने कुछ दिन पहले भी पंचायत चुनाव को लेकर सरकार पर सवाल उठाए थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि सरकारी मशीनरी के जरिए मौजूदा और पूर्व जिला प्रमुख, प्रधान, जिला परिषद सदस्य और पंचायत समिति सदस्यों के साथ संभावित उम्मीदवारों की जानकारी जुटाई जा रही है।