कांग्रेस महासागर है ​किसी के आने या जाने से कोई फर्क नहीं पड़ता- पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह

Mukesh Sharma | Oct 08, 2026, 19:32 IST
नेम सिंह फौजदार
भरतपुर के पूर्व महाराजा और पूर्व कैबीनेट मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने नेम सिंह फौजदार के कांग्रेस में शामिल होने पर कहा कि कांग्रेस किसी महासागर की तरह है। इसमें किसी व्यक्तित्व की मौजूदगी से कोई फर्क नहीं पड़ता। नेमसिंह का कहना था कि वह निश्चित तौर पर उनसे मिलने की कोशिश करेंगे।

भरतपुर के पूर्व महाराजा और पूर्व कैबीनेट मंत्री विश्वेंद्र सिंह का कहना है कि कांग्रेस एक महासागर है इसमें किसी के आने या जाने से कोई फर्क नहीं पड़ता। सिंह ने गुरुवार को नेमसिंह फौजदार के कांग्रेस में शामिल होने पर पूछे गए सवाल के जवाब में प्रतिक्रिया दी है।



वह महाराजा, मैं एक अदना सा किसान

उधर नेमसिंह फौजदार का कहना है कि विश्वेंद्र सिंह समाज के बुजुर्ग और महाराजा हैं। जबकि वह जमीन से जुड़े एक अदने से कार्यकर्ता और किसान हैं। वह न केवल महाराजा हैं बल्कि कई बार के सांसद विधायक और कैबीनेट मंत्री रह चुके हैं इसलिए मैं मेरी और उनकी कोई बराबरी नहीं है।



कांग्रेस में शामिल होने के बाद महाराजा से मिलने के सवाल पर नेमसिंह का कहना था कि वह निश्चित तौर पर उनसे मिलने की कोशिश करेंगे।




यूं हुआ था विवाद

विश्वेंद्र सिंह ने अपने वीडियो संदेश में पुराने राजनीतिक घटनाक्रमों का जिक्र करते हुए कई सवाल उठाए थे और नेम सिंह को आमने-सामने बैठकर बातचीत करने की चुनौती दी थी। उन्होंने कहा था कि पंचायत बुलाकर सामने बैठकर यह बात होनी चाहिए कि उन्होंने नेम सिंह के लिए क्या किया और नेम सिंह ने उनके लिए क्या किया।



दरअसल,विवाद की शुरुआत विश्वेंद्र सिंह की ओर से नेम सिंह पर उनके ही गांव में कुछ टिप्पणी करने से हुई थी। नेम सिंह के अनुसार विश्वेंद्र सिंह उनकी माताजी का निधन होने पर उनके गांव तक आने के बावजूद शोक प्रकट करने तक नहीं आए और गांव में हुए कार्यक्रम में उन्हें शहीद विधायक कहकर उन पर कटाक्ष कर रहे थे। इसे लेकर नेम सिंह ने एक वीडियो जारी किया था।



जवाब में विश्वेंद्र सिंह ने भी वीडियो जारी करके नेम सिंह को जवाब और सीमा में रहने की चेतावनी दी थी। उनका कहना था कि उन्हें नेमसिंह की माताजी की सूचना पहले मिली होती तो वह संवेदना प्रकट करने उनके घर जरुर जाते। वीडियो में विश्वेंद्र सिंह ने भरतपुर-धौलपुर के जाटों के आरक्षण के लिए लोकसभा से इस्तीफा देने और आरक्षण आंदोलन में नेमसिंह सहित अन्यों को मुकदमों से बचाने,नेमसिंह को जाट आरक्षण आंदोलन की कमान सौंपने तथा पंचायत बुलाने का बयान दिया था। विश्वेंद्र सिंह ने कहा था कि नेमसिंह दो चुनाव पहले विधानसभा चुनाव में उनकी और महारानी की मदद मांगने के लिए पैरों में गिर गए थे।



दे चुका हूं नोटिस का जवाब तो

प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अनुशासन कमेटी की ओर से मिले नोटिस के जवाब देने के सवाल पर विश्वेंद्र सिंह ने कहा कि वह अपनी फेसबुक पोस्ट पर पहले ही जवाब दे चुके हैं। उन्होंने अनुशासन समिति के अध्यक्ष उदयलाल आंजना को अपना मित्र बताया।



दरअसल विश्वेंद्र सिंह ने निकाय चुनाव के बाद पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा और डीग तथा भरतपुर के जिला अध्यक्षों पर काफी तीखी टिप्पणी की थीं। उन्होंने यहां तक कह दिया था कि यदि डोटासरा भरतपुर आए तो वह उनका 2013 में किए डॉ.चंद्रभान से भी ज्यादा जबर्दस्त स्वागत करेंगे।



गौरतलब है कि 2013 में तत्कालीन पीसीसी चीफ डॉ.चंद्रभान भरतपुर पार्टी के एक कार्यक्रम में गए थे। विश्वेंद्र की मौजूदगी में उनके समर्थकों ने कार्यक्रम में मौजूद नेताओं के साथ मारपीट कर दी थी और डॉ.चंद्रभान बड़ी मुश्किल से वहां से निकल पाए थे।




डोटासरा बोले विश्वेंद्र मेरे बड़े भाई


विश्वेंद्र सिंह के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए गोविंद सिंह डोटासरा ने उन्हें अपना बड़ा भाई बताया था। लेकिन,उसी शाम पीसीसी अनुशासन समिति के चेयरमैन उदयलाल आंजना ने उन्हें कारण बताओ नोटिस भेजकर आठ बिंदुओं पर सात दिन में जवाब मांगा था। सात दिन का समय कल शुक्रवार 9 अक्टूबर केा खत्म हो रहा है।




यह लिखा था फेसबुक पर

विश्वेंद्र सिंह ने नोटिस को अपने पेज पर आंजना केा संबोधित करते हुए लिखा था कि वह पहले उनके नोटिस का जवाब दें या डोटासरा के बयान पर प्रतिक्रिया दें। एक ओर डोटासरा उन्हें अपने बड़े भाई के रुप में देख रहे हैं और दूसरी ओर आपकी कारगुजारी सामने है। मैं और मेरे समर्थक किंकर्तव्यविमूढ़ हैं। उन्होंने लिखा था कि आंजना अपनी कार्यवाही के लिए स्वतंत्र हैं और वह अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर स्वतंत्र हैं। सिंह का कहना था कि उम्र के इस पड़ाव पर उन्हें किसी की नसीहत की जरुरत नहीं है।

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