कांग्रेस की एक नवंबर की रैली, कांग्रेस जिला अध्यक्षों के लिए भीड़ जुटाओ, कुर्सी बचाओ!

Mukesh Sharma | Oct 29, 2026, 15:57 IST
रामलीला मैदान रैली में 10-10 हजार भीड़ का टारगेट। दीपावली और पंचायत चुनाव के बीच जिला अध्यक्ष पर दबाव।
कांग्रेस की एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाली रैली राजस्थान के कांग्रेस जिला अध्यक्षों के लिए मुसीबत और परीक्षा दोनों साबित हो रही है।रैली की तैयारी के लिए पिछले दिनों कांग्रेस महासचिव संगठन के.सी.वेणुगोपाल पिछले सप्ताह जयपुर आए थे। उन्होंने कांग्रेस के जिला अध्यक्षों को रैली में 10-10 हजार की भीड़ लाने का टारगेट दिया है।

इसके बाद जिला अध्यक्षों ने प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा (Govind Singh Dotasra) को इतनी भीड़ लाने में परेशानी बताई, लेकिन डोटासरा ने पल्ला झाड़ लिया। उन्होंने कहा कि यह जिला अध्यक्षों और के.सी.वेणुगोपाल के बीच की बात है और वह कुछ नहीं कर सकते।



​हर दिन भेजनी होती है रिपोर्ट

कांग्रेस ने संगठन सृजन अभियान के तहत कार्यकर्ताओं, विधायक व अन्य नेताओं की सहमति से जिला अध्यक्ष नियुक्त किए थे। इन जिला अध्यक्षों को हर दिन एक ऐप के जरिए अपनी हर दिन की गतिविधियों की रिपोर्ट फोटो या वीडियो के साथ एआईसीसी को भेजनी होती है। इसमें उन्हें हर दिन किए गए कार्यक्रम व गतिविधियों की जानकारी देनी होती है।



पार्टी इस रिपोर्ट के आधार पर हर जिला अध्यक्ष की तिमाही रिपोर्ट बनाकर रिव्यू करती है और उसी के आधार पर उन्हें पद पर बनाए रखने या हटाने के बारे में राय बनाती है। बताया जा रहा है कि इसी आधार पर कुछ राज्यों में कई जिला अध्यक्षों को हटाया गया है।




रैली के लिए भीड़ जुटाना चुनौती

राजस्थान में फिलहाल पंचायत चुनाव (Panchayat Election) चल रहे हैं और यह नवंबर महीने के अंत तक चलेंगे। 8 नवंबर को दीपावली जैसा बड़ा त्यौहार है। ऐसे में जिला अध्यक्षों के लिए रैली के लिए भीड़ जुटाना न केवल बड़ी चुनौती है बल्कि बेहद मुश्किल साबित हो रहा है।



हालांकि पार्टी पदाधिकारियों का कहना है कि सिर्फ उन्हीं जिलों के कार्यकर्ताओं को रैली में ले जाया जाएगा जहां मतदान हो चुका है और दीपावली के सात दिन एक दिन के लिए जाने में किसी को परेशानी नहीं है।




फिर विधायक व विधायक प्रत्याशी क्या करेंगे?

कांग्रेस के कुछ जिला अध्यक्षों का कहना है कि रैली जैसे आयोजन में कार्यकर्ताओं को ले जाना सिर्फ जिला अध्यक्षों की ही जिम्मेदारी नहीं है। इस काम में विधायक और विधायक प्रत्याशियों की अहम भूमिका होती है। इसलिए विधायक व सांसद तथा विधायक व सांसद प्रत्याशियों का प्रत्यक्ष के बिना रैली में इतनी बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं को ले जाना संभव नहीं होगा।




देना होगा सबूत

कांग्रेस जिला अध्यक्षों के लिए बड़ी परेशानी रैली में जाने वाले वाहनों और कार्यकर्ताओं का सबूत देना बना हुआ है। दरअसल पार्टी ने सभी जिला अध्यक्षों को रैली में जाने वाले वाहनों की फोटो और वीडियो भेजने को कहा है।



क्यों कि अब तक 200-500 लोगों ले जाने वाले बसों के आगे फोटो खिंचवाकर हजारों की भीड़ ले जाने का दावा करते थे। लेकिन, इस बार पार्टी की कोशिश है कि ऐसे फर्जी दावे करने वालों की पहचान ​की जाए।




फेल जिला अध्यक्षों को हटाया जाएगा

पार्टी के एक उच्च पदाधिकारी के अनुसार जिला अध्यक्षों की नियुक्ति संबंधित जिले के ​विधायक व सांसद के साथ ही विधायक व सांसद प्रत्याशियों सहित कार्यकर्ताओं की सर्वसम्मति और पसंद के आधार पर हुई है। इसलिए अब यह सभी की जिम्मेदारी है कि वह अपनी पसंद के जिला अध्यक्ष की हर संभव मदद करें और पार्टी के हर कार्यक्रम को सफल बनाएं।



लेकिन, यह भी तय है कि रैली के बाद सभी जिला अध्यक्षों के अब तक के कार्यकाल की समीक्षा होगी। इसके बाद कसौटी पर खरे नहीं उतरने वाले जिला अध्यक्षों पर पुर्नविचार किया जाएगा और जहां जरुरत होगी वहां नए जिला अध्यक्ष की नियुक्ति की जाएगी।

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