अस्पतालों के दूषित पानी से मरीजों में पहुंच रहा सीवेज का बैक्टीरिया, प्यूरीफायर भी खराब तो कहां से मिले पीने लायक पानी

Jageshwar Prasad | Oct 26, 2026, 10:42 IST
सरकारी अस्पतालों में मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़। पानी में सीवेज बैक्टीरिया और नाइट्रेट।
सरकारी अस्पतालों में मरीज अपनी बीमारियों का इलाज कराने पहुंचते हैं, लेकिन उन्हें वहां संक्रमण का बड़ा खतरा मिल रहा है। हाल ही में जयपुर, सीकर और श्रीगंगानगर के एक दर्जन से अधिक अस्पतालों के पानी के नमूनों की जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए। यहां कहीं पानी में कोलीफॉर्म बैक्टीरिया मिले हैं, तो कहीं नाइट्रेट की मात्रा निर्धारित सीमा से 6 गुना तक अधिक पाई गई है।

श्रीगंगानगर के रावला मंडी सीएचसी के पानी में 100 एमएल में 460 बैक्टीरिया मिले, जबकि सीकर के जनाना अस्पताल में नाइट्रेट 290 मिलीग्राम प्रति लीटर दर्ज किया गया। इस लापरवाही ने अस्पतालों की व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।



अस्पतालों में पानी के रखरखाव की पोल खुली

पड़ताल में सामने आया कि अधिकांश अस्पतालों में ट्यूबवेल का पानी सीधे टंकियों में स्टोर किया जाता है। कई अस्पतालों की टंकियों पर सफाई की तारीख तक दर्ज नहीं मिली, जबकि कई जगहों पर वाटर प्यूरीफायर पूरी तरह खराब पड़े हैं।



विशेषज्ञों के मुताबिक, अस्पताल में आने वाले मरीज पहले से ही अस्वस्थ और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले होते हैं। ऐसे में दूषित पानी (Contaminated water)पीने से पेट और आंतों का गंभीर संक्रमण होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।



सीकर और श्रीगंगानगर के अस्पतालों का हाल बेहाल

शेखावाटी के सबसे बड़े एसके अस्पताल में रोजाना 5 हजार से ज्यादा मरीज आते हैं। यहां पानी के सैंपल में 100 एमएल में 23 से अधिक कोलीफॉर्म बैक्टीरिया और 140 मिलीग्राम प्रति लीटर नाइट्रेट मिला, जबकि टंकी के पास लगा प्यूरीफायर खराब पड़ा है।



सीकर के ही जनाना अस्पताल में नाइट्रेट की मात्रा 290 मिलीग्राम प्रति लीटर (तय सीमा 45 से 6 गुना ज्यादा) पाई गई। लक्ष्मणगढ़ जिला अस्पताल में 43 और श्रीमाधोपुर सीएचसी में 9 बैक्टीरिया मिले।



उधर, श्रीगंगानगर के रावला मंडी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के पानी में 100 एमएल में 460 बैक्टीरिया दर्ज किए गए। टंकी के पास गंदगी के बीच से ही मरीजों के लिए पानी भरा जा रहा था।



जयपुर जिले के अस्पतालों में भी नाइट्रेट की अधिकता

जयपुर जिले के चौमूं राजकीय उप जिला अस्पताल के पानी में नाइट्रेट 80 मिलीग्राम प्रति लीटर और गोविंदगढ़ सीएचसी में 109 मिलीग्राम प्रति लीटर पाया गया। हालांकि, राहत की बात यह रही कि जयपुर जिले के जांचे गए अस्पतालों के पानी में बैक्टीरिया नहीं मिले, लेकिन नाइट्रेट की मात्रा मानकों से काफी अधिक रही।



अधिकारियों के बयान और सफाई

मामले के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने जांच का आश्वासन दिया है:



  • नरोत्तम शर्मा (एडिशनल डायरेक्टर, अस्पताल प्रशासन): "सभी अस्पतालों से रिपोर्ट मंगवाकर लापरवाही की जांच कराएंगे।"
  • डॉ. अशोक महरिया (सीएमएचओ, सीकर): "पानी की गुणवत्ता में गड़बड़ी की सूचना मिलने पर जांच कराएंगे।"
  • डॉ. अजय सिंगला (सीएमएचओ, श्रीगंगानगर): "अस्पतालों में आरओ लगे हैं। जहां कोलीफॉर्म ज्यादा मिलते हैं, वहां ब्लीचिंग पाउडर से बैक्टीरिया नियंत्रित किए जाते हैं।"
  1. सरकारी अस्पतालों में पानी की गुणवत्ता के बारे में हाल ही में क्या गंभीर खुलासे हुए हैं?
    हाल ही में सरकारी अस्पतालों के पानी के नमूनों की जांच में कोलीफॉर्म बैक्टीरिया (Coliform Bacteria) और नाइट्रेट की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक पाई गई है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। उदाहरण के लिए, श्रीगंगानगर के रावला मंडी सीएचसी में 100 एमएल में 460 बैक्टीरिया मिले, जबकि सीकर के जनाना अस्पताल में नाइट्रेट 290 मिलीग्राम प्रति लीटर पाया गया।
  2. अस्पतालों में पानी की समस्या के कारण क्या स्वास्थ्य के खतरनाक प्रभाव हो सकते हैं?
    दूषित पानी पीने से मरीजों में पेट और आंतों का गंभीर संक्रमण हो सकता है, खासकर उन लोगों के लिए जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता पहले से ही कमजोर होती है।
  3. सरकारी अधिकारियों ने राजस्थान के अस्पतालों में पानी की गुणवत्ता में सुधार के लिए क्या कदम उठाने का आश्वासन दिया है?
    स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने लापरवाही की जांच का आश्वासन दिया है। एडिशनल डायरेक्टर नरोत्तम शर्मा ने कहा है कि सभी अस्पतालों से रिपोर्ट मंगवाई जाएगी और जांच की जाएगी।
Tags:
  • कोलीफॉर्म बैक्टीरिया
  • सरकारी अस्पताल
  • अस्पतालों के पानी के नमूनों की जांच
  • नाइट्रेट की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक
  • वाटर प्यूरीफायर पूरी तरह खराब
  • coliform bacteria
  • Contaminated water
  • स्वास्थ्य विभाग