अदालत में कर रहा था रिकॉर्डिंग, हाई कोर्ट ने दिए एफआईआर दर्ज कराने के आदेश
News In Short
- बिना अनुमति मोबाइल से कोर्ट कार्यवाही रिकॉर्ड करने पर कोर्ट ने जताई कड़ी नाराजगी।
- रिकार्डिंग करने वाले ने पकड़े जाने पर डेटा डिलीट करने की कोशिश की, मोबाइल जब्त।
- हाई कोर्ट ने इसे आपराधिक अवमानना मानते हुए आरोपियों को जारी किए अवमानना नोटिस
- न्यायिक मर्यादा बनाए रखने के लिए अन्य बेंच में होगी ऐसे मामलों की सुनवाई।
News In Detail
Jaipur: राजस्थान हाई कोर्ट ने कोर्ट कार्यवाही की अवैध रुप से वीडियो रिकॉर्डिंग करने पर दो व्यक्तियों के खिलाफ प्रसंज्ञान लिया है। कोर्ट ने दोनों को नोटिस देकर पूछा है कि क्यों ना उनके खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरु की जाए।
कोर्ट ने रजिस्ट्रार न्यायिक को आरोपी का मोबाइल फोन जब्त करने और अदालती कार्रवाई में दखल देने पर एफआईआर दर्ज करवाने को भी कहा है।
ऐसे कर रहा था फोन से रिकॉर्डिंग
दरअसल सोमवार को जस्टिस अनूप डंढ की बैंच में एक आपराधिक याचिका पर सुनवाई चल रही थी। याचिकाकर्ता कमल राठौड़ स्वयं ही मामले में बहस कर रहा था। इसी दौरान कोर्ट को पता चला कि एक व्यक्ति कोर्ट कार्रवाई की अपने मोबाइल फोन से वीडियो रिकॉर्डिंग कर रहा है।
कोर्ट के निर्देश पर जब उस व्यक्ति को पकड़ा गया तो उसने अपने फोन से रिकार्डिंग डीलीट करने की कोशिश की। पूछने पर उसने अपना नाम अनिल सुमन और याचिकाकर्ता का ड्राइवर होना और उसके लिए ही रिकॉर्डिंग करना बताया। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता कमल राठौड़ और अनिल सुमन का यह कृत्य ना केवल न्यायिक प्रक्रिया में दखल है बल्कि अदालत की अवमानना है।
कोर्ट ने यह भी किया जिक्र
कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग नियम-2020 के नियम 3(vi) का भी हवाला दिया। यह नियम स्पष्ट रूप से किसी भी व्यक्ति या संस्था द्वारा कार्यवाही की अनधिकृत रिकॉर्डिंग को प्रतिबंधित करता है।
अदालत ने अरुंधति रॉय के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि यदि न्यायिक प्रक्रिया में आम आदमी का विश्वास डगमगाता है तो यह समाज के लिए विनाशकारी होगा ।
एफआईआर के आदेश भी दिए
कोर्ट ने मामले में गंभीर रुख अपनाते हुए याचिकाकर्ता कमल राठौड़ और अनिल सुमन को नोटिस देकर पूछा है कि क्यों ना उनके खिलाफ आपराधिक अवमानना कार्रवाई शुरु की जाए? इसके अतिरिक्त, रजिस्ट्रार (न्यायिक) को निर्देश दिया गया है कि वे अनिल सुमन का मोबाइल फोन जब्त करें और अशोक नगर पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज करवाकर उचित कार्रवाई करने केा कहें।
अदालत ने मामले में निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए इन याचिकाओं को किसी अन्य उपयुक्त पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करने के लिए एक्टिंग चीफ जस्टिस के समक्ष पेश करने को कहा है।
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