5वीं पास निकला करोड़ों के साइबर नेटवर्क का मास्टरमाइंड, कश्मीर तक फैला था जाल
समझें क्या है पूरा मामला
- पांचवीं पास शौकीन निकला साइबर ठगी का मास्टरमाइंड।
- 20 साल के आरोपी ने खड़ा किया 24 लोगों का गैंग।
- राजस्थान पुलिस ने अंतरराज्यीय साइबर ठग पकड़ा।
- ठगी की कमाई से खरीदी कार, मकान और जमीन।
- फर्जी सिम और खातों से चलता था ठगी नेटवर्क।
सुनील जैन@अलवर
राजस्थान पुलिस ने एक हैरान करने वाला मामला उजागर किया है। पुलिस ने साइबर संग्राम अभियान 3.0 के तहत एक अंतरराज्यीय साइबर ठग को गिरफ्तार किया है। इस आरोपी ने महज पांचवीं कक्षा तक पढ़ाई की थी। इसके बावजूद उसने देश के कई राज्यों में साइबर ठगी का बड़ा नेटवर्क खड़ा कर लिया था।
आरोपी की उम्र 20 साल है और उसका नाम शौकीन बताया गया है। उसने करीब 24 लोगों की गैंग तैयार कर रखी थी। यह गैंग फर्जी सिम कार्ड, म्यूल बैंक खाते और पूरे ऑनलाइन ठगी नेटवर्क को संचालित करती थी।
गरीबी से करोड़ों की संपत्ति तक का सफर
पुलिस जांच में एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। पांच साल पहले तक आरोपी आर्थिक तंगी में जीवन बिता रहा था। लेकिन आज वह करोड़ों की संपत्ति का मालिक बन चुका है।
साइबर ठगी की कमाई से उसने कई बड़ी चीजें खरीदीं। इसमें कार, मकान और कृषि भूमि शामिल है। पुलिस ने उसके कब्जे से एक सफेद ब्रेजा कार भी बरामद कर जब्त की है। प्रथम दृष्टया यह कार भी साइबर ठगी की रकम से ही खरीदी गई मानी जा रही है।
कैसे चलता था ठगी का पूरा नेटवर्क
पुलिस के अनुसार आरोपी के ठगी के तरीके बेहद सुनियोजित थे। वह सोशल मीडिया पर मेडिकल इमरजेंसी का झांसा देता था। इसके जरिए वह लोगों से पैसे ट्रांसफर करवा लेता था।
इसके अलावा वह एक और तरीका भी अपनाता था। वह महिलाओं के सस्ते सूट-सलवार बेचने के फर्जी विज्ञापन और वीडियो पोस्ट करता था। खुद को कपड़ा फैक्ट्री का मालिक बताकर वह लोगों को ठगता था। ठगी की पूरी रकम म्यूल खातों में मंगवाई जाती थी। पूरा नेटवर्क फर्जी सिम कार्डों के जरिए संचालित होता था।
अपने नाम पर नहीं खरीदता था मोबाइल-सिम
इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात कुछ और है। आरोपी कभी भी अपने नाम से मोबाइल नहीं खरीदता था। वह सिम कार्ड भी अपने नाम से नहीं लेता था। उसके पास से बरामद मोबाइल, सिम कार्ड और मोबाइल बिल भी दूसरे लोगों के नाम पर मिले हैं।
पुलिस को एक बड़ी आशंका भी है। माना जा रहा है कि पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों से फर्जी सिम उपलब्ध कराने वाला एक बड़ा नेटवर्क भी इसके पीछे सक्रिय है।
पहले भी दर्ज थे मामले, नहीं खुला था राज
यह पहली बार नहीं है जब आरोपी पुलिस के रडार पर आया हो। दो साल पहले मालाखेड़ा थाने में उसके खिलाफ साइबर ठगी का मामला दर्ज हुआ था। लेकिन उस समय जांच ज्यादा आगे नहीं बढ़ सकी थी।
बाद में एक और मामले ने इस राज से पर्दा उठाया। चंडीगढ़ में दर्ज साइबर ठगी के मामले की जांच के दौरान उसके नेटवर्क की परतें खुलनी शुरू हुईं। जांच में पता चला कि वह कई राज्यों में संगठित तरीके से साइबर अपराध कर रहा था। वह फर्जी सिम और म्यूल खाते उपलब्ध कराने का काम भी करता था।
जम्मू-कश्मीर से राजस्थान तक फैला नेटवर्क
आरोपी का नेटवर्क सिर्फ एक राज्य तक सीमित नहीं था। पुलिस के अनुसार उसने जम्मू-कश्मीर, पंजाब, मध्यप्रदेश और राजस्थान सहित कई राज्यों के लोगों को ठगी का शिकार बनाया।
अब पुलिस उसके अन्य साथियों की तलाश में जुट गई है। इसके लिए एक विशेष टीम बनाई गई है। पूरे नेटवर्क की जांच अभी भी जारी है।
15 अगस्त तक होगी बड़ी कार्रवाई
पुलिस अधीक्षक सुधीर चौधरी ने इस मामले पर अहम बयान दिया है। उन्होंने साफ किया कि अलवर पुलिस का लक्ष्य क्या है। पुलिस 15 अगस्त से पहले जिले के सभी बड़े साइबर अपराधियों को गिरफ्तार करना चाहती है।
इसके साथ ही एक और बड़ा लक्ष्य है। पुलिस साइबर ठगी से अर्जित संपत्ति की पहचान कर उसे जब्त करने की कार्रवाई भी करना चाहती है। एसपी ने एक अच्छी खबर भी साझा की। लगातार कार्रवाई के चलते अलवर जिले की रैंकिंग में सुधार हुआ है। पहले साइबर अपराध में यह जिला शीर्ष हॉटस्पॉट माना जाता था। अब यह जिला आठवें स्थान पर आ गया है।
विशेष अभियान में 39 साइबर अपराधी गिरफ्तार
अलवर पुलिस ने हाल ही में एक बड़ा अभियान भी चलाया है। यह राजस्थान पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर चलाया गया। यह अभियान 20 जुलाई से 4 अगस्त तक चला।
इस दौरान पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की। कुल 33 साइबर प्रकरण दर्ज किए गए। इसमें 39 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। जिले में 191 साइबर हॉटस्पॉट चिन्हित किए गए थे। इनमें से 177 स्थानों पर पुलिस ने दबिश दी। इस पूरी कार्रवाई में पुलिस ने 37.67 लाख रुपए की ठगी की रकम होल्ड कराई। साथ ही पीड़ितों को 6.55 लाख रुपए वापस भी दिलाए गए।
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