डांगावास दलित हत्याकांड में आया फैसला, कोर्ट ने सभी 40 आरोपी किए बरी
समझें क्या है पूरा मामला
- 2015 के नागौर डांगावास हत्याकांड में मेड़ता एससी/एसटी कोर्ट का फैसला।
- 3.77 हेक्टेयर भूमि विवाद और पंचायत के दौरान हुई हिंसक झड़प में 6 लोगों की हुई थी मौत।
- सीबीआई द्वारा पेश किए गए सबूतों के साबित न होने पर सभी आरोपियों को किया बरी।
- राज्य सरकार ने पहले सीआईडी और बाद में मामला सीबीआई को सौंपा था।
राजस्थान के नागौर जिले के डांगावास में 15 मई 2015 को हुए दलित हत्याकांड में कोर्ट ने सभी 40 आरोपियों को बरी कर दिया है। मेड़ता की एसटी-एससी मामलों की विशेष कोर्ट ने बुधवार को यह फैसला दिया। इस हत्याकांड में 6 लोगों की मौत हुई थी। कोर्ट ने मामले में सीबीआई की ओर से पेश सबूतों के साबित नहीं होने के आधार पर आरोपियों को बरी किया है।
यह था मामला
15 मई 2015 को, राजस्थान के नागौर जिले के डंगावास गाँव में भूमि विवाद को लेकर जाट समुदाय के 200 से अधिक सदस्यों ने पांच दलितों सहित छह लोगों पर हमला कर उनकी हत्या कर दी थी। तत्कालीन राज्य सरकार ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपी थी। सीबीआई ने जांच के बाद आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी।
यह 3.77 हेक्टेयर जमीन का विवाद था
एक जाट परिवार के वंशजों ने दावा था कि वह जमीन 1964 में एक दलित ने एक जाट को बेची थी। लेकिन, 1955 के राजस्थान काश्तकारी अधिनियम-1955 की धारा 42 के अनुसार, अनुसूचित जाति (SC) के किसी सदस्य की जमीन को एसटी सहित किसी अन्य समुदाय के व्यक्ति को हस्तांतरित या बेचा नहीं जा सकता है।
दलित परिवार की कहानी
दलित परिवार का कहना था कि उन्होंने करीब 40 साल पहले जाट परिवार को जमीन पर खेती के अधिकार देकर उनसे 1500 रुपये उधार लिए थे। 20 साल बाद जब उनके पैसे वापस लौटाए तो जाट परिवार ने जमीन वापस करने से इनकार कर दिया। बाद में मामला स्थानीय अदालत में पहुंचा। अदालत में भूमि रिकॉर्ड में विसंगतियों के कारण यह लंबित रहा। मई 2015 में हिंसा में मारे गए रत्नाकर मेघवाल ने जमीन के उसी टुकड़े पर एक मकान बना लिया था।
गांव की पंचायत में हुआ था बवाल
जमीन को लेकर जाट व मेघवाल समाज के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। विवाद को सुलझाने के लिए गांव की पंचायत बुलाई गई थी। बातचीत के दौरान जाटों ने दलित परिवार के एक सदस्य अर्जुन पर लाठी से वार कर दिया। विवाद बढ़ा तो जाटों की भीड़ में से किसी ने दलित रामपाल पर फायर कर दिया और उसकी मौके पर ही मौत हो गई थी।
इसके बाद जाटों ने दलित परिवार पर हमला कर दिया। दलित पोखरमल,रत्नाराम व पांचूराम को ट्रैक्टर से रौंदकर मार डाला। निर्दयता इतनी कि पांचूराम को मारने के बाद उसकी आंखों में लकड़ी घोंप दी गई थी। एक दलित महिला पर नुकीली वस्तुओं और डंडों से प्रहार कर उसे गंभीर रुप से घायल कर दिया था। परिवार के लोग बचने के लिए छत पर छिपे तो उग्र भीड़ ने घर ही ढ़हा दिया था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए राजस्थान सरकार ने जांच सीआईडी (CID) को सौंप दी और बाद में मामला सीबीआई (CBI) को रेफर कर दिया गया। इसके बाद सीबीआई ने 40 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी और 17 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। जनवरी 2018 में नागौर के मेड़ता स्थित एससी/एसटी अत्याचार मामलों की स्पेशल कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई थी।
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