आवारा सांड के हमले में जान गंवाने पर प्रशासन पर लगा 61.35 लाख का जुर्माना, एडीजे कोर्ट ने दिए निर्देश
शहर की सड़कों पर खुलेआम घूमते आवारा पशु अब केवल ट्रैफिक की समस्या नहीं रहे, बल्कि आम नागरिक की जिंदगी के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं।
इस प्रशासनिक लापरवाही और लापरवाही पर जयपुर महानगर द्वितीय की एडीजे-8 कोर्ट ने तत्कालीन हैरिटेज नगर निगम, जयपुर कलेक्टर और स्वायत्त शासन विभाग के सचिव की संयुक्त जवाबदेही तय करते हुए पीड़ित परिवार को ब्याज सहित 61.35 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया है।
यह है मामला
यह दर्दनाक हादसा करीब चार साल पहले घटित हुआ था। पुलिस रिकॉर्ड और परिजनों द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक 13 नवंबर 2022 को मृतक गिर्राज प्रसाद शर्मा जयपुर के रामगढ़ मोड़ पर बस का इंतजार कर रहे थे।
इसी दौरान पीछे से आए एक बेकाबू आवारा सांड ने उन्हें ज़ोरदार टक्कर मार दी और नीचे गिरा दिया। इस जानलेवा हमले में गिर्राज प्रसाद के सिर और शरीर पर कई गंभीर चोटें आईं। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।
पति और परिवार के कमाने वाले मुख्य सदस्य को इस तरह अचानक खो देने के बाद, मृतक की पत्नी रेखा देवी ने नगर निगम हैरिटेज, जिला कलेक्टर और स्वायत्त शासन सचिव के खिलाफ घातक दुर्घटना एक्ट-1855 के तहत क्षतिपूर्ति (Fatal Accident Claim) का दावा दायर किया।
निगम ने झाड़ा पल्ला अदालत का मानने से इंकार
अदालत में सुनवाई के दौरान नगर निगम हैरिटेज ने अपनी नाकामी छुपाने के लिए अजीबोगरीब और विरोधाभासी दलीले दीं। एक ओर निगम ने दावा किया कि मृतक की मौत सांड की टक्कर से नहीं, बल्कि किसी अज्ञात वाहन की टक्कर से हुई है। वहीं दूसरी ओर कहा कि उसने शहर में आवारा पशुओं को पकड़ने का काम एक निजी ठेकेदार फर्म को सौंप रखा है। इसलिए इस हादसे के लिए निगम सीधे तौर पर जिम्मेदार नहीं है और परिवादिया का दावा खारिज किया जाए।
हालांकि,अदालत ने निगम की इन दलीलों को सिरे से नकारते हुए पुलिस की रोजनामचा रिपोर्ट (General Diary Entry) और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का गहन अवलोकन किया। दोनों ही रिपोर्ट से स्पष्ट रूप से साबित हुआ कि गिर्राज प्रसाद की मौत आवारा सांड के टक्कर मारने के कारण सिर में लगी गंभीर चोटों के कारण ही हुई थी।
ठेका देने से खत्म नहीं होती निगम की जिम्मेदारी
दोनों पक्षों की बहस सुनने और सबूतों के अध्ययन के बाद अदालत ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक स्थानों और सड़कों को नागरिकों के लिए सुरक्षित बनाना स्थानीय प्रशासन और सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। किसी निजी फर्म को काम का ठेका दे देने भर से नगर निगम या शासन अपनी संविधानिक,कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो सकता।
कोर्ट का आदेश
अदालत ने तत्कालीन हैरिटेज निगम,जयपुर कलेक्टर और स्वायत्त शासन सचिव को संयुक्त रूप से मृतक के आश्रितों को 61.35 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा है कि मुआवजा राशि पर चार अप्रैल, 2023 से 6 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज भी अदा करना होगा।
प्रशासन के लिए चेतावनी
अदालत का यह फैसला केवल एक पीड़ित परिवार को मिला न्याय ही नहीं है, बल्कि उन तमाम नगर निकायों और प्रशासनिक महकमों के लिए चेतावनी है,जो ठेका देकर या जिम्मेदारी दूसरों पर डालकर अपनी कर्तव्यों से पल्ला झाड़ लेते हैं।
इसके साथ ही यह फैसला आवारा पशुओं के प्रबंधन में ढिलाई बरतने वाले निकायों के लिए चेतावनी भी है कि आम जनता की जान से खिलवाड़ करने पर उन्हें भारी वित्तीय और कानूनी कीमत चुकानी पड़ेगी।