आस्था, विरासत और पर्यटन को मिलेगा नया आयाम, चार धार्मिक स्थलों के विकास के लिए 50.93 करोड़ मंजूर

Jageshwar prasad | Oct 02, 2026, 15:58 IST
चार धार्मिक स्थलों के विकास के लिए स्वदेश दर्शन योजना के तहत 50.93 करोड़ रुपए मंजूर
केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत की पहल से चार धार्मिक स्थलों के विकास के लिए 50.93 करोड़ रुपए स्वीकृत हुए हैं। रामदेवरा को 21.16 करोड़, मां देगराय मंदिर को 11.84 करोड़ और मेहोजी मांगलिया मंदिर को 16 करोड़ की राशि मिली है। इसके साथ ही कोलू पाबूजी धाम के लिए 1.93 करोड़ स्वीकृत किए गए हैं। यह राशि श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुविधाओं के विकास पर खर्च की जाएगी।

समझें क्या है पूरा मामला

  • चार धार्मिक स्थलों के लिए 50.93 करोड़ स्वीकृत
  • रामदेवरा को मिले 21.16 करोड़ रुपए
  • मां देगराय मंदिर के लिए 11.84 करोड़
  • मेहोजी मांगलिया मंदिर को 16 करोड़
  • कोलू पाबूजी धाम के लिए 1.93 करोड़

नरेश रमेश @ जोधपुर



जोधपुर सांसद और केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत की पहल पर बड़ी सौगात मिली है। भारत सरकार ने स्वदेश दर्शन योजना (Swadesh Darshan scheme) के तहत जोधपुर और जैसलमेर क्षेत्र के चार प्रमुख धार्मिक स्थलों के विकास के लिए 50.93 करोड़ रुपए स्वीकृत किए हैं।



इनमें रामदेवरा स्थित बाबा रामदेवजी की पावन स्थली के लिए 21.16 करोड़ रुपए मंजूर हुए हैं। जैसलमेर स्थित मां देगराय मंदिर के लिए 11.84 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं। फलोदी के बापिणी स्थित लोकदेवता मेहोजी मांगलिया मंदिर के लिए 16 करोड़ रुपए मिले हैं। कोलू पाबूजी धाम के लिए 1.93 करोड़ रुपए स्वीकृत हुए हैं।



इस राशि से इन चारों धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों पर श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आवश्यक सुविधाओं का विकास किया जाएगा। साथ ही इन स्थलों की धार्मिक आस्था, लोकपरंपरा, ऐतिहासिक विरासत और सांस्कृतिक महत्व को संरक्षित करते हुए इन्हें पर्यटन की दृष्टि से भी बेहतर ढंग से विकसित किया जाएगा।



रामदेवरा में विकसित होंगी सुविधाएं

राजस्थान लोकदेवताओं (Rajasthan folk deities) में बाबा रामदेवजी का रामदेवरा धाम विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखता है। देशभर से श्रद्धालु बाबा रामदेवजी की समाधि के दर्शन के लिए रामदेवरा पहुंचते हैं। भादवा मेले के दौरान यहां लाखों श्रद्धालुओं और जातरुओं का विशाल जनसमागम होता है।



केंद्रीय मंत्री शेखावत ने कहा कि बाबा रामदेवजी के प्रति समाज के सभी वर्गों में गहरी आस्था है। रामदेवरा सामाजिक समरसता, सद्भाव और लोकआस्था की हमारी समृद्ध परंपरा का प्रतीक है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकास भी, विरासत भी के विजन के अनुरूप रामदेवरा में श्रद्धालुओं की सुविधाओं के विस्तार और धार्मिक पर्यटन को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से 21.16 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं।



इस राशि से रामदेवरा में श्रद्धालु और पर्यटक सुविधाओं से जुड़े महत्वपूर्ण विकास कार्य किए जाएंगे। इससे देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी। साथ ही बाबा रामदेवजी से जुड़ी इस महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और विकास को नई गति मिलेगी।



मां देगराय मंदिर को 11.84 करोड़



जैसलमेर की आराध्या और ऐतिहासिक आस्था केंद्र मां देगराय मंदिर के विकास के लिए 11.84 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं। इस राशि से मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक सुविधाओं का विकास किया जाएगा। साथ ही इस ऐतिहासिक धार्मिक स्थल को पर्यटन की दृष्टि से भी विकसित किया जाएगा।



शेखावत ने कहा कि मां देगराय के प्रति जैसलमेरवासियों की आस्था शताब्दियों पुरानी है। भाटी राजवंश की आराध्या और जैसलमेर की रक्षक देवी के रूप में मां देगराय का विशेष स्थान है। यह स्थल जैसलमेर की गौरवशाली ऐतिहासिक परंपरा और सांस्कृतिक विरासत से भी गहराई से जुड़ा हुआ है।



प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां देगराय के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। उनकी सुविधा और आस्था का सम्मान करते हुए यह राशि स्वीकृत की गई है। इससे मंदिर और आसपास के क्षेत्र में आवश्यक सुविधाओं का विस्तार होगा। साथ ही इस महत्वपूर्ण आस्था केंद्र को पर्यटन मानचित्र पर और बेहतर ढंग से विकसित किया जा सकेगा।



मेहोजी मांगलिया मंदिर को 16 करोड़



फलोदी के बापिणी स्थित लोकदेवता मेहोजी मांगलिया मंदिर के विकास के लिए 16 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं। राजस्थान की लोकपरंपरा में मेहोजी मांगलिया वीरता, त्याग और गौसेवा की भावना के प्रतीक माने जाते हैं।



बापिणी स्थित उनका मंदिर क्षेत्र के हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। ग्रामीण समाज में उन्हें लोकदेवता और गौरक्षक के रूप में श्रद्धा से स्मरण किया जाता है। भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को यहां आयोजित होने वाला मेला इस लोकआस्था की जीवंत अभिव्यक्ति है।



शेखावत ने कहा कि मेहोजी मांगलिया से जुड़ी लोकआस्था और गौरवशाली परंपरा राजस्थान की विशिष्ट सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है। इसी विरासत को संरक्षित और विकसित करते हुए यहां 16 करोड़ रुपए की लागत से विभिन्न विकास कार्य करवाए जाएंगे। प्रयास है कि मेहोजी मांगलिया की लोकपरंपरा को व्यापक पहचान मिले। साथ ही श्रद्धालुओं के साथ पर्यटकों को भी बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हों।



कोलू पाबूजी धाम को 1.93 करोड़

राजस्थान के महान लोकदेवता पाबूजी महाराज का फलोदी के कोलू गांव से गहरा संबंध है। वीरता, वचनपालन, गौसेवा और लोककल्याण के लिए पाबूजी महाराज को राजस्थान के जनमानस में सदियों से श्रद्धा के साथ स्मरण किया जाता है। लोकमान्यता में वे ऊंटों के देवता के रूप में भी पूजित हैं।



उनकी वीरगाथा पाबूजी की पड़ राजस्थान की समृद्ध लोककला और मौखिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। कोलू स्थित पाबूजी धाम में प्रतिवर्ष चैत्र अमावस्या पर विशाल मेला आयोजित होता है। इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।



शेखावत ने बताया कि इस ऐतिहासिक और आध्यात्मिक धरोहर के विकास के लिए 1.93 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं। इस राशि से श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आवश्यक सुविधाओं का विकास किया जाएगा। इससे पाबूजी महाराज से जुड़ी लोकआस्था, लोककला और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के साथ-साथ क्षेत्र में धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को भी प्रोत्साहन मिलेगा।



तीनों को मिलेगा नया आयाम



केंद्रीय मंत्री शेखावत ने कहा कि राजस्थान की पहचान केवल उसके ऐतिहासिक किलों और महलों से नहीं है। यहां की लोकआस्था, लोकदेवताओं, मंदिरों, मेलों और सदियों पुरानी सांस्कृतिक परंपराओं से भी है।



रामदेवरा, मां देगराय, मेहोजी मांगलिया और पाबूजी जैसे आस्था केंद्र राजस्थान की जीवंत सांस्कृतिक विरासत के महत्वपूर्ण प्रतीक हैं। इन स्थलों पर होने वाले विकास कार्यों से श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं का विस्तार होगा। साथ ही देश-दुनिया से आने वाले पर्यटकों के लिए इन स्थलों को बेहतर ढंग से विकसित और प्रस्तुत किया जा सकेगा।



धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन के विकास से स्थानीय स्तर पर रोजगार तथा आर्थिक गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिलने की संभावना है। शेखावत ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि राजस्थान की समृद्ध लोकआस्था, सांस्कृतिक परंपराओं और ऐतिहासिक विरासत का संरक्षण करते हुए आधुनिक सुविधाओं का विकास किया जाए।



उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य केवल भवन और सुविधाएं विकसित करना नहीं है। बल्कि इन आस्था केंद्रों की आत्मा और उनकी गौरवशाली परंपरा को संरक्षित रखते हुए आने वाली पीढ़ियों तक उनकी गरिमा और विरासत को पहुंचाना है।



क्यों अहम है यह स्वीकृति?



यह स्वीकृति राजस्थान के धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन के लिए बड़ी उपलब्धि है। इससे चारों स्थलों पर बुनियादी सुविधाओं का विकास होगा। श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव मिलेगा।



साथ ही इन स्थलों से जुड़ी लोकपरंपराओं और विरासत को संरक्षण मिलेगा। स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बनेंगे। धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने से क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को भी फायदा होगा।

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