राजस्थान की 30 कृषि मंडियों में 57.41 करोड़ के विकास कार्यों की मंजूरी, किसानों के लिए बेहतर सुविधाएं
समझें क्या है पूरा मामला
- राजस्थान की 30 कृषि मंडियों में 57.41 करोड़ रुपए के नए काम मंजूर हुए हैं।
- इनमें मंडी यार्ड, बिजली व्यवस्था और सड़क से जुड़े काम शामिल हैं।
- दिसंबर 2025 तक मंडी यार्ड, सड़क निर्माण और अन्य विभागीय कार्यों पर 513.65 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके थे।
- अब नई मंजूरी के बाद अलग-अलग मंडियों में जरूरत के मुताबिक विकास कार्य कराए जाएंगे।
- सबसे अहम सवाल अब यह है कि मंजूर राशि से काम कब शुरू होते हैं और किसानों को इसका फायदा कब मिलता है।
जयपुर। राजस्थान की कृषि मंडियों में बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए एक और बड़ा विकास पैकेज मंजूर किया गया है। प्रदेश की 30 कृषि उपज मंडी समितियों में 57 करोड़ 41 लाख रुपए के नए काम कराए जाएंगे। इनमें मंडी यार्ड का विकास, बिजली से जुड़े काम, संपर्क सड़कों का निर्माण और खराब सड़कों की मरम्मत शामिल है।
इन कामों को मंजूरी मिलने के बाद अब अलग-अलग मंडियों में स्थानीय जरूरत के हिसाब से इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर किया जाएगा। इसका सीधा संबंध किसानों के लिए मंडी तक फसल पहुंचाने और वहां उपज बेचने की सुविधाओं से है।
30 मंडियों में होंगे विकास कार्य
नई मंजूरी में प्रदेश के अलग-अलग जिलों की 30 कृषि मंडियां शामिल हैं। बीकानेर जिले में बज्जू, नोखा, खाजूवाला और श्रीडूंगरगढ़ में काम प्रस्तावित हैं। इसके अलावा पलसाना, जैसलमेर, प्रतापगढ़, मंडावरी, महवा, बारां, नाहरगढ़, समरानियां, उनियारा, निवाई, सादुलपुर, बिजयनगर, रिडमलसर, कपासन, डीडवाना, भीनमाल, मदनगंज-किशनगढ़, डेगाना, कामां, नागौर, अनाज मंडी उदयपुर, सीकर, चौमहला, अनाज मंडी कोटा, घड़साना और संगरिया को भी इसमें शामिल किया गया है। इन मंडियों में स्थानीय जरूरत के अनुसार अलग-अलग काम कराए जाएंगे।
मंडी यार्ड से लेकर बिजली तक सुधार
कृषि मंडी में सिर्फ उपज रखने के लिए जगह होना पर्याप्त नहीं है। किसानों और व्यापारियों के लिए बेहतर यार्ड, बिजली, सड़क और दूसरी बुनियादी सुविधाएं भी जरूरी होती हैं।
नई मंजूरी में मंडी यार्ड से जुड़े कामों के साथ बिजली व्यवस्था को बेहतर करने पर भी जोर दिया गया है। इससे मंडी परिसर में कामकाज के दौरान जरूरी सुविधाएं बेहतर होने की उम्मीद है।
असली फोकस सड़कों पर
किसानों के लिए मंडी तक पहुंचने वाली सड़क सबसे महत्वपूर्ण सुविधाओं में से एक है। गांव से मंडी तक सड़क खराब होने पर ट्रैक्टर-ट्रॉली से फसल लाने में ज्यादा समय और खर्च लग सकता है। फसल की आवक के दौरान खराब सड़कें किसानों और व्यापारियों की परेशानी भी बढ़ा सकती हैं। इसी वजह से नए पैकेज में नई संपर्क सड़कों के निर्माण और खराब सड़कों की मरम्मत को भी शामिल किया गया है। सरकार का मानना है कि बेहतर संपर्क मार्ग होने से आसपास के गांवों से मंडियों तक कृषि उपज पहुंचाना आसान हो सकता है।
513 करोड़ खर्च के बाद फिर 57 करोड़ क्यों?
इस पूरी कहानी का सबसे अहम सवाल यही है। राजस्थान Economic Review 2025-26 के मुताबिक दिसंबर 2025 तक मंडी यार्ड, सड़क निर्माण और अन्य विभागीय जमा कार्यों पर 513.65 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके थे। इसी अवधि तक मंडी क्षेत्रों में 47.38 किलोमीटर सड़क का निर्माण भी हुआ था।
इसके बावजूद अब 30 मंडियों में 57.41 करोड़ रुपए के नए काम मंजूर किए गए हैं।
हालांकि, 513.65 करोड़ रुपए का आंकड़ा कई तरह के मंडी विकास और अन्य विभागीय जमा कार्यों का संयुक्त आंकड़ा है। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि पहले खर्च हुई पूरी राशि इन्हीं 30 मंडियों पर खर्च हुई थी। लेकिन यह आंकड़ा यह सवाल जरूर उठाता है कि मंडीवार पहले कितना पैसा खर्च हुआ, कौन-कौन से काम पूरे हुए और उनकी वर्तमान स्थिति क्या है।
अब काम की गुणवत्ता और समय पर नजर
नई मंजूरी के बाद सबसे महत्वपूर्ण चरण काम को जमीन पर उतारना है। अगर मंजूर राशि से सड़कें समय पर बनती हैं, खराब हिस्सों की मरम्मत होती है और मंडी यार्ड की सुविधाएं बढ़ती हैं तो इसका फायदा किसानों को फसल मंडी तक पहुंचाने और बिक्री के दौरान मिल सकता है।
बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर से मंडियों में कृषि उपज की आवक बढ़ने की उम्मीद भी जताई जा रही है। इसके साथ मंडी कारोबार और राजस्व में बढ़ोतरी की संभावना भी बताई जा रही है।
अब सामने आएगा असली हिसाब
57.41 करोड़ रुपए की मंजूरी के बाद अब निगाह इस बात पर रहेगी कि किस मंडी को कितनी राशि मिली, कौन सा काम मंजूर हुआ, काम कब शुरू हुआ और उसे पूरा करने की समय सीमा क्या है। यही आंकड़े बताएंगे कि नई मंजूरी का असर किसानों को मंडी के रास्ते, यार्ड और दूसरी सुविधाओं में कितना दिखाई देता है।
यह खबर क्यों जरूरी है:
कृषि मंडियां किसानों के लिए फसल बेचने का प्रमुख केंद्र हैं। मंडी तक अच्छी सड़क, पर्याप्त यार्ड और बेहतर बिजली व्यवस्था होने से कृषि उपज की आवाजाही और कारोबार आसान हो सकता है। ऐसे में 30 मंडियों में 57.41 करोड़ रुपए के नए कामों की मंजूरी के बाद अब इनके समय पर और गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा होने पर नजर रहेगी।