राजस्थानी वीर को 54 साल बाद मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान , बांग्लादेश सरकार ने दिया विशेष सम्मान
News In Short
- राजस्थानी वीर को 54 साल बाद मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान।
- धर्मपाल डूडी 1971 के भारत-पाक युद्ध में हो गए शहीद।
- बांग्लादेश सरकार ने उन्हें विशेष सम्मान से नवाजा।
- डूडी को सम्मान देने आए 65 मीडियम रेजिमेंट के अधिकारी।
- आर्टलरी यूनिट ने एक बैट्री का नाम 'शहीद धर्मपाल बैट्री' रखा।
News In Detail
Jhunjhunu: राजस्थान की मिट्टी में जब वीरता और शहादत की बात आती है तो शेखावाटी का नाम सबसे ऊपर आता है। 1971 के युद्ध में अपनी मातृभूमि के लिए 22 साल की उम्र में प्राण न्यौछावर करने वाले शहीद धर्मपाल डूडी को 54 साल बाद अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली है। बांग्लादेश सरकार ने उनके सर्वोच्च बलिदान को नमन करते हुए विशेष प्रशस्ति पत्र और राष्ट्रीय प्रतीक चिह्न से नवाजा है।
तिरंगे में लिपटी यादें
सेना की 65 मीडियम रेजिमेंट के अधिकारी गुरुवार को जब शहीद के पैतृक गांव धींधवा पहुंचे तो पूरे गांव की आंखें नम थीं, लेकिन सीना गर्व से चौड़ा था। लेफ्टिनेंट विक्रांत और उनकी टीम ने शहीद स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर सलामी दी। 54 साल के लंबे इंतजार के बाद जब यह सम्मान घर पहुंचा तो पूरा इलाका शहीद धर्मपाल अमर रहे के नारों से गूंज उठा।
खत पहुंचने में हुई देरी
यह सम्मान पत्र बांग्लादेश की तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना और राष्ट्रपति मोहम्मद अब्दुल हमीद के हस्ताक्षरों के साथ 27 नवंबर 2018 को ही जारी हो गया था। प्रशासनिक कारणों से इसे घर तक पहुंचने में समय लगा। लेकिन, जब पहुंचा तो शहीद की शहादत की यादें फिर से ताजा हो गईं।
अखोरा की वो भीषण जंग
4 दिसंबर 1971 की वो तारीख। अखोरा के मैदान में पाकिस्तानी सेना भारतीय जांबाजों के आगे घुटने टेक रही थी। शहीद के भतीजे सुनील कुमार डूडी ने बताया कि उस रोज धर्मपाल डूडी और उनकी टीम पाकिस्तान की सेना पर कहर बनकर टूट रही थी। उसे दौरान पाकिस्तानी गोले की चपेट में आने से धर्मपाल गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
शरीर से खून की धारा बह रही थी, असहनीय दर्द था, लेकिन इस वीर ने न तो अपना रेडियो सेट छोड़ा और न ही गन। वे मरते दम तक पाकिस्तानी ठिकानों की सटीक लोकेशन देकर बमबारी करवाते रहे और अंततः वीरगति को प्राप्त हुए।
अद्वितीय सम्मान 'धर्मपाल बैट्री'
लेफ्टिनेंट विक्रांत ने जानकारी दी कि 65 मीडियम रेजिमेंट की आर्टलरी यूनिट ने अपनी एक बैट्री का नाम 'शहीद धर्मपाल बैट्री' रखकर उन्हें अमर कर दिया है। भारत सरकार उन्हें पहले ही 'पूर्वी स्टार' से सम्मानित कर चुकी है।
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