भाजपा छोड़ चुके पूर्व मेयर ने लगाए गंभीर आरोप, पार्टी के बड़े नामों को भी लिए घेरे में
समझें क्या है पूरा मामला
- जोधपुर में CJP-ABVP कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हुई।
- गांधी शांति प्रतिष्ठान में चांटा मारने के बाद बढ़ा विवाद।
- पुलिस ने कुछ ABVP और भाजयुमो कार्यकर्ताओं को डिटेन किया।
- शास्त्री सर्किल गार्डन में CJP कार्यक्रम को नहीं मिली अनुमति।
- पुलिस ने कहा, मामले की जांच के बाद होगी कार्रवाई।
अजमेर के पूर्व मेयर धर्मेंद्र गहलोत ने भाजपा छोड़ने के बाद एक नया वीडियो जारी किया है। इसमें उन्होंने 13 पत्रावलियों के मामले में खुद को अकेला दोषी ठहराए जाने पर सवाल उठाए। गहलोत ने विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी पर भी आरोप लगाए। उन्होंने एक पुराने मामले का भी जिक्र किया और सच्चाई सामने लाने की मांग की। सभी आरोप फिलहाल गहलोत के अपने दावे हैं, इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
भाजपा छोड़ने के बाद जारी किया वीडियो
अजमेर नगर निगम में दो बार भाजपा से मेयर रह चुके धर्मेंद्र गहलोत ने हाल ही में भाजपा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद रविवार को उन्होंने करीब 6 मिनट 16 सेकेंड का एक वीडियो जारी किया।
वीडियो में गहलोत ने 13 पत्रावलियों के मामले में अफसरों पर कोई कार्रवाई न होने और सिर्फ खुद को दोषी ठहराए जाने को अनुचित बताया। उन्होंने वासुदेव देवनानी से जुड़े एक पुराने मामले का भी जिक्र किया और कुछ शिकायत व फोटो पोस्ट कीं।
गहलोत का दावा- सच्चाई लाएंगे सामने
गहलोत ने कहा कि एक जनप्रतिनिधि होने के नाते वे जनता के सामने सच्चाई लाना चाहते हैं। उनके मुताबिक जब उन्हें दोषी पाए जाने का आरोप सामने आया, तो पार्टी पर आंच न आए इसलिए उन्होंने खुद ही भाजपा से इस्तीफा दिया।
गहलोत का कहना है कि जब तक वे इस आरोप से पूरी तरह मुक्त नहीं हो जाते, तब तक भाजपा में शामिल नहीं होंगे। यह पूरा बयान गहलोत का अपना पक्ष है।
अकेले दोषी ठहराना गलत- गहलोत का तर्क
गहलोत के मुताबिक भवन स्वीकृति से जुड़ी पत्रावलियां महापौर स्तर पर स्वीकृति के लिए नहीं आतीं और न ही उन पर उनके हस्ताक्षर होते हैं। उनका कहना है कि जब कमिश्नर और उपायुक्त के बीच विवाद हुआ और कमिश्नर ने 13 व्यापारियों की पत्रावलियां निरस्त कीं, तब उन्होंने जनप्रतिनिधि के तौर पर जनता के पक्ष में आवाज उठाई थी।
गहलोत के अनुसार यह मामला सरकार द्वारा गठित एम्पावर्ड कमेटी के सामने गया। इस कमेटी में कमिश्नर स्तर के अधिकारी, एक्सईएन, तकनीकी और विधि अधिकारी शामिल थे। उनका दावा है कि कमेटी ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया था, इसलिए सिर्फ उन्हें अकेले दोषी ठहराना अनुचित है।
साधारण सभा और 7 साल से लंबित फाइलें
गहलोत के मुताबिक सरकार ने इन फाइलों को अपने पास रखने के बाद कमिश्नर को साधारण सभा यानी बोर्ड में रखने के निर्देश दिए थे। उनका दावा है कि उस बैठक में पक्ष-विपक्ष के सभी पार्षद, तत्कालीन आईएएस अधिकारी चिन्मयी गोपाल और आरएएस अधिकारी मौजूद थे और सर्वसम्मति से निर्णय हुआ था।
गहलोत का यह भी दावा है कि आज इस मुद्दे को उठाने वाले कुछ लोग, जैसे चंद्रेश सांखला, उस समय भी बैठक में मौजूद थे और उपस्थिति रजिस्टर पर हस्ताक्षर किए थे। गहलोत के मुताबिक उस वक्त उन्होंने कोई विरोध नहीं जताया था। यह दावा भी अभी असत्यापित है और संबंधित व्यक्ति का पक्ष उपलब्ध नहीं है।
गहलोत के अनुसार कमिश्नर के नोट ऑफ डिसेंट के बाद सरकार ने 26 अप्रैल 2019 को फिर इसे साधारण सभा में रखने के निर्देश दिए थे। उनका कहना है कि 7 साल बीतने के बावजूद वे फाइलें अब तक साधारण सभा में नहीं रखी गईं और नगर निगम में अनिर्णित पड़ी हैं।
देवनानी पर दबाव की राजनीति का आरोप
गहलोत ने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ पूरी कार्रवाई दबाव की राजनीति के तहत हो रही है। उन्होंने इसका सीधा आरोप विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी पर लगाया। यह एक गंभीर आरोप है, जिसकी अभी कोई स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और देवनानी की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
गहलोत ने भाजपा नेता महेंद्र जादम और भाजपा जिलाध्यक्ष रमेश सोनी का नाम लेते हुए कहा कि इन फाइलों की जानकारी उन्हें भी है। उन्होंने दोनों नेताओं से भी सच्चाई जनता के सामने लाने की अपील की।
पुराने मामले का भी किया जिक्र
गहलोत ने वासुदेव देवनानी के 2013 से 2018 तक शिक्षा मंत्री रहने के कार्यकाल का जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कोटपूतली में तैनात एक विभागीय कर्मचारी दिनेश शर्मा ने विभागीय दबाव से जुड़े मामलों के बीच कार्यालय में आत्महत्या कर ली थी। यह गंभीर आरोप पूरी तरह असत्यापित है और इसकी किसी आधिकारिक जांच रिपोर्ट से पुष्टि नहीं हुई है।
गहलोत के मुताबिक उस कर्मचारी की दो बेटियों ने प्रधानमंत्री कार्यालय तक शिकायत की थी। उनका दावा है कि प्रभाव के इस्तेमाल से उस जांच को दबा दिया गया। यह भी गहलोत का निजी आरोप है, इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। गहलोत ने मांग की कि इस पुराने मामले की भी सच्चाई सामने लाई जानी चाहिए।
अब आगे क्या
फिलहाल यह पूरा मामला आरोप-प्रत्यारोप के स्तर पर ही है। न तो देवनानी की ओर से और न ही अन्य नामित लोगों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है। मामले की सच्चाई जानने के लिए दोनों पक्षों की प्रतिक्रिया और आधिकारिक जांच जरूरी होगी।
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