दिवाली के पटाखे ने छीनी 13 साल के बच्चे की अंगुली, 21 दिन बाद होगी सर्जरी; पेट से चिपकाया हाथ
बम जलाते समय हुआ दर्दनाक हादसा
हिंडौन के 13 वर्षीय पंकज (बदला हुआ नाम) दिवाली पर पटाखे जला रहा था। इसी दौरान वह बम जलाकर फेंकने की कोशिश कर रहा था। पटाखा जलने लगा, लेकिन इसी बीच उसकी दाईं हाथ की तर्जनी अंगुली पटाखे में ही रह गई।
कुछ ही पल में तेज धमाका हुआ और बच्चे की अंगुली उड़ गई। हादसे के बाद परिवार में अफरा-तफरी मच गई। परिजन तुरंत उसे हिंडौन के राजकीय चिकित्सा अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां शुरुआती इलाज के बाद डॉक्टरों ने उसकी गंभीर हालत को देखते हुए जयपुर रेफर कर दिया।
जयपुर में हाथ को पेट से चिपकाया
जयपुर पहुंचने के बाद बच्चे का इलाज शुरू हुआ। उसकी अंगुली में रॉड डाली गई। इसके बाद उसे एसएमएस अस्पताल भेजा गया। यहां डॉक्टरों ने उसके हाथ को पट्टियों की मदद से पेट से चिपका दिया।
परिवार के लिए यह स्थिति बेहद मुश्किल भरी है। जिस बच्चे की उम्र पढ़ने-लिखने और खेलने की है, वह अभी बिस्तर पर है। हाथ में चोट के कारण उसकी पढ़ाई भी प्रभावित हुई है। पेंसिल पकड़ने वाली अंगुली खोने से उसकी रोजमर्रा की जिंदगी पर भी असर पड़ा है।
21 दिन बाद मिली सर्जरी की तारीख
बच्चे को एसएमएस अस्पताल में सर्जरी के लिए 21 दिन बाद की तारीख मिली है। फिलहाल वह दर्द से परेशान है और बिस्तर पर रहने को मजबूर है। परिवार को उम्मीद है कि सर्जरी के बाद उसकी स्थिति में सुधार होगा। हालांकि, इस हादसे ने बच्चे के भविष्य और पढ़ाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है। जिस उम्र में बच्चे त्योहारों की खुशियां मनाते हैं, उस उम्र में पंकज को अस्पताल और इलाज के लंबे दौर से गुजरना पड़ रहा है।
पटाखों से बच्चों को अकेले न खेलने दें: डॉक्टर
एसएमएस मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के प्लास्टिक सर्जरी विभाग के एचओडी डॉ. आरके जैन ने अभिभावकों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। डॉक्टर के मुताबिक, बच्चों को कभी भी अकेले पटाखे नहीं जलाने देना चाहिए। पटाखों के साथ ज्वलनशील वस्तुओं से भी दूरी बनाए रखना जरूरी है। पोटाश गन जैसी चीजें बच्चों को बिल्कुल नहीं देनी चाहिए।
अगर पटाखे से गंभीर चोट लग जाए तो घरेलू उपायों में समय बर्बाद करने के बजाय तुरंत अस्पताल पहुंचना चाहिए। समय पर इलाज मिलने से चोट की गंभीरता को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
त्योहार की खुशी में एक छोटी लापरवाही पड़ सकती है भारी
दिवाली पर पटाखे जलाना कई परिवारों की परंपरा का हिस्सा है। बच्चे भी इस मौके पर आतिशबाजी को लेकर उत्साहित रहते हैं। लेकिन पटाखों को हल्के में लेना खतरनाक साबित हो सकता है।
खासकर बम और तेज धमाके वाले पटाखों में जरा सी चूक गंभीर चोट का कारण बन सकती है। बच्चों को पटाखे जलाते समय अकेला छोड़ना जोखिम बढ़ाता है। अभिभावकों की जिम्मेदारी है कि वे बच्चों पर लगातार नजर रखें और सुरक्षित तरीके से त्योहार मनाने के लिए प्रेरित करें।
पंकज का हादसा भी इसी बात की याद दिलाता है कि कुछ सेकंड की असावधानी बच्चे की पढ़ाई, खेल और सामान्य जिंदगी को लंबे समय तक प्रभावित कर सकती है।
आगे क्या?
फिलहाल पंकज सर्जरी का इंतजार कर रहा है। 21 दिन बाद होने वाली सर्जरी उसके इलाज का अगला अहम चरण होगी। परिवार को उम्मीद है कि डॉक्टरों के प्रयास से उसकी स्थिति में सुधार आएगा। इस बीच अभिभावकों के लिए जरूरी है कि वे बच्चों को अकेले पटाखे न जलाने दें और किसी भी गंभीर चोट की स्थिति में तुरंत अस्पताल पहुंचाएं।