Rajasthan Festival Season: 8 नवंबर को दिवाली, महीने की शुरुआत में वेतन-बोनस मिलने से बाजार में तेजी की उम्मीद

Jageshwar Prasad | Oct 26, 2026, 10:03 IST
पिछले साल 38 से 40 हजार करोड़ का कारोबार हुआ था। इस बार 50 हजार करोड़ तक पहुंचने की उम्मीद।
तीन साल बाद दीपावली का त्योहार महीने की शुरुआत में आने से प्रदेश के बाजारों में भारी उछाल की उम्मीद है। इस बार फेस्टिव सीजन का कारोबार 47,500 से 50,000 करोड़ रुपए तक पहुंचने का अनुमान है। पिछले साल यह आंकड़ा 38 से 40 हजार करोड़ रुपए के आसपास था, यानी इस बार 25% तक बढ़ोतरी संभव है।

8 नवंबर को दिवाली होने की वजह से कर्मचारियों को वेतन और बोनस एक साथ मिला है, जिससे उनके पास खर्च करने के लिए अधिक नगदी उपलब्ध है। अर्थशास्त्र में इस स्थिति को फ्रंट-लोडेड लिक्विडिटी कहा जाता है। इसके अलावा टैक्स दरों में हुई कटौती से भी ऑटो और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में खरीदारी को प्रोत्साहन मिल रहा है।



वेतन और बोनस से बाजार में बढ़ी नगदी

बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, जब दीपावली महीने के अंत में आती है, तो मध्यमवर्गीय परिवारों का बजट नियमित घरेलू खर्चों में निकल जाता है। ऐसे में दिवाली कारोबार (Diwali Business) प्रभावित होता है।



लेकिन इस बार महीने की शुरुआत में ही वेतन के साथ त्योहार बोनस की रकम हाथ में आने से लोगों का खरीदारी का बजट बढ़ गया है। इससे ऑटोमोबाइल, ज्वेलरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, रेडीमेड कपड़े और घरेलू सामानों की मांग में तेजी आई है।




टैक्स कटौती का मिलेगा सीधा फायदा

त्योहारों से ठीक पहले लागू हुई जीएसटी (GST – Goods and Services Tax) दरों में कटौती का लाभ भी इस बार ग्राहकों को मिल रहा है। छोटी कारों, 350 सीसी तक की मोटरसाइकिलों, एयर कंडीशनर (AC) और टीवी जैसे कंज्यूमर ड्यूरेबल्स पर टैक्स दर 28% से घटाकर 18% की गई थी।



इस टैक्स राहत की वजह से बड़ी खरीदारी करने वाले ग्राहकों को सीधी बचत हो रही है। यही कारण है कि धनतेरस और दिवाली पर गाड़ियों तथा घरेलू उपकरणों की अग्रिम बुकिंग में भारी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है।




महीने की शुरुआत में 3.5 गुना तक बढ़ती है बिक्री

बीते वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि जब भी दिवाली महीने की शुरुआत में होती है, तो प्रदेश के जीएसटी कलेक्शन में 19.6% तक का उछाल आता है। इसके विपरीत महीने के अंत में दिवाली होने पर यह ग्रोथ महज 5 से 7% तक सीमित रह जाती है।



उदाहरण के तौर पर नवंबर 2023 में जीएसटी कलेक्शन 4,682 करोड़ रुपए रहा था, जो सामान्य महीनों के औसत से 19.6% अधिक था। देश में बिकने वाली 82.5% वस्तुओं पर टैक्स लागू है, जिससे औसतन 11.5% जीएसटी प्राप्त होता है।




कैट का सेक्टरवार अनुमान: किराना और ज्वेलरी आगे

कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT – Confederation of All India Traders) के आंकड़ों के अनुसार, फेस्टिव कारोबार में सबसे बड़ी 12% हिस्सेदारी किराना और एफएमसीजी (FMCG – Fast-Moving Consumer Goods) सेक्टर की रहेगी।



इसके बाद 10% हिस्सेदारी के साथ ज्वेलरी सेक्टर दूसरे नंबर पर है। इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिकल उत्पादों का योगदान 8% रहने का अनुमान है।



क्रमांकश्रेणी / वस्तुएंहिस्सेदारी (%)
1किराना एवं एफएमसीजी12%
2ज्वेलरी और सोना-चांदी10%
3इलेक्ट्रॉनिक्स एवं इलेक्ट्रिकल8%
4कंज्यूमर ड्यूरेबल्स7%
5रेडीमेड कपड़े7%
6गिफ्ट आइटम7%
7पूजा सामग्री, फल और ड्राई फ्रूट6%
8होम डेकोर5%
9फर्नीचर5%
10मिठाई5%
11टेक्सटाइल4%
12जूते-चप्पल2%
13अन्य वस्तुएं19%
कुलयोग100%

ऑनलाइन डिस्काउंट पर भारी पड़ रही ऑफलाइन खरीदारी

ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर चल रही छूट के बावजूद ग्राहक दुकानों पर जाकर सामान जांचकर खरीदने को प्राथमिकता दे रहे हैं। तत्काल डिलीवरी की सुविधा के कारण स्थानीय बाजारों में चहल-पहल बढ़ी है।



व्यापारियों को उम्मीद है कि धनतेरस से लेकर दिवाली तक ऑटोमोबाइल, ज्वेलरी और होम अप्लायंसेज में 25% तक की सीधी बिक्री वृद्धि दर्ज की जाएगी।

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