डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन विवि में बड़ी कार्रवाई: छात्राओं के प्रदर्शन के बाद लेक्चरर अजीत चारण बर्खास्त
नेरश रमेश @ जोधपुर
डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन आयुर्वेद विश्वविद्यालय में छात्राओं के उत्पीड़न के मामले में सख्त कदम उठाया गया है। विश्वविद्यालय के योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा कॉलेज की छात्राओं ने इसके खिलाफ प्रदर्शन किया था। इसके बाद कुलपति प्रोफेसर गोविंद शुक्ल सहाय ने आरोपी व्याख्याता डॉ. अजीत चारण को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया। इस कार्रवाई की पूरे परिसर में चर्चा है।
आयुर्वेद विश्वविद्यालय का क्या है पूरा मामला
व्याख्याता डॉ. अजीत चारण पर लंबे समय से गंभीर आरोप लग रहे थे। छात्राओं का आरोप है कि वे उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित करते थे। परीक्षा में फेल करवाने की धमकियां भी दी जाती थीं।
छात्राओं के मुताबिक आरोपी शिक्षक अपनी पहुंच का रौब दिखाकर उन्हें परेशान करता था। भविष्य बर्बाद करने की धमकी भी दी जाती थी। परेशान होकर छात्राओं ने आखिरकार खुलकर विरोध किया और न्याय की मांग की।
छात्राओं का प्रदर्शन, मौके पर पहुंचे कुलपति
छात्राओं के प्रदर्शन की सूचना मिलते ही कुलपति प्रोफेसर गोविंद शुक्ल सहाय ने मामले को गंभीरता से लिया। वे बिना देरी किए कॉलेज पहुंचे। वहां उन्होंने सीधे छात्र-छात्राओं से बात की। छात्राओं ने उन्हें अपनी पूरी आपबीती बताई।
15-20 छात्राओं की लिखित शिकायत
प्रदर्शन के दौरान करीब 15 से 20 छात्राओं ने एकजुट होकर लिखित शिकायत दी। इन शिकायतों में आरोपी व्याख्याता के व्यवहार का पूरा ब्योरा दर्ज था। एक या दो नहीं, बल्कि 15 से 20 छात्राओं का एक साथ सामने आना मामले की गंभीरता दिखाता है।
अभिभावक जैसी जिम्मेदारी
कुलपति गोविंद शुक्ल सहाय ने इस मौके पर अभिभावक की तरह बात की। उन्होंने कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों से बेटियां यहां पढ़ने आती हैं। उनके अभिभावक सबसे ज्यादा उनकी सुरक्षा को लेकर चिंतित रहते हैं। कुलपति के मुताबिक विद्यार्थियों की देखभाल और उनके हितों की रक्षा हर शिक्षक का पहला नैतिक कर्तव्य है।
हाई पावर कमेटी जांच
छात्राओं के प्रदर्शन के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन तुरंत हरकत में आया। आरोपी व्याख्याता की सेवाएं समाप्त कर दी गईं। इसके साथ ही पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक हाई पावर कमेटी बनाई गई है।
डीन और दो प्राचार्य करेंगे जांच
कमेटी में आयुर्वेद संकाय के डीन और दो वरिष्ठ प्राचार्य शामिल हैं। इन्हें दो दिन के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं। यह हाई पावर कमेटी जांच ही आगे की कार्रवाई की दिशा तय करेगी।
पंजीकरण रद्द करने की मांग
विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस आचरण को चिकित्सा पेशे के लिए गंभीर माना है। प्रशासन ने राज्य सरकार को पत्र लिखा है। इसमें मांग की गई है कि आरोपी का चिकित्सक के रूप में पंजीकरण हमेशा के लिए रद्द किया जाए।
आरोपी का पक्ष अभी सामने नहीं
हालांकि इस मामले में डॉ. अजीत चारण का पक्ष अभी सामने नहीं आया है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आरोपों पर अंतिम तस्वीर साफ होगी। सवाल यह भी है कि अगर आरोप लंबे समय से थे, तो पहले कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
जीरो टॉलरेंस का संदेश
इस कार्रवाई से साफ है कि विश्वविद्यालय परिसरों में उत्पीड़न पर अब जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है। Ayurveda University Rajasthan में हुई इस कार्रवाई को दूसरे संस्थानों के लिए भी एक संदेश माना जा रहा है। lecturer terminated होने की यह खबर छात्राओं की हिम्मत की भी कहानी है।
अगर आप या आपके परिचित किसी कॉलेज में ऐसी परेशानी झेल रहे हैं, तो चुप न रहें। संस्थान की शिकायत समिति या प्रशासन तक लिखित शिकायत पहुंचाना पहला कदम है। क्या दूसरे संस्थान भी इतनी तेजी से कार्रवाई करेंगे?