वेब सीरीज ‘फर्जी’ देखकर छापने लगे नकली नोट, डूंगरपुर पुलिस ने 4 राज्यों में दबिश देकर 6 आरोपियों को पकड़ा

Jyoti Mahender Bhardwaj | Oct 24, 2026, 10:19 IST
डूंगरपुर में नकली नोट बनाने वाले गिरोह का पर्दाफाश
जाली नोटों की मिनी फैक्ट्री का खुलासा
डूंगरपुर पुलिस ने जाली नोट छापने और सप्लाई करने वाले गिरोह के छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, गिरोह ने किराए के मकान में मिनी फैक्ट्री बनाकर नकली नोट तैयार किए और पहली खेप में करीब 5 लाख रुपए के जाली नोट सप्लाई किए। मामले की जांच के दौरान पुलिस ने चार राज्यों में छापेमारी की और मास्टरमाइंड रवि मिश्रा को लुधियाना रेलवे स्टेशन से पकड़ा।

वेब सीरीज देखकर जाली नोट छापने का आइडिया आया और फिर इंटरनेट से जानकारी जुटाकर नकली नोट बनाने का नेटवर्क खड़ा कर दिया। राजस्थान के डूंगरपुर में किराए के मकान में मिनी फैक्ट्री चलाकर जाली नोट छापने वाले गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। मामले में मास्टरमाइंड समेत छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। गिरोह के सरगना को पकड़ने के लिए पुलिस ने तीन दिन में करीब 1300 किलोमीटर तक पीछा किया और उसे पंजाब के लुधियाना रेलवे स्टेशन से दबोच लिया।



डूंगरपुर में किराए के मकान में बनाई मिनी फैक्ट्री

पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने डूंगरपुर में किराए के मकान में जाली नोट छापने का काम शुरू किया था। गिरोह ने पहली खेप में करीब 5 लाख रुपए के नकली नोट सप्लाई किए। इसके बाद पुलिस को मामले की जानकारी मिली और जांच शुरू हुई। पुलिस की कार्रवाई के बाद गिरोह का सरगना मोबाइल बंद कर फरार हो गया।



एसपी मनीष कुमार ने बताया कि 29 सितंबर को सूचना मिली थी कि रामसागड़ा क्षेत्र में बड़ी मात्रा में जाली नोट सप्लाई किए जाने वाले हैं। इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच और आरोपियों की तलाश शुरू की।



25 दिन की जांच के बाद छह आरोपी गिरफ्तार

डूंगरपुर पुलिस ने करीब 25 दिन तक जांच और पीछा करने के बाद चार राज्यों में छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान गिरोह के मास्टरमाइंड रवि कुमार मिश्रा उर्फ आशीष मिश्रा को पंजाब के लुधियाना रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने उसे पकड़ने के लिए तीन दिन में करीब 1300 किलोमीटर का सफर तय किया।



इस मामले में रवि मिश्रा के अलावा आनंद राजपूत उर्फ पुष्कर उर्फ डॉ. करण, मोहम्मद आरिफ, तरुण मालेकर, भावेश खटीक और नयन जोशी को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों की भूमिका जाली नोट बनाने के लिए सामग्री जुटाने, डिजिटल फाइल उपलब्ध कराने और नकली नोटों की सप्लाई से जुड़ी थी।



वेब सीरीज देखकर आया नकली नोट छापने का आइडिया

पुलिस जांच में सामने आया कि अंबाला निवासी आनंद राजपूत ने वर्ष 2023 में वेब सीरीज ‘फर्जी’ देखी थी। इसके बाद उसने जाली नोट छापने के तरीके के बारे में इंटरनेट पर जानकारी जुटानी शुरू की। उसने चीन की अलीबाबा ई-कॉमर्स एप के जरिए नोट छापने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री मंगवाई।



इसी दौरान सोशल मीडिया के जरिए आनंद की मुलाकात रवि मिश्रा से हुई। आनंद ने नोट छापने वाला पेपर रवि के पास भेजा, लेकिन आरोप है कि रवि ने उसे असली सामग्री के बजाय कागज के टुकड़े पार्सल में भेज दिए। इसके बाद उसने आनंद को ब्लॉक कर दिया।



प्रिंटर, लैपटॉप और नोट गिनने की मशीन जब्त

पुलिस ने आरोपियों के पास से जाली नोटों के साथ प्रिंटर, नोट गिनने की मशीन, लेमिनेशन मशीन, लैपटॉप, नौ मोबाइल फोन और अन्य सामग्री जब्त की है। जांच में टेलीग्राम के जरिए नोट छापने से जुड़ी फाइल मिलने की बात भी सामने आई है।



पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि गिरोह ने अब तक किन-किन क्षेत्रों में जाली नोट सप्लाई किए और कुल कितनी रकम बाजार में पहुंचाई। रवि मिश्रा और आनंद राजपूत की भूमिका को लेकर भी आगे जांच की जा रही है।



आगे क्या?

पुलिस की जांच का अगला फोकस जाली नोटों की सप्लाई चेन और आरोपियों के संपर्कों का पता लगाना है। जब्त डिजिटल उपकरणों और दस्तावेजों की जांच से यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि नकली नोटों का नेटवर्क कितना बड़ा था और किन क्षेत्रों तक फैला हुआ था। साथ ही, पुलिस यह भी जांच रही है कि गिरोह ने अब तक कितनी रकम के जाली नोट बाजार में पहुंचाए।



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