एक 'क्लिक' ने छीनी 109 सरकारी कर्मचारियों की नौकरी, सिस्टम में दर्ज हुए सामूहिक इस्तीफे
News In Short
- 'Active' की जगह 'Resignation' चुना, 109 कर्मचारी कागजों में हुए बेरोजगार।
- क्लर्क की अंग्रेजी में कमजोरी और पोर्टल की अधूरी ट्रेनिंग पड़ी भारी।
- अप्रैल महीने का वेतन अटकने पर सरकारी सिस्टम में मची खलबली।
- सुधारात्मक कदम उठाते हुए डेटा बहाली के लिए जयपुर भेजी गई फाइल।
- दोषी कर्मचारी पर अनुशासनात्मक कार्रवाई और मॉनिटरिंग सख्त करने के निर्देश।
News In Detail
Dungarpur: राजस्थान के डूंगरपुर जिले में एक अलग तरह का मामला सामने आया है। एक क्लर्क की छोटी सी भूल और अंग्रेजी भाषा की कम समझ ने 109 सरकारी कर्मचारियों को 'बेरोजगार' कर दिया।
दरअसल, बिछीवाड़ा पंचायत समिति में कार्यरत एक संस्थापन कर्मचारी (इस्टैब्लिशमेंट क्लर्क) की गलती के कारण इंटीग्रेटेड फायनेंसियल मैनेजमेंट सिस्टम(IFMS) पोर्टल पर एक साथ 109 कर्मचारियों के ऑनलाइन इस्तीफे दर्ज हो गए। इस तकनीकी और प्रशासनिक चूक के कारण न केवल पोर्टल पर इन कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त हो गईं, बल्कि उनका वेतन भी अटक गया है।
कैसे हुई यह बड़ी लापरवाही?
जानकारी के अनुसार बिछीवाड़ा पंचायत समिति में इन दिनों IFMS (Integrated Financial Management System) पोर्टल पर कर्मचारियों के डेटा को अपडेट करने का काम चल रहा था। इसी प्रक्रिया के दौरान संस्थापन कर्मचारी को कर्मचारियों का स्टेटस अपडेट करना था। कर्मचारी की अंग्रेजी में पकड़ कमजोर होने और पोर्टल के समुचित प्रशिक्षण के अभाव में उसने एक गंभीर गलती कर दी।
डाटा फीडिंग के समय कर्मचारी ने 'इम्प्लॉई स्टेटस' के कॉलम में सही विकल्प चुनने के बजाय गलती से 'Resignation' (त्यागपत्र) का विकल्प चुन लिया। सिस्टम ने इस कमांड को वास्तविक मानते हुए एक साथ सभी 109 कर्मचारियों के इस्तीफे स्वीकार कर लिए। इसके परिणामस्वरूप, पोर्टल पर उन सभी की आईडी अपने आप 'डिएक्टिव' हो गई।
अप्रैल का वेतन रुका, तब हुआ खुलासा
यह मामला करीब एक सप्ताह तक दबा रहा और किसी को कानोकान खबर नहीं हुई। इस बड़ी लापरवाही का खुलासा तब हुआ जब अप्रैल महीने के वेतन निर्माण की प्रक्रिया शुरू हुई। आमतौर पर सिस्टम स्वतः वेतन बिल जेनरेट करता है, लेकिन इन 109 कर्मचारियों का डेटा 'इस्तीफा' श्रेणी में चले जाने के कारण सिस्टम ने उनका वेतन रोक दिया।
जब कर्मचारियों के खातों में सैलरी नहीं आई और जांच की गई, तो पता चला कि आधिकारिक रिकॉर्ड में वे अब सरकारी सेवा में ही नहीं हैं। इस खुलासे के बाद पंचायत समिति प्रशासन और जिला कोष कार्यालय में हड़कंप मच गया। प्रभावित कर्मचारियों में पंचायत समिति का स्टाफ, ग्राम विकास अधिकारी और हैंडपंप मिस्त्री शामिल हैं।
मॉनिटरिंग पर उठे सवाल
इस घटना ने सरकारी विभागों में डेटा हैंडलिंग और मॉनिटरिंग की प्रक्रिया पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। नियमों के मुताबिक पोर्टल पर किए जाने वाले किसी भी अपडेट की जिम्मेदारी विकास अधिकारी (BDO) की होती है। एक संस्थापन कर्मचारी ने इतनी बड़ी संख्या में इस्तीफे दर्ज कर दिए और एक सप्ताह तक उच्चाधिकारियों को इसकी भनक तक नहीं लगी, यह गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।
जांच में यह भी सामने आया है कि संबंधित कर्मचारी को पोर्टल के संचालन का पर्याप्त प्रशिक्षण नहीं दिया गया था। साथ ही, अंग्रेजी भाषा की कमजोरी के कारण वह 'Resignation' शब्द का अर्थ और उसके प्रभाव को नहीं समझ सका।
सुधार की प्रक्रिया जारी, जयपुर भेजी फाइल
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने तुरंत सुधारात्मक कदम उठाए हैं। चूंकि पोर्टल का नियंत्रण राज्य स्तर पर होता है, इसलिए डेटा को फिर से बहाल (Restore) करने के लिए मामला जयपुर मुख्यालय भेजा गया है।
जिला कोष अधिकारी मितेश जैन ने बताया कि आईएफएमएस पोर्टल पर गलत विकल्प चयनित होने के कारण यह तकनीकी समस्या आई है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि फाइल जयपुर भेजी जा चुकी है और जल्द ही कर्मचारियों की आईडी पुनः सक्रिय कर दी जाएगी।
वहीं, बिछीवाड़ा विकास अधिकारी महेशचंद्र अहारी ने कहा, संस्थापन कार्मिक की लापरवाही से यह स्थिति पैदा हुई है। हम इस मामले में जयपुर के संपर्क में हैं और जल्द ही कर्मचारियों का रुका हुआ वेतन जारी कर दिया जाएगा। साथ ही, इस लापरवाही के लिए दोषी कर्मचारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जाएगी।
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