चालान से जुड़ा मामला गंभीर: ई-चालान प्रणाली में पारदर्शिता की कमी सामने आई; पुराने चालानों की जांच की मांग उठी।
समझें क्या है पूरा मामला
- सीनियर की ID से कांस्टेबल काटते रहे चालान
- शिकायत के बाद खुली ई-चालान सिस्टम की पोल
- कांस्टेबल के पास पहुंची अफसर की ID
- अब पुराने चालानों की जांच पर सवाल
- पुलिस के आदेश ने उजागर की बड़ी खामी
जयपुर। जयपुर में ई-चालान व्यवस्था को लेकर पुलिस विभाग की निगरानी पर सवाल खड़े हुए हैं। नियमों के मुताबिक ट्रैफिक चालान जारी करने का अधिकार हेड कांस्टेबल और उससे ऊपर के अधिकृत पुलिसकर्मियों को है। इसके बावजूद कुछ मामलों में कांस्टेबलों द्वारा सीनियर अधिकारियों की यूजर आईडी से ई-चालान जारी किए जाने की बात सामने आई है।
पुलिस कमिश्नर सचिन मित्तल की ओर से जारी आदेश में इस व्यवस्था को अनधिकृत और नियम विरुद्ध बताया गया है। आदेश में साफ किया गया है कि कोई भी अधिकृत पुलिसकर्मी अपनी ई-चालान यूजर आईडी किसी दूसरे पुलिसकर्मी को नहीं दे सकता। ऐसा पाए जाने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
शिकायत के बाद सामने आया मामला
मामला 25 सितंबर की एक घटना के बाद सामने आया। सचिवालय के एक कर्मचारी ने शिकायत दी थी कि रात करीब 10 बजे एक ट्रैफिक कांस्टेबल ने उसे रोककर मोबाइल से ई-चालान जारी किया।
कर्मचारी ने कांस्टेबल के चालान बनाने के अधिकार पर सवाल उठाया। इसके बाद दोनों पक्षों में विवाद हो गया। शिकायत में पुलिसकर्मियों पर मारपीट और उंगली में चोट पहुंचाने का आरोप भी लगाया गया।
बाद में कांस्टेबल किशन सिंह को निलंबित किया गया, जबकि ड्राइवर राजेश कुमार को लाइन हाजिर किया गया। इसके बाद पुलिस कमिश्नर की ओर से ई-चालान यूजर आईडी को लेकर नया आदेश जारी किया गया।
सीनियर की ID कांस्टेबल को देना भी गलत
आदेश के अनुसार थानों और ट्रैफिक ब्रांच में हेड कांस्टेबल और उससे ऊपर के अधिकारी ई-चालान जारी करने के लिए अधिकृत हैं। इसके बावजूद कुछ अधिकृत अधिकारियों द्वारा अपनी यूजर आईडी कांस्टेबलों को उपलब्ध कराने की बात सामने आई है। इन आईडी का इस्तेमाल कर कांस्टेबलों द्वारा चालान जारी किए जा रहे थे। अब विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि यूजर आईडी व्यक्तिगत है और इसे किसी दूसरे पुलिसकर्मी के साथ साझा नहीं किया जा सकता।
अब पुराने चालानों की जांच पर सवाल
इस आदेश के बाद सबसे बड़ा सवाल पुराने ई-चालानों को लेकर है। अगर पहले से सीनियर अधिकारियों की आईडी से कांस्टेबल चालान काटते रहे हैं तो अब तक ऐसे कितने चालान जारी हुए, इसका आंकड़ा सामने नहीं आया है।
यह भी स्पष्ट नहीं है कि पुलिस विभाग पुराने ई-चालानों का ऑडिट कराएगा या नहीं। अगर ऑडिट होता है तो यह भी जांच का विषय होगा कि डिजिटल रिकॉर्ड में दर्ज अधिकारी ने खुद चालान जारी किया था या उसकी आईडी किसी दूसरे पुलिसकर्मी ने इस्तेमाल की।
वाहन चालकों के लिए भी उठे सवाल
इस व्यवस्था का असर वाहन चालकों पर भी पड़ सकता है। मौके पर अगर कांस्टेबल चालान जारी करता है, लेकिन डिजिटल रिकॉर्ड में किसी हेड कांस्टेबल या उससे ऊपर के अधिकारी की आईडी दर्ज होती है, तो कार्रवाई करने वाले वास्तविक पुलिसकर्मी की पहचान को लेकर सवाल खड़ा हो सकता है। ऐसे में ई-चालान सिस्टम में यूजर आईडी की सुरक्षा और डिजिटल रिकॉर्ड की जवाबदेही महत्वपूर्ण हो जाती है।
गलत चालान की शिकायत कैसे करें
एसीपी ट्रैफिक ईस्ट-2 मुकेश चौधरी के अनुसार, अगर किसी वाहन चालक को लगता है कि उसका ई-चालान गलत तरीके से जारी किया गया है तो वह आईटीएमएस चालान पोर्टल पर शिकायत दर्ज कर सकता है।
वाहन या नोटिस नंबर के जरिए चालान की जानकारी देखी जा सकती है। इसके बाद संबंधित व्यक्ति जरूरी जानकारी और सबूत अपलोड कर सकता है। जांच के बाद चालान गलत पाए जाने पर उसे रद्द किया जा सकता है, जबकि सही पाए जाने पर वह बरकरार रहेगा।
अब पुलिस के सामने कई सवाल
पुलिस कमिश्नर के आदेश से आगे की व्यवस्था स्पष्ट कर दी गई है, लेकिन पुराने मामलों को लेकर स्थिति अभी साफ नहीं है। अब यह पता चलना बाकी है कि कितने अधिकारियों ने अपनी यूजर आईडी दूसरे पुलिसकर्मियों को दी, कितने चालान इस तरीके से जारी हुए और क्या पुलिस पुराने रिकॉर्ड का ऑडिट करेगी।
यही जांच बताएगी कि यूजर आईडी साझा करने की समस्या कुछ मामलों तक सीमित थी या जयपुर की ई-चालान व्यवस्था में यह ज्यादा व्यापक स्तर पर चल रही थी।