पब्लिक अगेंस्ट करप्शन की ED में याचिका, शिखर अग्रवाल के 40 विला मामले में जांच की मांग

Mukesh Sharma | Nov 07, 2026, 21:21 IST
वरिष्ठ IAS शिखर अग्रवाल और IPS पत्नी प्रशाखा माथुर से जुड़ा विला खरीद मामला पहुंचा ED।
राजस्थान के वरिष्ठ IAS अधिकारी शिखर अग्रवाल, उनकी IPS पत्नी प्रशाखा माथुर और परिवार के सदस्यों से जुड़ी 40 विला-कॉटेज की खरीद के मामले की शिकायत प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी पहुंच गई है। पब्लिक अगेंस्ट करप्शन संस्था के दो एडवोकेट्स पूनमचंद भंडारी और टी.एन.शर्मा ने ED के निदेशक और जयपुर जोनल कार्यालय के संयुक्त निदेशक को शिकायत देकर मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच की मांग की है।

शिकायत में संपत्तियों की कथित कम कीमत पर खरीद, खरीद के बाद उसी कंपनी को वापस लीज पर देने और परिवार की आय के स्रोतों की जांच कराने की मांग उठाई गई है।




6.16 करोड़ रुपए में 40 संपत्तियां की खरीद संदेहजनक

शिकायत में कहा गया है कि लेन-देन की परिस्थितियां संदेह पैदा करती हैं व इनकी विस्तृत जांच जरूरी है।



गौरतलब है कि उदयपुर जिले के बूझड़ा गांव में अनंता रिसॉर्ट की 20 कॉटेज की रजिस्ट्री 3 अक्टूबर 2023 को हुई थी। वहीं, अलवर जिले के अजबगढ़ स्थित रिसॉर्ट में 20 विला की रजिस्ट्री 27 मार्च 2026 को कराई गई। इन सभी संपत्तियों को गोयल फैशन्स प्राइवेट लिमिटेड से खरीदा गया था।



शिकायत में सभी 40 संपत्तियों की घोषित खरीद कीमत करीब 6.16 करोड़ रुपए बताई गई है। आरोप है कि संपत्तियों की बिक्री और उन्हें वापस लीज पर देने के दस्तावेज एक ही दिन निष्पादित किए गए।



शिकायतकर्ताओं ने इस व्यवस्था को असामान्य बताते हुए इसके पीछे की वास्तविक कारण की जांच की जरुरत बताई है।




हर साल 1.80 करोड़ किराया असामान्य

शिकायत के अनुसार 20 कॉटेज से सालाना करीब 80 लाख रुपए और 20 विला से करीब एक करोड़ रुपए सालाना किराया मिलना बताया है। इस तरह कुल सालाना लीज किराया करीब 1.80 करोड़ रुपए बताया गया है।



शिकायतकर्ताओं का कहना है कि घोषित खरीद कीमत के मुकाबले इतना अधिक सालाना किराया असामान्य है। उन्होंने ED से यह जांचने की मांग की है कि संपत्तियों की कीमत किस आधार पर तय की गई,किराये की शर्तें कैसे बनीं और क्या इस व्यवस्था के जरिए लोकसेवक को अनुचित आर्थिक लाभ पहुंचाया गया। शिकायतकर्ता ने संपत्तियों की खरीद में घोषित रकम के अलावा नगद भुगतान करने की भी जांच की मांग की गई है।



शिकायत में शिखर अग्रवाल और प्रशाखा माथुर के साथ ही उनके दोनों बेटों व प्रशाखा माथुर के माता-पिता के नाम से खरीदे गए विला और कॉटेज की जानकारी देकर परिवार के सभी सदस्यों की आय के स्वतंत्र स्रोतों, संपत्तियों की खरीद में इस्तेमाल रकम का स्रोत पता लगाने तथा परिवार की कुल आय तथा खर्च का पता लगाने की मांग की है।




संपत्ति विवरण में खुलासे पर भी सवाल

शिकायत में अधिकारियों के अचल संपत्ति विवरण (IPR) का मुद्दा भी उठाया गया है। शिकायतकर्ताओं के मुताबिक, मीडिया रिपोर्ट में शिखर अग्रवाल की ओर से संपत्तियों की खरीद का विवरउनका कहना है कि केवल खरीद का खुलासा करना पर्याप्त नहीं है। संपत्तियों की कीमत और लीज की शर्तों की भी जांच होनी चाहिए।



शिकायत में यह भी दावा किया है कि प्रशाखा माथुर ने 8 जनवरी, 2026 को दाखिल अपने अचल संपत्ति विवरण में इन संपत्तियों का खुलासा नहीं किया है इसलिए इस संबंध में भी जांच की जाए।




गोयल फैशन्स की भूमिका की जांच की मांग

शिकायतकर्ताओं ने गोयल फैशन्स प्राइवेट लिमिटेड और उसके निदेशकों की भूमिका की जांच करने की मांग की है। इसमें कंपनी की दूसरी संपत्तियों की बिक्री कीमत, विला को वापस लीज पर लेने की जरूरत और किराये की शर्तों का आधार पता लगाने की मांग शामिल है।



जेडीसी कार्यकाल भी जांच हो

शिकायत में कहा गया है कि शिखर अग्रवाल पहले जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) के आयुक्त रह चुके हैं। इसलिए यह जांच की जाए कि उनके कार्यकाल में कंपनी या उससे जुड़े लोगों को कोई सरकारी लाभ तो नहीं मिला।



इसके अलावा जयपुर के वैशाली नगर स्थित वैशाली रिट्रीट में छह फ्लैट और मुंबई के पास करजत तथा गोवा में कथित निवेश का भी जिक्र किया गया है। शिकायतकर्ताओं ने इन संपत्तियों के स्रोत और स्वामित्व की जांच करने की मांग की है।



ACB और CBI को भी दी शिकायत

शिकायत में कहा है कि उन्होंने 28 अक्टूबर 2026 को राजस्थान के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को भी शिकायतें दी थीं।



शिकायतकर्ताओं ने ED से प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ECIR) दर्ज करने, संबंधित अधिकारियों और कंपनी के लेन-देन की जांच करने तथा जरूरत पड़ने पर संपत्तियों की तलाशी, जब्ती और अस्थायी कुर्की जैसी कानूनी कार्रवाई करने का अनुरोध किया है। उनका कहना है कि जांच पूरी होने से पहले संपत्तियों को बेचने या हस्तांतरित करने की आशंका को देखते हुए समय पर कार्रवाई जरूरी है।



एसीबी कर रही है जांच

गौरतलब है कि मामले का खुलासा होने के बाद राजस्थान सरकार ने शिखर अग्रवाल और उनकी पत्नी प्रशाखा माथुर को एपीओ कर दिया। इसके अलावा सरकार ने उनके खिलाफ जांच के लिए भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धारा-17-ए के तहत एसीबी को प्राथमिक जांच की इजाजत भी दे दी है।



एसीबी ने मामले में प्राथमिक जांच दर्ज करके जांच भी शुरु कर दी है और उदयपुर व अलवर के संबंधित अग्रवाल दंपत्ति के खरीदे विला व कॉटेज की रजिस्ट्री संबंधी रिकार्ड तलब कर लिया है।

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