अंतिम संस्कार की तैयारी के बीच लौट आईं सांसें; 70 वर्षीय वृद्धा के लिए वरदान बनी सीपीआर
News In Short
- अलवर की चमेली देवी को मृत समझकर परिजनों ने अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू कर दी थीं।
- करीब एक घंटे तक बेसुध रहने के बाद पैरों में हलचल हुई, जिसके बाद उन्हें सीपीआर दी गई।
- सीपीआर देने से सांसें लौटीं और उन्हें तत्काल दौसा जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया।
- दमा की पुरानी रोगी महिला फिलहाल डॉक्टरों की निगरानी में स्थिर है और बातचीत कर रही है।
- डॉक्टरों ने इस घटना को एक लाख में से एक होने वाला दुर्लभ मेडिकल मिरेकल करार दिया है।
News In Detail
Dausa: राजस्थान के दौसा जिला अस्पताल में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसे चिकित्सा विज्ञान दुर्लभ और परिजन ईश्वरीय चमत्कार मान रहे हैं। अलवर जिले के अजबगढ़ निवासी 70 वर्षीय चमेली देवी मीणा, जिन्हें परिजनों ने मृत समझकर जमीन पर लिटा दिया था और अंतिम विदाई की तैयारियां शुरू कर दी थीं, एक घंटे बाद अचानक जीवित हो उठीं। इस पुनर्जीवन में सीपीआर (CPR) की तकनीक ने निर्णायक भूमिका निभाई।
तड़के थमीं धड़कनें, पसरा मातम
दमा रोग से पीड़ित चमेली देवी हाल ही में जयपुर के एसएमएस अस्पताल से डिस्चार्ज होकर घर लौटी थीं। मंगलवार रात करीब 2 बजे अचानक उनकी तबीयत बिगड़ी, सीने में दर्द और सांस लेने में भारी तकलीफ हुई। बुधवार तड़के 4 बजे के करीब उनके शरीर में हलचल पूरी तरह बंद हो गई। परिजनों ने जब पल्स और धड़कन जांची, तो कुछ महसूस नहीं हुआ। बुजुर्ग महिला को मृत मानकर रीति-रिवाजों के अनुसार चारपाई से उतारकर जमीन पर लिटा दिया गया और दूर-दराज के रिश्तेदारों को शोक समाचार भेज दिया गया।
पैर में हलचल और जीवन की वापसी
सुबह करीब सवा 5 बजे, जब घर में विलाप का माहौल था, अचानक महिला के पैरों में हल्की हलचल देखी गई। मौके पर मौजूद परिवार के एक सदस्य ने सूझबूझ दिखाते हुए तत्काल सीपीआर (Cardiopulmonary Resuscitation) देना शुरू किया। कुछ ही मिनटों में चमत्कार हुआ और चमेली देवी की सांसें फिर से चलने लगीं।
दौसा जिला अस्पताल में सफल उपचार
परिजनों ने बिना समय गंवाए उन्हें 40 किलोमीटर दूर दौसा जिला अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल के पीएमओ डॉ. आर.के. मीणा और इमरजेंसी मेडिसिन के एचओडी डॉ. एम.के. मीणा की देखरेख में उन्हें तुरंत आईसीयू (ICU) में भर्ती किया गया। डॉक्टरों के अनुसार, दोपहर तक उनकी स्थिति में सुधार हुआ और वे बातचीत करने लगीं। डॉक्टरों का कहना है कि दमा के रोगियों में कभी-कभी ऐसी अचेतन अवस्था आ जाती है जहां धड़कन बहुत धीमी पड़ जाती है, लेकिन सही समय पर मिली सीपीआर ने उन्हें नई जिंदगी दे दी।
चिकित्सा विज्ञान का दुर्लभ मामला
विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसी घटनाएं एक लाख में से किसी एक रोगी के साथ होती हैं। वृद्धा के बेटे बाबूलाल मीणा ने इसे भगवान की असीम कृपा और समय पर किए गए प्रयासों का परिणाम बताया है। वर्तमान में महिला डॉक्टरों की निगरानी में है और उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है।
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