जोधपुर समेत देशभर के AIIMS में फैकल्टी की कमी, 22 हजार से अधिक पद खाली
भारत के प्रमुख मेडिकल संस्थानों में एक महत्वपूर्ण मुद्दा, जो छात्रों और शिक्षकों दोनों को प्रभावित कर रहा है, वह है शिक्षकों की भारी कमी। एम्स (AIIMS - All India Institute of Medical Sciences) जैसे शीर्ष चिकित्सा संस्थानों में भी यह समस्या तेजी से बढ़ रही है। इस समय राजस्थान (Rajasthan) के जोधपुर एम्स (AIIMS Jodhpur) समेत देशभर के 23 एम्स संस्थानों में 36 प्रतिशत फैकल्टी के पद खाली हैं, जो भारतीय मेडिकल शिक्षा प्रणाली के लिए एक गंभीर चिंता का विषय बन चुका है। यह स्थिति मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता पर असर डाल रही है और छात्रों को उच्च गुणवत्ता की शिक्षा देने में समस्या उत्पन्न कर रही है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से राज्यसभा में प्रस्तुत आंकड़ों में यह कड़वा सच सामने आया है।
एम्स में खाली फैकल्टी पदों कीस्थिति
इन 23 एम्स संस्थानों मेंप्रोफेसर (Professor), एसोसिएट प्रोफेसर (AssociateProfessor) औरअसिस्टेंट प्रोफेसर (Assistant Professor) के पदों में24% से 73% तककी कमी पाई गईहै। कुल मिलाकर,22 हजार से ज्यादाफैकल्टी और नॉन-फैकल्टी (Non-faculty) केपद खाली हैं। मेडिकलशिक्षा के लिएप्रतिष्ठित एम्स दिल्ली मेंभी केवल 65% फैकल्टी पद भरे हुएहैं, जबकि यहां462 पद अभी भीखाली हैं।
एम्स दिल्लीको छोड़ कर अन्यएम्स संस्थानों मेंस्थिति और भीगंभीर है। कहींभी 80% से अधिकफैकल्टी पद भरे नहीं गए हैं। राजस्थान केएम्स जोधपुर में46% पद खाली हैं, जहां 405 पदों में से केवल219 पद भरे गए।
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नए एम्स संस्थानों कीस्थिति और चुनौतियां
2022 मेंस्थापित एम्स मदुरै में स्थितिऔर भी चिंताजनक है, जहां 183 फैकल्टी पदों मेंसे केवल 49 भरे गए और 911 नॉन-फैकल्टी पदों में से केवल43।
2020 मेंशुरू हुए एम्स राजकोट में भी फैकल्टी की संख्यासिर्फ 42% है। कई बार एम्स मेंरिटायर्ड शिक्षकों और विजिटिंग फैकल्टी (Visiting Faculty) को बुलाकर कमीको पूरा करनेका प्रयास कियाजाता है, लेकिनफिर भी समस्याबनी हुई है।
एम्स में फैकल्टी कमीके कारण और प्रभाव
कारण
- नएएम्स संस्थानों कातेजी से विस्तार, लेकिन शिक्षकों की कमी केकारण पदों परनियुक्ति अधूरी।
- अनुभवी शिक्षकों कारिटायर होना औरप्रतिस्थापन कीकमी।
- अपर्याप्त प्रेरणा और प्रशिक्षणके कारण शिक्षकों का कम आना।
- उच्चपदों के लिए मेधावी शिक्षकों कीकमी।
प्रभाव
- मेडिकल छात्रोंको गुणवत्तापूर्ण शिक्षाकी कमी।
- शोधकार्य और क्लिनिकल प्रैक्टिस परनकारात्मक असर।
- नए मेडिकलहाई-टेक अभ्यासों और तकनीकों काप्रसार धीमा होना।
- राष्ट्रीयस्वास्थ्य सेवाके भविष्य परखतरा।
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एम्स में शिक्षकों कीकमी दूर करनेके उपाय
1. शिक्षकों कीभर्ती प्रक्रियाको तेज़ और पारदर्शी बनाना
एम्स कोचाहिए कि वे फैकल्टी भर्ती प्रक्रियामें तेजी लाएं औरअधिक पारदर्शी उपायअपनाएं।
2. अनुभवी शिक्षकों के लिए प्रोत्साहन
रिटायर टीचर्स को विजिटिंग फैकल्टी के रूप मेंनियुक्त कर अनुभवका लाभ लेना औरनए शिक्षकों कोउत्कृष्ट सुविधाएं देना।
3. शिक्षा एवंप्रशिक्षण कार्यक्रम
नए शिक्षकों कोप्रशिक्षित करनेके लिए विशेषप्रशिक्षण कार्यक्रमऔर स्कॉलरशिप चालू करें।
4. तकनीकी और मौजूदा संसाधनों काउपयोग
ऑनलाइन शिक्षण और ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म्स से शिक्षण का दायरा बढ़ाएं।
एम्स फैकल्टी कमीकी समस्या औरसमाधान का निष्कर्ष
मेडिकल शिक्षाकी गुणवत्ता बनाएरखने के लिए एम्स में फैकल्टी कीकमी को प्राथमिकता देनी होगी। सरकारऔर संस्थान दोनोंको मिलकर इस समस्याको हल करना अनिवार्य है, ताकिभारत को कुशल औरप्रशिक्षित डॉक्टरमिल सकें।
FAQ
- 1. एम्स (AIIMS) में फैकल्टी की कमी कितनी है?
एम्स के देश के 23 संस्थानों में 36% फैकल्टी पद खाली हैं, एम्स दिल्ली में 35% पद खाली होने के साथ ही अन्य नए संस्थानों में यह कमी और भी अधिक है। - 2. एम्स में फैकल्टी कमी के क्या कारण हैं?
अधिकतर कारणों में नए संस्थानों का जल्दी विस्तार, अनुभवी शिक्षकों का रिटायर होना और भर्ती प्रक्रिया में देरी शामिल हैं। - 3. एम्स में खाली पदों को भरने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं?
रिटायर्ड टीचर्स और विजिटिंग फैकल्टी को बुलाया जाता है, साथ ही भर्ती प्रक्रिया तेज करने के प्रयास जारी हैं। - 4. एम्स में फैकल्टी कमी का मेडिकल छात्रों पर क्या प्रभाव पड़ता है?
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा में कमी, शोध कार्य में बाधा और क्लिनिकल प्रशिक्षण पर नकारात्मक असर इसका प्रमुख प्रभाव है। - 5. एम्स में फैकल्टी कमी को कैसे दूर किया जा सकता है?
तेज भर्ती प्रक्रिया, प्रशिक्षित शिक्षकों के लिए प्रोत्साहन, और ऑनलाइन शिक्षण के माध्यम से कमी को दूर किया जा सकता है।
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