गोचर जमीन पर काट दिए 54 फर्जी पट्टे, मृत व्यक्ति के नाम भी जारी हुआ पट्टा

Jageshwar prasad | Jul 20, 2026, 13:03 IST
गोचर जमीन पर 54 फर्जी पट्टे, मृत व्यक्ति के नाम भी जारी, 100 करोड़ का घोटाला
राजस्थान में अलवर के देसूला गांव में गोचर भूमि पर कॉलोनी बसा दी गई। इस जमीन पर 54 फर्जी पट्टे जारी कर दिए गए। जांच में अब इस गड़बड़ी की परतें सामने आ रही हैं।

समझें क्या है पूरा मामला

  • अलवर के देसूला गांव में गोचर भूमि पर कॉलोनी बसा दी गई।
  • निवर्तमान महिला सरपंच ने गोचर भूमि पर काट दिए 54 फर्जी पट्टे।
  • 7 पट्टे पूर्व सरपंच के बेटे, पोतों और पुत्रवधू के नाम पर पाए गए।
  • अब जिला प्रशासन ने एफआईआर दर्ज कराने के दिए निर्देश।

सुनील जैन @ अलवर



Alwar: राजस्थान में अलवर के पास देसूला गांव में बेशकीमती गोचर भूमि पर कब्जा दिलाने के लिए फर्जी पट्टों का बड़ा खेल रचा गया है।



इस फर्जीवाड़े में निवर्तमान महिला सरपंच सावित्री देवी और भू-माफियाओं की मिलीभगत से 54 जाली पट्टे जारी कर दिए गए। इनकी सब-रजिस्ट्रार कार्यालय से रजिस्ट्री भी करवा ली गई।



बाजार में इस जमीन का मूल्य 5 करोड़ रुपए प्रति बीघा है। इस 20 बीघा गोचर भूमि घोटाले का कुल अनुमानित मूल्य लगभग 100 करोड़ रुपए माना जा रहा है।



​मृत व्यक्ति के नाम भी पट्टा

इस मामले की जांच के दौरान गंभीर अनियमितताएं उजागर हुई हैं। जांच रिपोर्ट के अनुसार 2002 में दिवंगत हो चुके एक व्यक्ति के नाम पर वर्ष 2025 में फर्जी पट्टा जारी कर दिया गया।


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कई दस्तावेजों में रिश्तों में भारी हेरफेर करते हुए पिता को पुत्र और पुत्र को पिता दर्शा दिया गया।


​कई पट्टों में एक समान जानकारी दर्ज पाई गई। यहां तक कि पट्टा संख्या 18 भी कई लोगों को कॉमन जारी कर दी गई।



​अप्रैल से सितंबर 2025 के बीच जारी इन विवादित 54 फर्जी पट्टों में से 7 पट्टे तत्कालीन सरपंच सावित्री देवी के परिजनों (बेटे, पोतों और पुत्रवधू) के नाम पर पाए गए हैं।



​बिना आवेदन और फीस के बैकडेट में बनीं फाइलें

जिला परिषद की जांच समिति की रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि वर्ष 2020 के बाद पंचायत रिकॉर्ड में इन पट्टों से संबंधित रिकॉर्ड मौजूद ही नहीं है।



​जब मामला तूल पकड़ने लगा तो आरोपी पूर्व सरपंच ने बयान दिया कि प्रशासक बनने के बाद उनकी मुहर चोरी हो गई थी। हालांकि, पट्टे जारी होने की समयावधि और सरपंच के परिवार के नाम पर दर्ज जमीनों ने इस दावे पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।



​शिकायतकर्ता को फंसाने की साजिश

इस पूरे घोटाले का भंडाफोड़ देसूला के पूर्व उपसरपंच बलदेव कृष्ण मल्होत्रा द्वारा मुख्यमंत्री कार्यालय में दर्ज कराई गई शिकायत के बाद हुआ।



शिकायतकर्ता मल्होत्रा ने हाल ही में जिला कलेक्टर को नया परिवाद सौंपकर आरोप लगाया कि उन पर शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा है। उन्हें झूठे केस में फंसाने की नीयत से उनके और उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर भी जबरन फर्जी पट्टे तैयार कर दिए हैं।




81 वर्षीय सरपंच सावित्री देवी ने भी लगाए गंभीर आरोप

ग्राम पंचायत की वर्तमान प्रशासक एवं सरपंच 81 वर्षीय सावित्री देवी ने पत्रकार वार्ता कर पूरे मामले में खुद को निर्दोष बताते हुए बलदेव मल्होत्रा और उसके परिवार पर गंभीर आरोप लगाए।



उन्होंने दावा किया कि उनके फर्जी हस्ताक्षर और पंचायत की मोहर का दुरुपयोग कर पट्टे जारी किए गए तथा बाद में उन्हें ही झूठे मामले में फंसाने की साजिश रची गई।



सावित्री देवी ने आरोप लगाया कि पिछले 5-6 वर्षों से बलदेव मल्होत्रा उन्हें लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहा है। उन्होंने कहा कि अखबारों में उनके खिलाफ झूठी खबरें प्रकाशित करवाई गईं, उन्हें जेल भिजवाने की धमकियां दी गईं और उनके पौते से डराकर 70 हजार रुपए भी ले लिए गए।



सरपंच सावित्री देवी ने कहा कि देसूला में जारी सभी पट्टों के हस्ताक्षरों की वैज्ञानिक और फोरेंसिक जांच कराई जाए। उनका कहना है कि जांच होते ही सामने आ जाएगा कि किन पट्टों पर असली हस्ताक्षर हैं और किन पर फर्जी।



कलेक्टर सख्त, BDO और दोषियों पर गिरेगी गाज

इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला जिला कलेक्टर आर्तिका शुक्ला ने कड़ा रुख अपनाया है। कलेक्टर ने जिला परिषद सीईओ द्वारा जांच समिति की रिपोर्ट पर कोई ठोस कानूनी कार्रवाई न होने पर नाराजगी व्यक्त की है।



उन्होंने उमरैण की विकास अधिकारी आरती से स्पष्टीकरण मांगा है कि फर्जी पट्टों को निरस्त करने और दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने में देरी क्यों हुई।



​वहीं, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सालुखे गौरव रविंद्र ने बीडीओ को तत्कालीन सरपंच और अन्य दोषियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश जारी कर दिए हैं।



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