डिप्टी सीएम बनकर फर्जी कॉल करने वाला ऑफिसर सस्पेंड, अफसरों को देता था धमकी
समझें क्या है पूरा मामला
- अजमेर के जेएलएन अस्पताल के नर्सिंग ऑफिसर पुष्पेंद्र पारीक को निलंबित कर दिया।
- उन पर डिप्टी सीएम प्रेमचंद बैरवा के नाम से फर्जी कॉल करने का आरोप है।
- आरोप है कि उन्होंने अफसरों पर ट्रांसफर और पोस्टिंग को लेकर दबाव बनाया।
- स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई करते हुए उनका मुख्यालय जैसलमेर तय किया है।
- मामले में पुलिस जांच भी जारी है।
डिप्टी सीएम प्रेमचंद बैरवा के नाम से फर्जी कॉल कर अफसरों को धमकाने के आरोपी सस्पेंड कर दिया गया है। साथ ही आरोपी पुष्पेंद्र पारीक का मुख्यालय अब जैसलमेर रहेगा।
आरोप है कि उन्होंने डिप्टी सीएम प्रेमचंद बैरवा बनकर अधिकारियों को फोन किए। मामले में आरोपी नर्सिंग ऑफिसर पुष्पेंद्र पारीक अजमेर के आदर्श नगर निवासी हैं। वे जवाहर लाल नेहरू अस्पताल में पदस्थ थे।
शिकायत के अनुसार पुष्पेंद्र पारीक ने अपने मोबाइल की कॉलर आईडी में ऐसा नाम सेट किया था, जिससे कॉल करने पर सामने वाले को डिप्टी सीएम का नाम दिखाई देता था। आरोप है कि इसी तरीके से उन्होंने चिकित्सा विभाग के अधिकारियों से संपर्क किया।
अफसरों को फोन कर मांगा ट्रांसफर
उप-मुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा के ओएसडी भगवत सिंह राठौड़ ने 25 जून को शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि आरोपी ने खुद को उप-मुख्यमंत्री बताते हुए चिकित्सा और स्वास्थ्य मंत्री कार्यालय के विशिष्ट सहायक बलवंत लिगरी को फोन किया।
आरोप है कि फोन पर उसने पुष्पेंद्र पारीक का जेएलएन अस्पताल अजमेर में तत्काल प्रभाव से ट्रांसफर करने की बात कही।इसके बाद उसने जेएलएन अस्पताल अजमेर के अधीक्षक डॉ. अरविंद खरे को भी फोन किया। आरोप है कि यहां भी उसने खुद को डिप्टी सीएम बताकर मनचाहा कार्य आवंटित करने का दबाव बनाने की कोशिश की।
विभाग ने क्यों किया सस्पेंड
स्वास्थ्य विभाग के निदेशक राकेश कुमार शर्मा ने निलंबन आदेश जारी किया है। आदेश में कहा गया कि कर्मचारी ने संवैधानिक पदनाम का गलत इस्तेमाल किया। विभाग के अनुसार पुष्पेंद्र पारीक ने 20 जून को जेएलएन अस्पताल अजमेर में ट्रांसफर के बाद कार्यभार संभाला था।
इसके बाद वह 21 जून से बिना अनुमति अनुपस्थित रहा। इस दौरान उसके खिलाफ कोतवाली अजमेर थाने में एफआईआर दर्ज की गई। विभाग का कहना है कि कर्मचारी ने 18 जुलाई को दोबारा कार्यभार संभालते समय भी एफआईआर की जानकारी नहीं दी। विभागीय जांच प्रभावित न हो, इसलिए उसे निलंबित किया गया है।
मुख्यालय भेजा गया जैसलमेर
निलंबन के बाद पुष्पेंद्र पारीक का मुख्यालय जैसलमेर निर्धारित किया गया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी होने तक वह जैसलमेर मुख्यालय से जुड़े रहेंगे। मामले में पुलिस भी आगे की जांच कर रही है।
जून में हुई थी शिकायत
डिप्टी सीएम के ओएसडी भगवत सिंह राठौड़ ने 25 जून को दो स्तरों पर शिकायत की थी। पहली शिकायत स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख शासन सचिव को भेजी गई थी। दूसरी शिकायत अजमेर कोतवाली थाने में दर्ज कराई गई थी।
शिकायत में कहा गया था कि आरोपी को किसी भी संवैधानिक पद का अधिकार नहीं था। इसके बावजूद उसने खुद को उप-मुख्यमंत्री बताकर अधिकारियों को प्रभावित करने की कोशिश की।
फर्जी पहचान का इस्तेमाल गंभीर मामला
सरकारी अधिकारियों के नाम और पद का गलत इस्तेमाल प्रशासनिक व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती माना जाता है। ऐसे मामलों में आरोपी पर धोखाधड़ी और पहचान के गलत इस्तेमाल जैसी धाराओं में कार्रवाई हो सकती है। फिलहाल पुलिस और विभाग दोनों स्तर पर मामले की जांच जारी है।
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