22 लाख देकर खरीदा FMGE का फर्जी सर्टिफिकेट, मेडिकल कॉलेज से की इंटर्नशिप, अब SOG ने किया गिरफ्तार

Ashish Bhardwaj | Oct 29, 2026, 12:29 IST
राकेश कुमार यादव
एक युवक को डॉक्टर बनने की ऐसी धुन लगी की उसने फर्जीवाडे़ का रास्ता चुन लिया। विदेश से MBBS करके भारत लौटे इस युवक ने FMGE स्क्रीनिंग परीक्षा में तीन बार असफल होने के बाद 22 लाख रुपए देकर फर्जी प्रमाणपत्र बनवा लिया। इसी दस्तावेज के आधार पर दौसा के सरकारी मेडिकल कॉलेज में इंटर्नशिप भी शुरू कर दी।

राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने फर्जी प्रमाणपत्र मामले में राकेश कुमार यादव को गिरफ्तार किया है। वह कोटपूतली-बहरोड़ जिले के बानसूर क्षेत्र का रहने वाला है।



तीन बार दी FMGE परीक्षा

जांच के मुताबिक, राकेश कुमार यादव ने 2011 में 12वीं की पढ़ाई पूरी की थी। इसके बाद उसने जयपुर से चार साल का GNM नर्सिंग कोर्स किया। वर्ष 2017 में वह MBBS की पढ़ाई के लिए ताजिकिस्तान गया। वर्ष 2022 में डिग्री पूरी करने के बाद भारत लौट आया।



विदेश से MBBS करने वाले भारतीय छात्रों को भारत में मेडिकल प्रैक्टिस के लिए निर्धारित स्क्रीनिंग परीक्षा पास करनी होती है। इसे FMGE यानी Foreign Medical Graduate Examination कहा जाता है। राकेश ने दिसंबर 2022, जून 2023 और दिसंबर 2023 में यह परीक्षा दी। हालांकि, वह तीनों बार सफल नहीं हो सका।



इसके बाद उसने कथित तौर पर परीक्षा पास करने का फर्जी प्रमाणपत्र हासिल करने की योजना बनाई। जांच एजेंसी के अनुसार, अलवर निवासी नफीस खान और दौसा निवासी शुभम गुर्जर के जरिए 22 लाख रुपए में प्रमाणपत्र बनवाया गया। इसी के आधार पर उसने राजस्थान मेडिकल काउंसिल में इंटर्नशिप के लिए आवेदन किया। बाद में उसे दौसा के पंडित नवल किशोर शर्मा राजकीय मेडिकल कॉलेज में इंटर्नशिप करने को मिल गई।



जांच शुरू हुई तो इंटर्नशिप छोड़कर फरार

फर्जी FMGE प्रमाणपत्रों के आधार पर इंटर्नशिप करने और मेडिकल रजिस्ट्रेशन हासिल करने का मामला सामने आने के बाद SOG ने जांच तेज की। इसी दौरान राकेश यादव की भूमिका भी जांच के दायरे में आई। खुद पर कार्रवाई होने आशंका को लेकर राकेश ने बीच में ही इंटर्नशिप छोड़ दी और फरार हो गया था।



SOG ने जांच में सबूत जुटाने के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया। अब उससे पूछताछ कर यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि फर्जी प्रमाणपत्र किस तरह तैयार कराया गया और इसमें किन लोगों की भूमिका रही। पुलिस नफीस खान की तलाश भी कर रही है। जांच एजेंसी के अनुसार, नफीस ने भी कथित तौर पर फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर इंटर्नशिप की थी।




20 से 30 लाख रुपए में मिलता है फर्जी प्रमाणपत्र

SOG को जांच में एक बड़े नेटवर्क होने की आशंका है। आरोप है कि गिरोह विदेश से MBBS करने वाले और FMGE परीक्षा पास नहीं कर पाने वाले अभ्यर्थियों से 20 से 30 लाख रुपए लेकर फर्जी प्रमाणपत्र उपलब्ध कराता है।



मामले में राजस्थान मेडिकल काउंसिल के तत्कालीन रजिस्ट्रार डॉ. राजेश शर्मा, कथित मुख्य सरगना भानाराम माली और अन्य लोगों की गिरफ्तारी पहले हो चुकी है। जांच में मेडिकल काउंसिल के कुछ कर्मचारियों और कथित बिचौलियों की भूमिका भी सामने आई है। अधिकारियों की मिलीभगत के आरोपों की जांच जारी है।




100 से ज्यादा संदिग्ध जांच के दायरे में

SOG के अनुसार, इस कथित फर्जीवाड़े में 100 से अधिक लोगों को चिह्नित किया गया है। जांच एजेंसी अब प्रमाणपत्रों की सत्यता, भुगतान और इंटर्नशिप के लिए किए गए आवेदनों की पड़ताल कर रही है। अलग-अलग तारीखों की मीडिया रिपोर्टों में गिरफ्तार आरोपियों की संख्या अलग बताई गई है। इसलिए अंतिम संख्या की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।



यह मामला केवल फर्जी दस्तावेजों तक सीमित नहीं है। मेडिकल योग्यता और मरीजों की सुरक्षा से जुड़े गंभीर सवाल भी इससे उठते हैं। जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि कितने लोगों ने फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर इंटर्नशिप या रजिस्ट्रेशन हासिल की है। SOG की जांच आगे बढ़ने के साथ इस नेटवर्क से जुड़े अन्य नाम भी सामने आ सकते हैं।



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