चरागाह भूमि पर भूमाफिया का बड़ा खेल, 24 लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज
news In Short
- फतेहपुर शेखावाटी में बेशकीमती चरागाह भूमि पर माफिया का बड़ा खेल।
- फर्जी दस्तावेज तैयार कर 24 लोगों ने अपने नाम करा ली जमीन।
- पिंजरापोल सोसाइटी ने माफिया से जुड़े लोगों के खिलाफ दर्ज कराई एफआईआर।
- इस कीमती जमीन को हड़पने के लिए लंबे समय से चल रहा था खेल।
- दस्तावेजों की जांच और साक्ष्यों को एकत्रित करने में जुटी फतेहपुर पुलिस।
news In Detail
Jaipur: राजस्थान में सीकर जिले के फतेहपुर शेखावाटी में बड़ा भूमि घोटाला सामने आया है। गौशाला की करोड़ों रुपये की बेशकीमती चरागाह भूमि को फर्जी दस्तावेज तैयार कर बेचने का मामला प्रकाश में आया है। इस संबंध में श्री पिंजरापोल सोसाइटी के सचिव सुनील कुमार ने फतेहपुर कोतवाली थाने में नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई है। इसमें 24 लोगों को आरोपी बनाया गया है।
फर्जी दस्तावेजों से हड़पी करोड़ों की जमीन
श्री पिंजरापोल सोसाइटी फतेहपुर के सचिव सुनील कुमार ने आरोप लगाया है कि भूमाफिया ने मिलीभगत कर सोसाइटी की स्वामित्व वाली गोचर भूमि को अपना बताकर अवैध रूप से खुर्द-बुर्द कर दिया। आरोपियों ने फर्जी दस्तावेज तैयार किए और बिना किसी वैधानिक अधिकार के इस बेशकीमती जमीन के सौदे कर डाले।
रिपोर्ट में बताया गया है कि खसरा नंबर 2917/1569 की करीब 19.273 हेक्टेयर भूमि की अनुमानित बाजार कीमत लगभग 1.84 करोड़ रुपये है। इसे षड्यंत्रपूर्वक तरीके से बेचा गया है। इस पूरी प्रक्रिया में न केवल सोसाइटी के हितों को नुकसान पहुंचाया गया, बल्कि सरकारी नियमों की भी धज्जियां उड़ाई गई हैं।
इन 24 आरोपियों के खिलाफ दर्ज हुआ मुकदमा
पुलिस ने सचिव की शिकायत पर मामले की गंभीरता को देखते हुए 24 लोगों को नामजद किया है। पुलिस के अनुसार इस धोखाधड़ी और जालसाजी के मामले में कुछ ऐसे नाम हैं, जो माफिया के लिए काम करते हैं। इन लोगों ने अपने नाम पर रजिस्ट्री करवा ली थी।
गोचर भूमि का इतिहास पुराना
इस विवादित भूमि का इतिहास काफी पुराना है। संवत 1927 में रायसाहब कल्याण सिंह के द्वारा इस भूमि की व्यवस्था की गई थी। इसके बाद 1956 में काश्तकारी अधिनियम लागू होने के बाद यह जमीन जयदयाल एवं भजनलाल महाजन केसरा के नाम खातेदारी गोचर भूमि बन गई थी।
दस्तावेजों के अनुसार 9 फरवरी को अंकित कुमार, धुलाराम सैनी, मोहित धोरी व निर्मला के नाम पर इस जमीन की रजिस्ट्री करवाई गई। कुल 27001 वर्ग गज भूमि को अवैध रूप से बेच दिया गया। शिकायत में यह भी कहा गया है कि आरोपियों ने बिना किसी भौतिक कब्जे के कागजों में ही हेरफेर कर जमीन को अपने नाम दिखा दिया और फिर उसे अन्य लोगों को बेच दिया।
दस्तावेजों की जांच में जुटी
मामला दर्ज होने के बाद फतेहपुर थाना पुलिस ने दस्तावेजों की जांच और साक्ष्यों को जुटाना शुरू कर दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह संगठित अपराध हो सकता है, जिसमें कई अन्य कड़ियों के जुड़ने की संभावना है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि इन फर्जी दस्तावेजों को तैयार करने में किन-किन विभागों के कर्मचारियों या अधिकारियों की संलिप्तता रही है। सोसाइटी के सदस्यों और स्थानीय नागरिकों ने इस मामले में सख्त एक्शन की मांग की है। फिलहाल पुलिस की टीमें आरोपियों की तलाश और दस्तावेजों के सत्यापन में जुटी हुई हैं।
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