पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने कांग्रेस से दिया इस्तीफा, बोले- चापलूसी की परंपरा से घुटा दम
समझें क्या है पूरा मामला
- कांग्रेस पार्टी से विश्वेंद्र सिंह का इस्तीफा।
- डोटासरा पर लगाए गंभीर आरोप।
- चापलूसी की परंपरा पर सवाल उठाए।
- आरएएस भर्ती में अंक दिलाने का आरोप।
- निष्पक्ष जांच की मांग की।
राजस्थान की राजनीति में बड़ा भूचाल आया है। पूर्व मंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता विश्वेंद्र सिंह ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से अपना त्यागपत्र साझा किया। इसमें उन्होंने पार्टी की वर्तमान दशा पर तीखे सवाल खड़े किए हैं।
सिंह ने अपने त्यागपत्र में साफ शब्दों में कहा कि पार्टी में व्याप्त चापलूसी की परंपरा और गलत नीतियों के कारण उनका दम घुट रहा था। ऐसे माहौल में घुट-घुट कर जीने के बजाय स्वाभिमान के साथ अलग होना बेहतर है।
क्या लिखा त्यागपत्र में?
अपने त्यागपत्र में विश्वेंद्र सिंह ने भावनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने लिखा कि उन्होंने हमेशा अपने इष्ट गिरिराज महाराज और अंतरात्मा की आवाज सुनकर फैसले लिए हैं।
उन्होंने कहा कि कुछ छुटभैये तथाकथित नेताओं ने अनर्गल बयान दिए हैं। इससे उनके कार्यकर्ताओं में आक्रोश है। उनका अंतर्मन भी दुखी और व्यथित है। जिस पार्टी के लिए उन्होंने जीवन न्योछावर कर दिया, उसी पार्टी ने उनकी निष्ठा और ईमानदारी का यह सिला दिया।
उन्होंने कहा कि उन्होंने हमेशा मान, सम्मान और स्वाभिमान से जीवन जिया है। अपने उसूलों और आदर्शों से कभी समझौता नहीं किया। यदि सच को सच कहना और झूठ का साथ नहीं देना पाप है, तो वे यह पाप हर बार करेंगे।
सिंह ने कहा कि वे न गलत करते हैं और न गलत सहन करते हैं। उनका सार्वजनिक जीवन जनता जनार्दन की देन है। वे उनके लिए ही जीते हैं और उनके लिए ही मरेंगे। उनके खून का हर कतरा कार्यकर्ताओं, मतदाताओं और क्षेत्रवासियों के लिए बहा है।
उन्होंने कहा कि उनका सार्वजनिक जीवन खुली किताब है और बेदाग है। उन्होंने अपने दामन पर कभी दाग नहीं लगने दिया। ऐसी परिस्थिति में दम घुटने से मरने के बजाय स्वाभिमान की मौत मरना बेहतर है। उन्होंने कहा कि उनके पुरखों ने कभी गलत चीजों से समझौता नहीं किया। उनका अनुसरण करते हुए वे पार्टी नेतृत्व को अलविदा कह रहे हैं।
डोटासरा पर गंभीर आरोप
विवाद तब और गहरा गया जब विश्वेंद्र सिंह ने डोटासरा पर आरोप (Allegations on Dotasara) लगाए। उन्होंने आरोप लगाया कि जब डोटासरा शिक्षा मंत्री थे, तब उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग किया।
उनके मुताबिक डोटासरा ने अपने बेटे, बहू और अन्य रिश्तेदारों को आरएएस (RAS – Rajasthan Administrative Service) इंटरव्यू में कथित तौर पर अस्सी-अस्सी अंक दिलवाए। यह मामला वर्ष 2016 और 2018 का है।
उन्होंने रीट (REET – Rajasthan Eligibility Examination for Teachers) परीक्षा में हुई कथित धांधलियों का भी जिक्र किया। ओबीसी (OBC – Other Backward Classes) नॉन-क्रीमी लेयर प्रमाण पत्र के दुरुपयोग के मामले भी उठाए।
निष्पक्ष जांच और इस्तीफे की मांग
विश्वेंद्र सिंह ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इन मामलों की गहनता से जांच होनी चाहिए।
साथ ही उन्होंने डोटासरा से नैतिक आधार पर तुरंत अपने पद से इस्तीफा देने की मांग की। उन्होंने कांग्रेस आलाकमान से भी अपील की कि उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया जाए।
निकाय चुनाव हार पर गुस्सा
हाल ही में संपन्न हुए राजस्थान शहरी निकाय चुनावों में भरतपुर और डीग जिले में कांग्रेस को करारी हार मिली थी। इसके बाद से पार्टी के भीतर आंतरिक कलह सतह पर आ गई थी।
विश्वेंद्र सिंह ने इस हार के लिए दोनों जिलों के कांग्रेस जिलाध्यक्षों को जिम्मेदार ठहराया। साथ ही प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को भी जिम्मेदार बताया।
उनका आरोप है कि संगठन के लचर और पक्षपातपूर्ण रवैये के कारण पार्टी के वफादार और असली कार्यकर्ताओं को दरकिनार किया गया। केवल चहेतों को टिकट बांटे गए। इसी वजह से पार्टी को यह दिन देखना पड़ा।
निष्कासन की चर्चा
विश्वेंद्र सिंह के इस्तीफे (Vishvendra Singh resignation) से ठीक पहले राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज थीं। कहा जा रहा था कि कांग्रेस राजस्थान कांग्रेस (Rajasthan Congress) स्तर से उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की तैयारी चल रही थी।
सूत्रों के मुताबिक पिछले कुछ दिनों से उनकी लगातार पार्टी विरोधी बयानबाजी की शिकायतें दिल्ली तक पहुंच रही थीं। भरतपुर और डीग जिलों के जिला अध्यक्षों ने भी पीसीसी को विस्तृत रिपोर्ट सौंपी थी।
रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि पार्टी के भीतर रहकर संगठन को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। चर्चा थी कि पार्टी नेतृत्व उन्हें अनुशासनहीनता के आधार पर निष्कासित करने का मन बना चुका था। लेकिन औपचारिक कार्रवाई से पहले ही विश्वेंद्र सिंह ने खुद इस्तीफा देकर बड़ा राजनीतिक दांव चल दिया।
कांग्रेस का पलटवार
दूसरी ओर गोविंद सिंह डोटासरा और उनके समर्थक नेताओं ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। डोटासरा का कहना है कि कांग्रेस पार्टी में किसी तरह की कोई गुटबाजी नहीं है।
उन्होंने कहा कि सभी नेता पूरी तरह एकजुट हैं। पार्टी के अन्य नेताओं ने इस घटनाक्रम को भाजपा का टूलकिट और दुष्प्रचार बताया। उन्होंने विश्वेंद्र सिंह को अवसरवादी और पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल बताया।
इस इस्तीफे के बाद से राजस्थान की राजनीति में सियासी पारा चढ़ गया है। अब देखना जरूरी है कि कांग्रेस आलाकमान इस मामले में क्या फैसला लेता है।