बीमा कंपनी को 2 लाख रुपए 9 प्रतिशत ब्याज सहित देने के आदेश, 25 हजार का जुर्माना
समझें क्या है पूरा मामला
- जयपुर में वाहन दुर्घटना क्लेम खारिज करने पर बीमा कंपनी के खिलाफ आयोग का आया फैसला।
- श्रीराम जनरल इंश्योरेंस ने NCB छुपाने का आरोप लगाकर क्लेम अस्वीकार किया था।
- उपभोक्ता आयोग ने इसे सेवादोष मानते हुए 2.07 लाख रुपये देने का आदेश दिया।
- साथ में 9% वार्षिक ब्याज और 25 हजार रुपये हर्जाना भी देने को कहा गया।
- आयोग ने माना कि तकनीकी आधार पर पूरा क्लेम खारिज नहीं किया जा सकता।
जयपुर के मानसरोवर निवासी राजकुमार कसवां ने श्रीराम जनरल इंश्योरेंस कंपनी से अपना वाहन बीमित कराया था। अगस्त 2019 में वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया। मरम्मत के लिए क्लेम मांगा तो कंपनी ने NCB (No Claim Bonus) छुपाने का आरोप लगाकर क्लेम खारिज कर दिया। मामला उपभोक्ता आयोग-04 जयपुर में पहुंचा। आयोग ने बीमा कंपनी का सेवादोष मानते हुए 2,07,372 रुपए मरम्मत राशि, 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज और 25 हजार रुपए हर्जाना देने का आदेश दिया।
बीमा कराया, दुर्घटना हुई, क्लेम ठुकराया
राजकुमार कसवां ने 18 जुलाई 2019 को श्रीराम जनरल इंश्योरेंस से वाहन का बीमा कराया था। 14 अगस्त 2019 को वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
क्षतिपूर्ति के लिए क्लेम फॉर्म भरकर आवेदन किया गया। लेकिन बीमा कंपनी ने क्लेम खारिज कर दिया।
कंपनी का तर्क था कि परिवादी ने NCB यानी नो क्लेम बोनस का तथ्य छुपाकर प्रीमियम में 20 प्रतिशत की छूट ली थी। इसी आधार पर क्लेम अस्वीकार किया गया।
आयोग तक पहुंचा मामला
8 नवंबर 2019 को परिवादी ने बीमा कंपनी को कानूनी नोटिस भिजवाया। जवाब संतोषजनक नहीं मिला तो मामला उपभोक्ता आयोग-04 जयपुर में दायर किया गया।
परिवादी के अधिवक्ता (एडवोकेट) मनीष यादव ने आयोग को बताया कि क्लेम फॉर्म सही तरीके से भरा गया था। केवल misrepresentation (गलत जानकारी) के आधार पर पूरा क्लेम खारिज नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि बीमा कंपनी का खुद दायित्व था कि वह NCB के बिंदु की स्वतंत्र जांच कर सकती थी।
राष्ट्रीय आयोग का हवाला भी दिया
अधिवक्ता यादव ने एक अन्य मामले में राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग के फैसले का हवाला दिया। उस मामले में राष्ट्रीय आयोग ने संपूर्ण क्लेम को रद्द करना गलत माना था। आनुपातिक रूप से क्लेम देने का निर्देश दिया था। इसी आधार पर जयपुर आयोग ने नुकसान के आकलन में 20 प्रतिशत की कमी कर बाकी राशि ब्याज सहित देने का आदेश दिया।
आयोग का फैसला
उपभोक्ता आयोग-04 के अध्यक्ष अशोक शर्मा और सदस्य पूजा व नीलम ने श्रीराम जनरल इंश्योरेंस को सेवादोष का दोषी माना। आदेश में कहा गया कि कंपनी को 2,07,372 रुपए की मरम्मत राशि 4 दिसंबर 2019 से अदायगी तक 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित देनी होगी। इसके अलावा परिवादी को मानसिक परेशानी और वाद व्यय के रूप में 25 हजार रुपए हर्जाना भी देना होगा।
उपभोक्ताओं के लिए क्या है सबक
यह फैसला बताता है कि बीमा कंपनी केवल तकनीकी आधार पर पूरा क्लेम नहीं ठुकरा सकती। यदि ऐसा हो तो उपभोक्ता आयोग में जाने का अधिकार है।
उपभोक्ता को क्लेम अस्वीकृति का कारण और कानूनी नोटिस की प्रतिलिपि सुरक्षित रखनी चाहिए।
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