चुनावी रण में गले मिले शेखावत-बेनीवाल, पुरानी अदावत के बीच तस्वीर ने बढ़ाई सियासी हलचल
राजस्थान की राजनीति में लंबे समय से एक-दूसरे पर तीखे हमले करते रहे केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल बुधवार को जोधपुर की सड़क पर अचानक आमने-सामने आ गए।
चुनावी माहौल के बीच हुई इस मुलाकात की खास बात यह रही कि दोनों नेता अपनी-अपनी गाड़ियों से उतरे, गर्मजोशी से मिले और एक-दूसरे को गले लगाया। कुछ देर बातचीत के बाद दोनों अपने-अपने चुनाव प्रचार के लिए रवाना हो गए।
नगर निगम चुनाव प्रचार के अंतिम दिन केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत जोधपुर में भाजपा प्रत्याशियों के समर्थन में प्रचार कर रहे थे। उनका काफिला माता का थान, मगरा पूंजला और नया पुरा होते हुए चैनपुरा की ओर जा रहा था। इसी दौरान सामने से राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) प्रमुख और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल का काफिला आ गया।
दोनों काफिले आमने-सामने हुए तो बेनीवाल अपनी गाड़ी से नीचे उतर गए। बेनीवाल को उतरता देखकर शेखावत भी गाड़ी से नीचे आए। दोनों ने हाथ मिलाया और फिर गले मिलकर एक-दूसरे का अभिवादन किया। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच कुछ देर बातचीत भी हुई।
चुनावी प्रचार के आखिरी दिन सड़क पर हुई यह मुलाकात इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि राजस्थान की राजनीति में शेखावत और बेनीवाल के बीच लंबे समय से सियासी खींचतान देखने को मिलती रही है।
कभी एक-दूसरे से दूरी, अब गले मिले
दोनों नेताओं के बीच तल्खी का अंदाजा नवंबर 2022 की एक घटना से लगाया जा सकता है। जोधपुर के ओसियां क्षेत्र में एक कार्यक्रम के दौरान जब मंच से केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के पहुंचने की घोषणा हुई थी, तब वहां मौजूद हनुमान बेनीवाल कार्यक्रम से रवाना हो गए थे। उस समय यह घटनाक्रम दोनों नेताओं के बीच सियासी दूरी को लेकर काफी चर्चा में रहा था।
बेनीवाल समय-समय पर राजस्थान और जोधपुर से जुड़े अलग-अलग मुद्दों को लेकर शेखावत पर राजनीतिक हमले भी करते रहे हैं। ऐसे में अब उसी जोधपुर में दोनों नेताओं का गाड़ियों से उतरकर गर्मजोशी से गले मिलना राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।
लेकिन एक दौर ऐसा भी था जब साथ थे BJP-RLP
शेखावत और बेनीवाल के रिश्तों की कहानी सिर्फ राजनीतिक टकराव की नहीं है। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा और RLP ने राजस्थान में गठबंधन किया था। भाजपा ने नागौर लोकसभा सीट RLP के लिए छोड़ी थी और हनुमान बेनीवाल NDA प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतरे थे।
बेनीवाल ने उस चुनाव में कांग्रेस की ज्योति मिर्धा को 1 लाख 81 हजार 260 वोटों से हराया था। यानी एक समय बेनीवाल और भाजपा एक ही गठबंधन का हिस्सा थे।
दिलचस्प बात यह है कि गजेंद्र सिंह शेखावत खुद बेनीवाल को भाजपा-NDA के साथ लाने में अपनी भूमिका का जिक्र कर चुके हैं।
एक पुराने इंटरव्यू में बेनीवाल की भाजपा में वापसी से जुड़े सवाल पर शेखावत ने कहा था कि उन्होंने 2013-14 में भी कोशिश की थी कि बेनीवाल भाजपा में बने रहें। शेखावत ने यह भी कहा था कि 2019 के चुनाव में बेनीवाल को वापस साथ लाने के लिए उन्होंने प्रयास किया था। हालांकि उस बातचीत में उन्होंने तत्काल किसी नए राजनीतिक समीकरण की संभावना से इनकार भी किया था।
किसान आंदोलन के बाद NDA से अलग हुई थी RLP
हालांकि भाजपा और RLP का साथ ज्यादा लंबा नहीं चला। केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों को लेकर किसान आंदोलन के दौरान दिसंबर 2020 में बेनीवाल की पार्टी ने NDA से नाता तोड़ लिया था।
इसके बाद बेनीवाल लगातार भाजपा के खिलाफ मुखर रहे। 2024 के लोकसभा चुनाव में राजनीतिक तस्वीर फिर बदली और नागौर में कांग्रेस ने RLP के लिए सीट छोड़ दी। बेनीवाल विपक्षी गठबंधन के समर्थन से चुनाव मैदान में उतरे और जीतकर लोकसभा पहुंचे।
वर्तमान में भी दोनों नेता अलग-अलग राजनीतिक खेमों में हैं। शेखावत भाजपा के वरिष्ठ नेता और केंद्र सरकार में मंत्री हैं, जबकि बेनीवाल RLP के प्रमुख और नागौर से सांसद हैं।
जोधपुर में RLP का अपना सियासी आधार
यह मुलाकात जोधपुर में होने के कारण भी राजनीतिक रूप से दिलचस्प है। पिछले चुनावों में RLP ने जोधपुर और आसपास के इलाकों में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान भी RLP समर्थकों की भूमिका को जोधपुर के चुनावी समीकरण में महत्वपूर्ण माना गया था।
अब नगर निगम चुनाव में भाजपा और RLP अपने-अपने राजनीतिक हित और उम्मीदवारों के साथ मैदान में हैं। ऐसे समय में प्रचार के आखिरी दिन दोनों बड़े नेताओं की गर्मजोशी वाली तस्वीर सामने आई है।
क्या तस्वीर के पीछे कोई सियासी संकेत?
राजस्थान की राजनीति में गठबंधन बदलने का इतिहास देखते हुए शेखावत-बेनीवाल की यह मुलाकात स्वाभाविक रूप से अटकलों को हवा दे सकती है। खासकर इसलिए क्योंकि दोनों नेता पहले NDA के दौर में साथ रह चुके हैं और शेखावत खुद बेनीवाल को साथ लाने की अपनी पुरानी भूमिका सार्वजनिक रूप से बता चुके हैं।
लेकिन फिलहाल इस मुलाकात को किसी नए गठबंधन या राजनीतिक समझौते का संकेत मानने का कोई ठोस आधार सामने नहीं आया है। दोनों नेताओं की तरफ से भी मुलाकात को लेकर ऐसा कोई राजनीतिक दावा नहीं किया गया है।
फिर भी चुनावी राजनीति में तस्वीरों के अपने मायने होते हैं। जिन दो नेताओं के बीच कभी सार्वजनिक मंचों से दूरी और तीखे राजनीतिक हमले दिखाई देते थे, उन्हीं शेखावत और बेनीवाल का चुनाव प्रचार के बीच सड़क पर रुकना, गाड़ियों से उतरना और गले मिलना-राजस्थान की राजनीति के लिए दिलचस्प तस्वीर जरूर बन गई है।
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