गोशालाओं ने मृत गायों को जिंदा दिखाया, फिर 20 करोड़ का सरकारी अनुदान हड़पा
समझें क्या है पूरा मामला
- 38 गोशालाओं में सरकारी अनुदान हड़पने के लिए 20 करोड़ का फर्जीवाड़ा।
- गोशालाओं ने मृत गायों को जीवित दिखाया, फर्जी टैग्स का इस्तेमाल किया।
- महालेखाकार (AG) की विशेष ऑडिट रिपोर्ट में इस फर्जीवाड़े का हुआ खुलासा।
- गोशालाओं में अनुदान हड़पने का यह खेल 2021-22 से 2024-25 के बीच पाया।
- अब पशुपालन विभाग ने दिए दोषी गोशालाओं से रिकवरी करने के आदेश।
Bharatpur: राजस्थान की गोशालाओं में अनुदान हड़पने का मामला सामने आया है। इसका खुलासा महालेखाकार (AG) की विशेष ऑडिट रिपोर्ट में हुआ है।
रिपोर्ट के अनुसार गोशालाओं ने मृत गायों को जीवित दिखा दिया। फिर फर्जी टैग्स का इस्तेमाल करके 20.67 करोड़ रुपए का सरकारी अनुदान हड़प लिया।
प्रदेश की 38 गोशालाओं में यह फर्जीवाड़ा पाया गया। अब पशुपालन विभाग ने आनन-फानन में दोषी गोशालाओं से रिकवरी के आदेश जारी किए हैं।
डुप्लीकेट टैग से फर्जीवाड़ा
ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार यह फर्जीवाड़ा मुख्य रूप से वर्ष 2021-22 से लेकर 2024-25 के बीच किया गया। गोशालाओं ने डुप्लीकेट और अनरजिस्टर्ड टैग के आधार पर करोड़ों का अनुदान उठा लिया।
ऑडिट में ऐसे हजारों मवेशियों का रिकॉर्ड मिला, जरे भारत पशुधन ऐप पर रजिस्टर्ड नहीं थे। कुछ मामलों में मृत गायों के नाम पर भी फर्जीवाड़ा हुआ।
कैसे हुआ महाघोटाला? (Modus Operandi)
इस घोटाले को मुख्य रूप से तीन तरीकों से अंजाम दिया गया:
फर्जी और अनरजिस्टर्ड टैग: हजारों ऐसे पशुओं के नाम पर पैसा उठाया, जिनका केंद्र सरकार के भारत पशुधन ऐप पर कोई पंजीकरण ही नहीं था।
डुप्लीकेट टैग का खेल: एक ही टैग नंबर का बार-बार इस्तेमाल किया गया। फिर अलग-अलग पशुओं के नाम पर सरकारी सहायता राशि हड़पी गई। ऑडिट में तीन बड़ी गोशालाओं से कुल 1,746 डुप्लीकेट टैग पकड़े गए। इनके जरिए 66.58 लाख रुपए का भुगतान लिया गया।
मृत गोवंश के नाम पर उठाई राशि: जो गायें काफी समय पहले मर चुकी थीं, उन्हें भी रिकॉर्ड में जिंदा दिखाया गया। इनके चारे और रखरखाव के नाम पर सरकारी बजट ठिकाने लगाया गया।
किन गोशालाओं में मिली कितनी गड़बड़ी?
जांच रिपोर्ट में भरतपुर और डीग जिले की चार प्रमुख गोशालाओं के नाम सामने आए हैं, जहां करोड़ों का हेरफेर हुआ है:
श्री ब्रजकामद सुरभिवन शोध संस्थान (डीग) - सबसे बड़ा घोटाला
अकेले इसी गोशाला ने 13.77 करोड़ रुपये का फर्जी अनुदान डकार लिया। यहां 4 साल के दौरान कुल 20,553 फर्जी, डुप्लीकेट और संदिग्ध टैग पाए गए। इस गोशाला ने अकेले 1,485 डुप्लीकेट टैग का इस्तेमाल कर 53.92 लाख रपए अतिरिक्त उठाए।
सालाना संदिग्ध टैग का ब्योरा: 2021-22 में 5,812 टैग, 2022-23 में 6,527 टैग, 2023-24 में 5,522 टैग और 2024-25 में 2,692 टैग अमान्य या संदिग्ध पाए गए।
ठाकुर श्री गोपाल जी गौशाला समिति (कामां)
इस गोशाला में 4 साल में कुल 4,763 फर्जी, इनएक्टिव और संदिग्ध टैग मिले। इसके जरिए करीब 37.63 लाख रुपए का अनुदान उठाया गया। यहां मृत गोवंश के नाम पर भी करीब 20,000 रुपए का भुगतान उठाने का पुख्ता प्रमाण मिला है।
सालाना संदिग्ध टैग का ब्योरा: वर्ष 2021-22 में 947 बड़े और 197 छोटे गोवंश के अमान्य टैग मिले। वहीं 2022-23 में 1,759 बड़े व 285 छोटे, 2023-24 में 655 बड़े व 112 छोटे और 2024-25 में 902 बड़े व 191 छोटे गोवंश के संदिग्ध टैग पाए गए।
लोहागढ़ नंदीशाला (भरतपुर)
नगर निगम भरतपुर द्वारा संचालित इस नंदीशाला में भी बड़े स्तर पर मिलीभगत सामने आई है। यहां कुल 2,074 अनरजिस्टर्ड और अमान्य टैग मिले।
सालाना संदिग्ध टैग का ब्योरा: 2021-22 में 591, 2022-23 में 759, 2023-24 में 481 और 2024-25 में 243 टैग पूरी तरह अमान्य या संदिग्ध पाए गए।
श्रीराम गौशाला (भुसावर)
यहां कुल 737 फर्जी और संदिग्ध टैग मिले। इसके अलावा 6 डुप्लीकेट टैग के जरिए ₹25,800 का अतिरिक्त भुगतान भी उठाया गया।
सालाना संदिग्ध टैग का ब्योरा: 2021-22 में 244, 2022-23 में 372, 2023-24 में 107 और 2024-25 में 24 टैग के जरिए अवैध भुगतान लिया गया।
पैसा नहीं लौटाया तो होगी कानूनी कार्रवाई
इस घोटाले के उजागर होने के बाद पशुपालन विभाग पूरी तरह से हरकत में आ गया है। विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. रामकिशन महावर का कहना है कि सभी संबंधित गोशालाओं से वसूली के आदेश जारी कर दिए गए हैं।
जो भी गोशाला समय पर सरकारी पैसा वापस नहीं लौटाएगी, उसके खिलाफ सख्त कानूनी व दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
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