गहलोत का भजनलाल सरकार पर हमला, उठाए बड़े सवाल
समझें क्या है पूरा मामला
- अशोक गहलोत ने भजनलाल सरकार पर पांचना बांध विवाद और सीमावर्ती कार्रवाई को लेकर हमला बोला।
- कहा कि पांचना बांध को लेकर 15-20 दिनों से तनाव है, लेकिन सरकार समाधान नहीं निकाल पा रही है।
- गहलोत ने सीमावर्ती जिलों में मस्जिदों और दरगाहों पर कार्रवाई को राजनीतिक ध्रुवीकरण बताया।
- उन्होंने मुख्यमंत्री से सभी पक्षों को साथ लेकर तुरंत संवाद प्रक्रिया शुरू करने की अपील की।
- गहलोत ने चेतावनी दी कि मौजूदा हालात भविष्य के लिए गंभीर संकेत हैं और शांति बनाए रखना जरूरी।
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राजस्थान की भजनलाल सरकार पर दो मोर्चों पर एक साथ हमला बोला है। पहला - पांचना बांध विवाद, जहां 15-20 दिनों से तनाव बना हुआ है और सरकार कोई समाधान नहीं निकाल पाई। दूसरा - पाकिस्तान सीमा से सटे जिलों में मस्जिदों और दरगाहों पर प्रशासनिक कार्रवाई, जिसे गहलोत ने राजनीतिक ध्रुवीकरण का एजेंडा बताया। उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से तत्काल सभी पक्षों से संवाद करने की अपील की और चेतावनी दी कि मौजूदा हालात भविष्य के लिए खतरनाक संकेत हैं।
पांचना विवाद पर सरकार को घेरा
गहलोत ने कहा कि पांचना बांध का मामला पिछले 15-20 दिनों से तनावपूर्ण है। उन्होंने आगे कहा कि गुर्जर और मीणा समाज के बीच विवाद सुलझाने की दिशा में सरकार की ओर से कोई ठोस पहल नहीं हुई। उन्होंने कहा कि कम से कम दोनों समाज के पंच-पटेलों और जनप्रतिनिधियों को बुलाकर बातचीत तो होनी चाहिए थी।
गहलोत ने बताया कि हाईकोर्ट लगातार आदेश दे रहा है और अधिकारी अवमानना की कार्रवाई के डर से दबाव में हैं। इसके बावजूद सरकार की ओर से कोई पहल नहीं। लोग धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं और रेलवे पटरियों पर बैठने जैसी घटनाएं भी सामने आ रही हैं।
गहलोत ने दिया सरकार को सुझाव
गहलोत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से सीधी अपील करते हुए कहा कि सरकार को तत्काल सभी पक्षों को बुलाकर संवाद करना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि मंत्रियों या पार्टी के जिम्मेदार लोगों की एक टीम बनाई जाए जो दोनों समुदायों से बातचीत कर शांतिपूर्ण रास्ता निकाले।
सरकार के रवैये को बताया जिम्मेदार
जातीय संघर्ष की आशंका पर गहलोत ने सीधा आरोप लगाया कि सरकार की नीतियां ही जातीय और सामाजिक तनाव को बढ़ाने वाली हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रवृत्ति केवल राजस्थान तक सीमित नहीं बल्कि पूरे देश में दिखाई दे रही है।
सीमावर्ती जिलों में कार्रवाई पर सवाल
गहलोत ने बाड़मेर, जैसलमेर और बीकानेर जिलों का खास जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद से इन इलाकों में कभी दंगे नहीं हुए और न ही कभी तनाव की स्थिति बनी। यहां बड़ी संख्या में अल्पसंख्यक समुदाय के लोग रहते हैं और दशकों से भाईचारा कायम है।
उन्होंने आरोप लगाया कि अब इन्हीं क्षेत्रों में मस्जिदों और दरगाहों को चुन-चुनकर गिराया जा रहा है। एक ऐसी दरगाह का भी उन्होंने जिक्र किया जहां गांव में कोई मुस्लिम परिवार नहीं रहता और हिंदू समुदाय के लोग ही श्रद्धा के साथ वहां जाते थे। स्थानीय लोगों के विरोध के बावजूद उसे ध्वस्त कर दिया गया।
राजनीतिक ध्रुवीकरण का लगाया आरोप
गहलोत ने कहा कि धार्मिक स्थलों पर कार्रवाई कर लोगों को भड़काने का प्रयास किया जा रहा है। उनके अनुसार यह राजनीतिक ध्रुवीकरण के एजेंडे का हिस्सा है जिसका मकसद चुनावी लाभ हासिल करना है। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं का संदेश पूरे देश में जाता है और धार्मिक आधार पर विभाजन को बढ़ावा मिलता है।
अधिकारियों से की आत्ममंथन की अपील
गहलोत ने कलेक्टर, SDM, SP, कमिश्नर और IG जैसे अधिकारियों को सीधे संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें यह सोचना चाहिए कि क्या उनकी कार्रवाई संविधान की भावना और न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप है। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में वर्षों से कायम शांति और भाईचारे को किसी भी कीमत पर नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए।
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