सरकारी कर्मचारियों के भत्तों के भुगतान में बड़ी गड़बड़ी उजागर, एजी ने सरकार को किया अलर्ट
News In Short
- राजस्थान में सरकारी कर्मचारियों के भत्तों में बड़े स्तर पर अनियमितताएं।
- महालेखाकार (एजी) ने इन अनियमितताओं पर राज्य सरकार को अलर्ट किया।
- हार्ड ड्यूटी अलाउंस, मेस भत्ता और पटवारियों के भत्तों में अधिक गड़बड़ी।
- कई मामलों में तय नियमों और पात्रता के विरुद्ध जाकर भुगतान किए।
- सभी विभाग अपने स्तर पर वेतन बिलों की सघन जांच करवाएं।
News In Detail
Jaipur: राजस्थान में सरकारी कर्मचारियों के वेतन और भत्तों के भुगतान में बड़े स्तर पर गड़बड़ी सामने आई हैं। महालेखाकार (एजी) ने राज्य सरकार को इस संबंध में चेताया है कि विभिन्न विभागों में ड्यूटी अलाउंस और मेस भत्ते सहित कई अन्य भत्तों के भुगतान में गंभीर गड़बड़ियां हो रही हैं।
भत्तों के नाम पर नियमों की अनदेखी
महालेखाकार कार्यालय की रिपोर्ट के अनुसार राज्य के कर्मचारियों के वेतन बिलों की जांच में यह पाया गया कि विभागवार दिए जा रहे विशेष भत्तों में पारदर्शिता का अभाव है। विशेष रूप से हार्ड ड्यूटी अलाउंस, मेस भत्ता और पटवारियों को दिए जाने वाले भत्तों में गड़बड़ी पाई गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कई मामलों में तय नियमों और पात्रता के विरुद्ध जाकर भुगतान किए गए हैं, जिससे राजकोष पर अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ रहा है।
अधिकारियों की भूमिका
एजी कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि IFMS (इंटीग्रेटेड फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम) केवल एक प्लेटफॉर्म है, जो बिल जनरेट करने और भुगतान की सुविधा प्रदान करता है। सिस्टम में राज्य बीमा, जीपीएफ (GPF), आरजीएचएस (RGHS) कटौती, महंगाई भत्ता, मकान किराया और नगर क्षतिपूर्ति भत्ते के लिए तो पुख्ता प्रावधान हैं, लेकिन विभाग विशिष्ट भत्तों के मामले में सॉफ्टवेयर पूरी तरह से नियंत्रण नहीं रख पाता।
महालेखाकार ने कहा है कि विभिन्न विभागों के अपने अलग-अलग नियम और प्रावधान होते हैं। ऐसी स्थिति में भुगतान में होने वाली गड़बड़ी को रोकने के लिए विभागीय अधिकारियों की व्यक्तिगत सतर्कता अत्यंत आवश्यक है।
अधिकारियों पर जिम्मेदारी का भार
बजट नियंत्रण अधिकारी (BCO) वित्तीय गलतियों और अनियमितताओं को रोकने के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं। इसके बावजूद हार्ड ड्यूटी अलाउंस और मेस भत्ते जैसे भुगतानों में लगातार चूक हो रही है। एजी कार्यालय ने इसी माह राज्य सरकार का ध्यान इन गड़बड़ियों की ओर आकर्षित किया है और निर्देश दिया है कि सभी विभाग अपने स्तर पर वेतन बिलों की सघन जांच करवाएं।
अधिकारियों के लिए अलर्ट मोड
रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि बिलों के सही भुगतान और सटीक कटौती के लिए केवल विभागीय अधिकारी ही जवाबदेह हैं। एजी ने सरकार को सुझाव दिया है कि जब तक जमीनी स्तर पर अधिकारी बिलों के सत्यापन में सावधानी नहीं बरतेंगे, तब तक IFMS जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म भी वित्तीय अनियमितताओं को पूरी तरह रोकने में सक्षम नहीं होंगे।
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