HC ने पूर्व IAS संजय दीक्षित के खिलाफ CBI FIR निरस्त की, पासपोर्ट मामले में राहत

Mukesh Sharma | Jul 17, 2026, 21:59 IST
पासपोर्ट मामले में IAS संजय दीक्षित और रणजीत सिंह को HC ने दी राहत
राजस्थान हाई कोर्ट ने पासपोर्ट चरित्र सत्यापन मामले में तत्कालीन IAS संजय दीक्षित और रणजीत सिंह के खिलाफ 2010 में दर्ज CBI की FIR को निरस्त कर दिया। जस्टिस अनूप कुमार ढंड ने दोनों की याचिका स्वीकार की।

समझें क्या है पूरा मामला

  • हाई कोर्ट ने पासपोर्ट विवाद में पूर्व IAS अधिकारी के खिलाफ CBI FIR रद्द की।
  • पुलिस चरित्र सत्यापन मामले में संजय दीक्षित और रणजीत सिंह को बड़ी राहत।
  • हाई कोर्ट ने कहा- FIR जारी रखने का कोई औचित्य नहीं, याचिका स्वतः समाप्त।
  • 2009 की शिकायत के बाद CBI ने की थी जांच, अब कोर्ट ने रद्द की FIR।
  • हिस्ट्रीशीटर को पासपोर्ट जारी करने के आरोप में IAS पर लगा था केस।

राजस्थान हाई कोर्ट ने पासपोर्ट के लिए किए गए पुलिस चरित्र सत्यापन से जुड़े विवाद में तत्कालीन IAS अधिकारी संजय दीक्षित और रणजीत सिंह के खिलाफ CBI द्वारा दर्ज FIR को निरस्त कर दिया है। जस्टिस अनूप कुमार ढंड ने दोनों की याचिकाएं स्वीकार करते हुए यह फैसला सुनाया।



2009 में शिकायत

वर्ष 2009 में प्रहलाद गुर्जर ने पासपोर्ट कार्यालय में शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया था कि रणजीत सिंह को नियमों के विपरीत पासपोर्ट जारी किया गया जबकि उनके खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज थे। पासपोर्ट कार्यालय ने शिकायत खारिज कर दी।



हाई कोर्ट से CBI जांच का आदेश

शिकायत खारिज होने के बाद गुर्जर ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। एकलपीठ के निर्देश पर CBI ने 29 जनवरी 2010 को FIR दर्ज कर जांच शुरू की। हालांकि बाद में हाईकोर्ट की खंडपीठ ने एकलपीठ के आदेश को निरस्त कर मामले की दोबारा सुनवाई के निर्देश दिए।



याचिकाकर्ताओं का पक्ष

संजय दीक्षित की ओर से अदालत को बताया गया कि जैसे ही रणजीत सिंह के आपराधिक मामलों और गिरफ्तारी की जानकारी मिली, उन्होंने तुरंत पुलिस को चरित्र सत्यापन वापस लेने की सूचना दे दी थी।



रणजीत सिंह की दलील थी कि जिस याचिका के आधार पर CBI जांच शुरू हुई थी, वह बाद में स्वतः समाप्त हो गई थी। ऐसे में FIR जारी रखना न्यायसंगत नहीं था।



CBI का विरोध

CBI ने FIR रद्द करने का विरोध करते हुए कहा कि व्यक्ति हिस्ट्रीशीटर था और उसका चरित्र सत्यापन किया गया था। जांच पूरी हो चुकी थी, लेकिन चार्जशीट दाखिल करने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी।



हाई कोर्ट का फैसला

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जस्टिस अनूप कुमार ढंड ने याचिकाएं स्वीकार करते हुए CBI की FIR निरस्त करने का आदेश पारित किया।



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