हाई कोर्ट के आदेश के बाद भी अतिक्रमण नहीं हटा, तहसीलदार व पटवारी सस्पेंड

Mukesh Sharma | Jul 04, 2026, 08:00 IST
नाले से अतिक्रमण न हटाने पर तहसीलदार और पटवारी सस्पेंड
राजस्थान हाई कोर्ट ने साल 2019 से लंबित जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए नाले से अतिक्रमण न हटाने पर नादौती के तहसीलदार और पटवारी को सस्पेंड कर दिया है। कोर्ट ने इसे कर्तव्य में लापरवाही मानते हुए प्रशासन को तुरंत अतिक्रमण हटाने के आदेश दिए हैं।

समझें क्या है पूरा मामला

  • अतिक्रमण न हटाने पर करौली के तहसीलदार और पटवारी सस्पेंड।
  • हाई कोर्ट में 2019 से लंबित याचिका, बार-बार आदेश के बावजूद नहीं हटा अतिक्रमण।
  • तहसीलदार दीन दयाल शर्मा और पटवारी भारत सिंह गुर्जर पर गिरी गाज।
  • कोर्ट ने राजस्व सचिव को दोनों अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के दिए निर्देश।
  • अतिक्रमी बार-बार कर रहे कब्जा, कोर्ट ने थानाधिकारी से तुरंत हटवाने को कहा।

राजस्थान हाई कोर्ट ने बार-बार आदेश देने के बावजूद नाले की जमीन से अतिक्रमण नहीं हटाने पर गंभीर रुख अपनाया है। कोर्ट में पेश करौली जिले के नादौती तहसीलदार दीन दयाल शर्मा और पटवारी भारत सिंह गुर्जर के खिलाफ राजस्व सचिव को विभागीय कार्रवाई के आदेश दिए हैं।



कोर्ट ने विभागीय कार्रवाई पूरी होने तक दोनों अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस मनीष शर्मा की बैंच ने यह आदेश रूपराज की जनहित याचिका पर दिए।



अदालत ने अतिरिक्त महाधिवक्ता जीएस गिल को कहा है कि वे संबंधित थानाधिकारी और राजस्व अधिकारियों से मौके से तुरंत अतिक्रमण हटवाकर रिपोर्ट कोर्ट में पेश करें।



आदेश के बावजूद नहीं मान रहे अतिक्रमी

कोर्ट ने कहा कि साल 2019 में याचिका दायर होने के बाद कई बार अतिक्रमण हटाने के आदेश दिए गए। इसके बावजूद अतिक्रमी फिर से अतिक्रमण कर रहे हैं।



कोर्ट ने 30 अप्रैल को अतिक्रमण नहीं हटने पर कार्रवाई करने की चेतावनी दी थी। 30 अप्रैल को कोर्ट ने स्थानीय तहसीलदार व पटवारी को इस संबंध में स्पष्टीकरण पेश करने को भी कहा था।



तब तक रहेंगे सस्पेंड

कोर्ट ने कहा कि यह बडे आश्चर्य की बात है कि दोनों अधिकारी कोर्ट में पेश होकर मौके पर अतिक्रमण होना स्वीकार कर रहे हैं और हटाने के लिए सात दिन का समय मांग रहे हैं।



इससे स्पष्ट है कि वे कोर्ट के आदेशों का सम्मान नहीं करते । उन्हें अपने कर्तव्यों का पालन नहीं करने का दोषी पाया जाता है।



अदालत ने स्पष्ट किया है कि उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई आरंभ नहीं की जा रही है, लेकिन उन्होंने आदेश की पालना में अतिक्रमण नहीं हटाया है। ऐसे में उन पर विभागीय कार्रवाई की जाए और कार्रवाई पूरी होने तक उन्हें सस्पेंड रखा जाए।



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