हाई कोर्ट की सख्ती, पृथ्वीराज नगर के 429 अवैध निर्माणों पर जेडीए से मांगा जवाब
समझें क्या है पूरा मामला
- अदालत का तीखा सवाल, अफसरों की नाक के नीचे कैसे खड़े हुए अवैध मकान?
- 429 निर्माणों को नोटिस,बेदखली व स्पष्टीकरण के लिए चस्पा होंगे अदालती आदेश।
- जान का गंभीर खतरा, हाईटेंशन लाइन के सेफ्टी कॉरिडोर व सड़कों पर अतिक्रमण।
- 1 सितंबर को सुनवाई, समाचार पत्रों के जरिए भी दी जाएगी अदालती आदेश की जानकारी।
राजस्थान हाई कोर्ट ने पृथ्वीराज नगर में सरकारी जमीन और सड़क पर अतिक्रमण करके मकान बनने पर संबंधित प्रवर्तन अधिकारी व जोन-उपायुक्त से जवाब मांगा है। कोर्ट ने पूछा है कि उनकी नाक के नीचे अवैध निर्माण कैसे हुए ? एक्टिंग चीफ जस्टिस एस.पी.शर्मा व जस्टिस चंद्र शेखर शर्मा ने यह अंतरिम निर्देश साहब सिंह की याचिका पर दिए।
429 संपत्ति मालिकों को भी नोटिस
जेडीए की ओर से पीआरएन दक्षिण की जोन-18 व 19 के प्रवर्तन अधिकारी की ओर से सरकारी जमीन व सड़क पर अतिक्रमण करके अवैध रुप से बने 429 निर्माणों की सूची पेश की है। कोर्ट ने इन सभी संपत्तियों के मालिकों को भी नोटिस जारी करने को कहा है।
व्यक्तिगत नोटिस और चस्पा करने के निर्देश
हाईकोर्ट ने 429 संपत्तियों के सभी मालिकों व कब्जाधारियों को व्यक्तिगत रूप से नोटिस तामील कराने और उनके मकानों/दुकानों पर नोटिस चस्पा करने के निर्देश दिए हैं। सभी पक्षों को अपने वकील के माध्यम से अदालत में स्पष्टीकरण देना होगा। कोर्ट ने रजिस्ट्री को अदालती आदेश की जानकारी समाचार पत्रों के जरिए करवाने के भी निर्देश दिए हैं। मामले में अगली सुनवाई एक सितंबर को होगी।
यह है मामला
एडवोकेट रामरख शर्मा ने बताया कि पृथ्वीराज नगर में तीन हाईटेंशन लाईन एक साथ निकल रही हैं। नियम के अनुसार दो लाईनों के बीच में 21 से 35 मीटर का सेफ्टी कॉरीडोर होना जरुरी है। लेकिन,यहां जेडीए की मिलीभगत और अनदेखी के चलते सेफ्टी जोन की जमीन पर ठीक हाई टेंशन लाईनों के नीचे मकान बन गए हैं। इसके साथ ही हाई टेंशन लाईनों के दोनों ओर 60-60 फुट की सड़क पर 20 से 30 फुट तक अतिक्रमण करके निर्माण कर लिए हैं। इससे आमजन की जान को गंभीर खतरा है। याचिका में सभी अतिक्रमणों को हटाने की गुहार की है।
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