नीरजा मोदी स्कूल की मान्यता रद्द करने के आदेश पर रोक, कोर्ट ने खामियां सुधारने के लिए दिया समय
News In Short
- नीरजा मोदी स्कूल की सीबीएसई मान्यता रद्द करने के आदेश पर रोक लगी।
- कोर्ट ने स्कूल को 10 दिन में 5 लाख की एफडीआर जमा कराने के दिए निर्देश।
- स्कूल को एक महीने में तकनीकी और ढांचागत कमियां सुधारने के लिए समय दिया।
- सुधार के बाद सीबीएसई स्कूल का दोबारा निरीक्षण करेगा।
- रिपोर्ट अदालत में होगी पेश, स्कूल प्रबंधन ने सीबीएसई द्वारा मान्यता रद्द करने के आदेश को चुनौती दी थी।
News In Detail
राजस्थान हाई कोर्ट ने जयपुर के नीरजा मोदी स्कूल को राहत दी है। जस्टिस गणेश राम मीणा ने सीबीएसई द्वारा 23 फरवरी 2026 को जारी किए गए उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें स्कूल की मान्यता रद्द कर दी गई थी। अदालत ने स्कूल प्रबंधन को 10 दिन के भीतर 5 लाख रुपए सीबीएसई के पास जमा कराने का निर्देश दिया है। यह राशि एफडीआर के रूप में रखी जाएगी।
सुधार के लिए एक माह का समय
हाई कोर्ट ने शिक्षा की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों से कोई समझौता न करते हुए स्कूल को एक माह की समय सीमा दी है। इस अवधि में स्कूल प्रशासन को अपनी सभी तकनीकी और ढांचागत कमियां अनिवार्य रूप से दूर करनी होंगी।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सुधार प्रक्रिया पूरी होने के बाद सीबीएसई 45 दिन के भीतर स्कूल का पुन: निरीक्षण करेगी। इस निरीक्षण की विस्तृत रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश करनी होगी।
स्कूल प्रबंधन का पक्ष
स्कूल प्रबंधन की ओर से याचिका में तर्क दिया गया कि यह शैक्षणिक संस्थान वर्ष 2001 से निरंतर संचालित हो रहा है। संस्थान की लंबी सेवा और हजारों छात्रों का नामांकन इसकी विश्वसनीयता को स्वतः ही प्रमाणित करता है। स्कूल में वर्तमान में लगभग 5,500 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं।
अधिवक्ताओं ने कोर्ट को बताया कि सीबीएसई ने पूर्व में ही स्कूल की मान्यता को 31 मार्च 2029 तक विस्तार दिया था। प्रबंधन का दावा है कि बोर्ड द्वारा बताई गई अधिकांश कमियों को पहले ही दुरुस्त किया जा चुका है।
अमायरा सुसाइड केस
यह पूरा विवाद तब गहराया, जब नीरजा मोदी स्कूल में दुखद घटना घटी थी। 1 नवंबर 2025 को 9 वर्षीय छात्रा अमायरा ने स्कूल की चौथी मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली थी।
इस घटना के बाद स्कूल की सुरक्षा व्यवस्था और प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े हुए थे। इसी कड़ी में सीबीएसई ने कठोर कदम उठाते हुए सीनियर सेकेंडरी स्तर की मान्यता रद्द करने का निर्णय लिया था, जिसे अब चुनौती दी गई है।
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