गैर-RAS अफसरों के IAS चयन पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार को 15 दिन में फैसला लेने के निर्देश
याचिकाकर्ता के एडवोकेट राजीव सोगरवाल ने कोर्ट को बताया कि राजस्थान में आरएएस के अलावा अन्य राज्य सेवा से चार आईएएस बनने हैं। इसके लिए राज्य सरकार ने 20 अफसरों के नाम छांटकर यूपीएससी को भेज दिए थे। यूपीएससी के बोर्ड ने 22 और 23 दिसंबर 2025 को इंटरव्यू लिए थे। इंटरव्यू बोर्ड में राजस्थान के मुख्य सचिव भी शामिल थे।
20 अधिकारियों के नाम भेजे, 4 का चयन
याचिकाकर्ता के एडवोकेट राजीव सोगरवाल ने कोर्ट को बताया कि राजस्थान में आरएएस के अलावा अन्य राज्य सेवा से चार आईएएस बनने हैं। इसके लिए राज्य सरकार ने 20 अफसरों के नाम छांटकर यूपीएससी को भेज दिए थे। यूपीएससी के बोर्ड ने 22 और 23 दिसंबर 2025 को इंटरव्यू लिए थे। इंटरव्यू बोर्ड में राजस्थान के मुख्य सचिव भी शामिल थे।
इंटरव्यू के बाद ही भेज दिए थे नाम
यूपीएससी ने इंटरव्यू के बाद चार लोगों का चयन कर लिया था। उसने इन नामों पर अंतिम मुहर के लिए राजस्थान सरकार 26 दिसंबर, 2025 को ही पत्र भेज दिया था। आम तौर पर राज्य सरकार ऐसे मामलों में फौरन ही अपनी मंजूरी दे देती है। लेकिन, यह पहली बार है कि राज्य सरकार ने 10 महीने से मंजूरी रोकी हुई है। इस कारण IAS में चयन की प्रक्रिया से जुड़ी जरूरी कार्रवाई लंबे समय से लंबित है। सरकार की ओर से इस पर फैसला नहीं लिया जा रहा है।
45 दिन में करना होता है फैसला
भारतीय प्रशासनिक सेवा (नियुक्ति द्वारा चयन) रेग्यूलेशन-1997 के नियम-6 के तहत राज्य सरकार को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार 45 दिन के भीतर उचित आदेश पारित करना होता है। इसके बावजूद भी राज्य सरकार ने इस संबंध में कोई निर्णय नहीं लिया है। केंद्र सरकार की ओर से भी चयन प्रक्रिया को अंतिम रूप देने की कार्रवाई लंबित बताई गई।
जल्द से जल्द हो फैसला
कोर्ट ने दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद कहा कि याचिका में मुख्य मांग राज्य सरकार को लंबित मामले पर उचित निर्णय लेने का निर्देश देने की है। ऐसे में कोर्ट ने राज्य सरकार के संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे अदालती आदेश की प्रमाणित कॉपी मिलने के अधिकतम 15 दिन में मामले पर विचार कर कारण सहित आदेश पारित करें।
हालांकि, हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी साफ कर दिया कि उसने सरकार को किसी खास तरीके से फैसला करने के लिए बाध्य नहीं किया है। सरकार कानून के प्रावधानों के अनुसार मामले में स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र है। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के पक्ष में IAS चयन की सिफारिशें UPSC को भेजने का आदेश नहीं दिया है, बल्कि सरकार को लंबित मामले पर जल्द से जल्द फैसला लेने के निर्देश दिए हैं।
गैर-आरएएस से बनेंगे IAS
IAS में चयन की यह प्रक्रिया सामान्य विभागीय पदोन्नति से अलग है। भारतीय प्रशासनिक सेवा (नियुक्ति द्वारा चयन) रेग्यूलेशन—1997 के तहत राज्य सरकार से जुड़े ऐसे अधिकारी,जो राज्य सिविल सेवा के सदस्य नहीं हैं,लेकिन निर्धारित योग्यता और सेवा शर्तें पूरी करते हैं, भी IAS में चयन के लिए विचार के पात्र हो सकते हैं। चयन समिति अधिकारियों के सेवा रिकॉर्ड और व्यक्तिगत साक्षात्कार के आधार पर उपयुक्त नामों की सिफारिश करती है। इसके बाद राज्य सरकार को इन सिफारिशों को UPSC के पास अनुमोदन के लिए भेजना होता है।
दो बार आ चुका है रिमाइंडर
यूपीएससी इस मामले में मुख्य सचिव को इस साल दो बार रिमाइंडर भेज चुकी है। इसमें यूपीएससी की ओर से 26 दिसंबर, 2025 के चयनितों के नामों पर टिप्पणी और मंजूरी देने के लिए भेजे गए पत्र का हवाला दिया गया। इस रिमाइंडर में राजस्थान सरकार से जल्द से जल्द निपटाने को कहा था,लेकिन राज्य सरकार ने मामले में अब तक अंतिम फैसला नहीं किया है।