राजस्थान पुलिस की ऐतिहासिक पहल, हाइटेक होगी बीट पुलिसिंग, पहले चरण में 9 जिलों में होगी लागू

Ashish Bhardwaj | Oct 05, 2026, 19:41 IST
राजस्थान पुलिस बीपीआरएंडडी एमओयू पर हस्ताक्षर
राजस्थान पुलिस ने अपनी बीट पुलिसिंग प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए बीपीआरएंडडी से समझौता किया है, जिसकी शुरुआत नौ जिलों में की जाएगी। इस प्रणाली के जरिए पुलिस और आम जनता के बीच संवाद को सशक्त किया जाएगा। हर बीट का जियो-मैप्ड प्रोफाइल बनाया जाएगा, जिससे अपराध रोकने में सहायता मिलेगी।

राजस्थान बीट पुलिसिंग में अब नए रूप में दिखेगी। राजस्थान पुलिस ने सोमवार को केंद्र की एक संस्था के साथ अहम समझौता किया है। पहले चरण में 9 जिलों में नई बीट प्रणाली शुरू की गई है। यह समझौता जयपुर के पुलिस मुख्यालय में हुआ। मकसद है बीट पुलिसिंग को ज्यादा असरदार, जवाबदेह और तकनीक से लैस बनाना।



क्या है राजस्थान पुलिस बीपीआरएंडडी एमओयू?

बीपीआरएंडडी (BPR&D – Bureau of Police Research and Development) केंद्रीय गृह मंत्रालय की संस्था है। एमओयू (MoU – Memorandum of Understanding) का मतलब है दो संस्थाओं के बीच लिखित समझौता। राजस्थान पुलिस बीपीआरएंडडी एमओयू पर सोमवार को हस्ताक्षर हुए।



राजस्थान पुलिस की ओर से उप महानिरीक्षक (अपराध) दीपक भार्गव ने हस्ताक्षर किए। बीपीआरएंडडी की ओर से डीआईजी (DIG – Deputy Inspector General) डॉ. किरण कंग सिद्धू ने साइन किए। वे नेशनल पुलिस मिशन में तैनात हैं।



इस दौरान डीजीपी (DGP – Director General of Police) राजीव कुमार शर्मा मौजूद रहे। बीपीआरएंडडी के महानिदेशक आलोक मित्तल भी मौके पर थे।



बीट पुलिसिंग क्या होती है?

बीट यानी थाने का छोटा इलाका, जिसकी जिम्मेदारी तय पुलिसकर्मी पर होती है। यही पुलिसकर्मी आम लोगों से सबसे पहले जुड़ता है।



गोवा के बाद दूसरा राज्य

यह एमओयू डीजीपी/आईजीपी (IGP – Inspector General of Police) कॉन्फ्रेंस 2025 की सिफारिशों के मुताबिक है। इसके तहत एक साल का एक्शन प्लान बनाया गया है। मित्तल के मुताबिक गोवा के बाद राजस्थान यह एमओयू करने वाला दूसरा राज्य है।



यह केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के निर्देशों के तहत हुआ है। मित्तल ने कहा कि ऐसे समझौतों से राज्य एक-दूसरे की अच्छी कार्यप्रणालियां सीख सकेंगे।



धरातल पर दिखेगा बदलाव: डीजीपी

डीजीपी राजीव कुमार शर्मा ने बीट पुलिसिंग को पुलिस-जनता की सबसे अहम कड़ी बताया। उन्होंने कहा कि अब तकनीक की मदद से धरातल पर बेहतर नतीजे दिखेंगे। डीजीपी ने चंडीगढ़ की बीट बुक प्रैक्टिस की तारीफ की। उन्होंने इसे राजस्थान में अपनाने की बात भी कही। उनके मुताबिक यह एमओयू अपराध रोकने में अहम भूमिका निभाएगा। पुलिस और जनता के बीच बातचीत भी बेहतर होगी। उन्होंने नए आपराधिक कानूनों को लागू करने में राजस्थान के प्रयास भी गिनाए।



किन 9 जिलों में नई बीट प्रणाली?

पहले चरण में हर रेंज से एक जिला चुना गया है। इनमें सीकर, जयपुर उत्तर, धौलपुर और डीडवाना-कुचामन शामिल हैं। कोटा शहर, डूंगरपुर, चूरू, जैसलमेर और जोधपुर पश्चिम भी इस सूची में हैं। पहले चरण के अनुभव और नतीजों के आधार पर आगे काम होगा। इसके बाद प्रदेश के बाकी जिलों में भी नई बीट प्रणाली लागू की जाएगी।



कैसे तय होगी नई बीट?

बीट का ढांचा आबादी, अपराध की स्थिति और भौगोलिक हालात के आधार पर बनेगा। शहरी और ग्रामीण इलाकों का फर्क भी ध्यान में रखा जाएगा।हर बीट का जियो-मैप्ड प्रोफाइल तैयार होगा। इसमें हॉटस्पॉट, संवेदनशील जगहें और अहम संस्थान दर्ज होंगे।



जनता से सीधा जुड़ाव

सामुदायिक संपर्क समूह यानी सीएलजी (CLG – Community Liaison Group) को मजबूत किया जाएगा। पुलिस मित्र जैसी व्यवस्थाएं भी मजबूत होंगी। नो योर बीट ऑफिसर यानी अपने बीट अधिकारी को जानिए जैसी पहल शुरू होगी।विद्यार्थियों, बुजुर्गों और कमजोर वर्गों से खास संवाद पर जोर रहेगा। बीट बुक और विलेज क्राइम नोट बुक से स्थानीय जानकारी जुटाई जाएगी। यह काम कानून के दायरे में होगा।



राजकॉप ई-बीट बुक होगी और ताकतवर

तकनीक के इस्तेमाल के लिए RajCop e-Beat Book की क्षमता बढ़ाई जाएगी। इसमें जीपीएस (GPS – Global Positioning System) और जियो-टैगिंग जैसी सुविधाएं होंगी। क्यूआर (QR – Quick Response) कोड, डिजिटल रिकॉर्ड और डैशबोर्ड का भी इस्तेमाल होगा। इससे बीट स्तर के कामकाज की निगरानी आसान होगी। जानकारी समय पर अपडेट होगी और अफसर बेहतर निगरानी कर सकेंगे।



प्रदर्शन के आधार पर समीक्षा

बीट पुलिसिंग की समीक्षा केपीआई (KPI – Key Performance Indicator) के आधार पर होगी। यानी तय पैमानों पर काम को परखा जाएगा। बीट, थाना, जिला और राज्य स्तर पर रिपोर्टिंग व्यवस्था बनेगी।



ट्रेनिंग पर खास जोर

बीट अधिकारियों के लिए शुरुआती और रिफ्रेशर ट्रेनिंग होगी। ट्रेनर्स की ट्रेनिंग भी कराई जाएगी। राजस्थान पुलिस अकादमी, जयपुर को इसका नोडल संस्थान बनाया गया है।



किसकी क्या जिम्मेदारी?

बीपीआरएंडडी प्रशिक्षण सामग्री, मॉडल प्रारूप और विशेषज्ञ मार्गदर्शन देगा। मैदानी काम, जरूरी आदेश, स्टाफ और तकनीक की जिम्मेदारी राजस्थान पुलिस की होगी।यानी केंद्र सलाह देगा और राज्य जमीन पर काम करेगा।



राजस्थान पुलिस न्यूज में यह पहल अहम है। इसका असर सीधे आम लोगों पर होगा। अब Rajasthan Police news में नजर 9 जिलों के इस प्रयोग पर रहेगी।



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