सीबीएसई की नई मूल्यांकन प्रणाली, अब रटने की जगह सीखने का होगा आकलन

Jageshwar prasad | May 05, 2026, 12:49 IST
Photograph: (the sootr)
CBSE ने सत्र 2026-27 से नर्सरी से 8वीं तक के लिए होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड लागू किया। अब मूल्यांकन 360 डिग्री पर होगा, जिसमें बच्चा खुद, साथी और शिक्षक देंगे फीडबैक। स्पोर्ट्स, कला और व्यवहार को भी शामिल किया गया।

News In Short

  • CBSE ने सत्र 2026-27 से मूल्यांकन के लिए होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड किया लागू।
  • अब नर्सरी से 8वीं तक के बच्चों का 360 डिग्री पर हो सकेगा मूल्यांकन।
  • रिपोर्ट कार्ड में बच्चा खुद, साथी और शिक्षक तीनों देंगे फीडबैक।
  • स्पोर्ट्स, कला, रचनात्मकता और व्यवहार को भी मिलेगा अलग से स्थान।
  • अभिभावकों के लिए पेरेंटिंग कैलेंडर और वर्कशॉप भी होंगे आयोजित।

News In Detail

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने शिक्षा जगत में एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव करते हुए अंकों पर आधारित पारंपरिक मूल्यांकन प्रणाली को समाप्त करने का निर्णय लिया है। शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू होने वाली इस नई प्रणाली के तहत अब नर्सरी से लेकर कक्षा 8 तक के छात्रों को होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड दिया जाएगा।



यह कार्ड बच्चे के सर्वांगीण विकास को दर्शाने वाला एक व्यापक दस्तावेज़ होगा, जिसमें केवल किताबी ज्ञान ही नहीं, बल्कि उसके व्यवहार, हुनर, मानसिक विकास और सामाजिक कौशल का पूरा लेखा-जोखा शामिल होगा।



CBSE के अधिकारियों के अनुसार, यह बदलाव रटने की परंपरा को तोड़ने और बच्चों को नंबर मशीन बनने से बचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। बोर्ड ने राजस्थान सहित पूरे देश के सभी संबद्ध स्कूलों को इस आशय के निर्देश जारी कर दिए हैं। फिलहाल यह व्यवस्था नर्सरी से आठवीं कक्षा तक के छात्रों पर लागू की जा रही है, जबकि अगले चरण में इसे नौवीं से बारहवीं कक्षा तक विस्तारित किया जाएगा।



रिपोर्ट कार्ड में क्या होगा नया?

नए होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह 360 डिग्री पर आंकलन करेगा। अब तक सिर्फ शिक्षक ही बच्चे को अंक देते थे, लेकिन अब इसमें तीन नए आयाम जोड़े गए हैं:



सेल्फ असेसमेंट (बच्चा खुद देगा नंबर): छात्र स्वयं अपनी प्रगति का मूल्यांकन करेगा कि उसने क्या नया सीखा, किन चीजों में उसे मुश्किल हुई और उसने उन्हें कैसे हल किया।



पीयर फीडबैक (साथियों की राय): कक्षा के दूसरे बच्चे भी फीडबैक देंगे कि छात्र का सामाजिक व्यवहार, टीम वर्क और सहयोग की भावना कैसी है।



हुनर को जगह: पढ़ाई के अलावा स्पोर्ट्स, कला, संगीत, रचनात्मकता और तकनीकी कौशल के लिए अलग से कॉलम होंगे। अब केवल अंक ही तय नहीं करेंगे कि बच्चा कितना सफल है, बल्कि उसकी विशिष्ट प्रतिभाओं को भी पहचान मिलेगी।



इस तरह के बदलाव भी होंगे

बदलावों के इस दौर में बच्चों और अभिभावकों को मानसिक रूप से तैयार करने के लिए रिपोर्ट कार्ड में दो विशेष सेक्शन भी जोड़े गए हैं:



कोपिंग विद चेंजेस (बदलाव से तालमेल): इस सेक्शन के जरिए अभिभावकों को सिखाया जाएगा कि बदलते सिलेबस और नई उम्मीदों के बीच वे बच्चे को मानसिक सहारा कैसे दे सकते हैं।



इन्क्लूजन (समानता का पाठ): इसके तहत बच्चों में संवेदनशीलता, विविधता के प्रति सम्मान और सबको साथ लेकर चलने की भावना विकसित करने पर जोर दिया जाएगा।



स्कूल अब अभिभावकों के लिए उनकी उम्र और जरूरत के हिसाब से विशेष ट्रेनिंग प्रोग्राम (वर्कशॉप) भी तैयार करेंगे। साथ ही, अभिभावकों को निर्देश दिया गया है कि वे रोज 15 मिनट बच्चे के साथ उसकी पढ़ाई पर नहीं, बल्कि उसके दिनभर के अनुभवों पर बात करें, उसकी छोटी-छोटी कोशिशों की तारीफ करें और बिना मोबाइल के समय बिताने की आदत डालें।



विशेषज्ञों की राय

विशेषज्ञों ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि सीबीएसई का यह कदम बच्चों को नंबर मशीन बनने से बचाएगा। जब मूल्यांकन का तरीका बदलेगा, तभी रटने की परंपरा खत्म होगी और बच्चे अपनी रुचि के हिसाब से आगे बढ़ सकेंगे। यह सीखने की नई शुरुआत है। शिक्षाविदों का यह भी मानना है कि यह बदलाव बच्चों पर परीक्षा के दबाव को कम करेगा और उनके संपूर्ण व्यक्तित्व विकास पर ध्यान केंद्रित करेगा।



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