अब एक चिप दिलाएगी अनचाहे गर्भ से मुक्ति, महिलाओं को मुफ्त मिलेगी यह सुविधा

Mukesh Sharma | Jul 16, 2026, 12:53 IST
इम्प्लेनोन गर्भनिरोधक चिप
राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में महिलाओं को इम्प्लेनोन गर्भनिरोधक चिप मुफ्त मिलेगी। बांह में लगने वाली यह चिप 3 साल तक अनचाहे गर्भ से सुरक्षित रखती है। पायलट प्रोजेक्ट के तहत 7,500 महिलाओं पर इसका सफल परीक्षण हो चुका है।

ऐसे समझें पूरा मामला

  • महिलाओं को अनचाहे गर्भ से मुक्ति के लिए सरकारी अस्पतालों में मुफ्त मिलेगी इम्प्लेनोन चिप।
  • 3 साल तक काम करेगी यह चिप, बांह में चंद मिनटों में इंजेक्ट होगी, 99.9% मामलों में सफल।
  • राजस्थान के प्रमुख शहरों में अब तक 7,500 महिलाओं को लगाई जा चुकी है यह चिप।
  • 4 सेमी लंबी यह लचीली चिप पूरी तरह दर्द रहित है और हटाने पर दोबारा गर्भधारण संभव।
  • थायराइड, डायबिटीज और बीपी पीड़ित महिलाओं के लिए सुरक्षित, डॉक्टरों को दी जा रही ट्रेनिंग।

महिलाओं को अब अनचाहे गर्भ से बचने के लिए गर्भनिरोधक टेबलेट खाने, नसबंदी कराने या कॉपर-टी लगवाने जैसे झंझटों से मुक्ति मिलने जा रही है। प्रेगनेंट होने पर अनचाहे गर्भ को गिराने वाली दवाइयां खाने और उसके कारण होने वाली पीड़ा झेलने के दिन अब लदने वाले हैं।



महिलाओं को अनचाहे गर्भ से सुरक्षित रखने के लिए अब उनके हाथ में एक छोटी सी अत्याधुनिक चिप लगाई जाएगी। इसके बाद वे अगले तीन सालों तक बेफिक्र रह सकेंगी।



इम्प्लेनोन (Implanon) नाम की इस विशेष चिप को लगवाने के बाद महिलाएं तीन साल तक प्रेगनेंट नहीं होंगी। खुले बाजार में इस चिप की कीमत करीब 3,000 रुपए है। लेकिन जल्द ही राजस्थान के सभी सरकारी अस्पतालों में महिलाओं को यह सुविधा मुफ्त दी जाएगी।



एक साल से चल रहा पायलट प्रोजेक्ट

प्रदेश में पिछले एक साल से इस तकनीक का पायलट प्रोजेक्ट सफलतापूर्वक चल रहा है। इसके तहत जयपुर, उदयपुर, जोधपुर, अजमेर व कोटा के चिन्हित अस्पतालों में अब तक करीब 7,500 महिलाओं को यह चिप लगाई जा चुकी है।



अकेले राजधानी जयपुर में ही 2,500 से ज्यादा महिलाओं को इसका लाभ मिल चुका है। इन प्रमुख अस्पतालों के डॉक्टरों को बांह में इस चिप को सुरक्षित रूप से इंजेक्ट करने की विशेष ट्रेनिंग दी जा चुकी है। जल्द ही पूरे प्रदेश के सरकारी डॉक्टरों को भी प्रशिक्षित किया जाएगा।



क्या है यह इम्प्लेनोन चिप और कैसे करती है काम?

यह मात्र 4 सेंटीमीटर लंबी और 2 मिलीमीटर चौड़ी एक लचीली चिप होती है। इसे महिला के उल्टे हाथ (बाएं हाथ) में कोहनी से थोड़ा ऊपर त्वचा के ठीक नीचे एक छोटे से इंजेक्शन की तरह आसानी से इंजेक्ट कर दिया जाता है।



इस चिप में इतोनोगेस्ट्रेल दवा मौजूद होती है। यह दवा धीरे-धीरे महिला के शरीर में रिलीज होकर प्रोजेस्टेरोन हार्मोन का स्राव करती है।



शुक्राणुओं का प्रवेश रोकना

यह हार्मोन गर्भाशय के मुंह (सर्विक्स) के म्यूकस (द्रव) को गाढ़ा कर देता है। इससे पुरुष शुक्राणु गर्भाशय के अंदर प्रवेश नहीं कर पाते।



इसके प्रभाव से महिला के अंडाशय में नए अंडे नहीं बनते। इस कारण फर्टिलाइजेशन की प्रक्रिया रुक जाती है और प्रेगनेंसी नहीं होती।



इस तकनीक के फायदे

बच्चों के जन्म में सुरक्षित अंतर

दो बच्चों के जन्म के बीच 3 साल का अंतर मां और बच्चे दोनों की सेहत के लिए बेहद जरूरी माना जाता है। पहले बच्चे के जन्म के तुरंत बाद इस चिप को लगवाकर महिलाएं खुद को दोबारा फिट होने का पर्याप्त समय दे सकती हैं। इससे शिशु और मातृ मृत्यु दर में भी बड़ी कमी आएगी।



दर्द रहित प्रक्रिया

यह पूरी तरह से दर्द रहित प्रक्रिया है जो महज कुछ मिनटों में पूरी हो जाती है। इसके लिए अस्पताल में भर्ती होने की कोई जरूरत नहीं पड़ती।



हटाते ही दोबारा प्रेगनेंसी संभव

यदि महिला 3 साल से पहले दोबारा गर्भधारण करना चाहती है तो वह किसी भी समय इस चिप को निकलवा सकती है। चिप हटाने के कुछ ही दिनों बाद वह दोबारा आसानी से कंसीव (प्रेगनेंट) कर पाएगी।



बीमारियों में भी सुरक्षित

थायराइड, डायबिटीज, और बीपी जैसी बीमारियों से पीड़ित महिलाएं भी इस चिप को सुरक्षित रूप से लगवा सकती हैं।



किन महिलाओं को नहीं लगवानी चाहिए यह चिप

एक्सपर्ट के अनुसार केवल ब्रेस्ट कैंसर, लीवर कैंसर या मिर्गी की बीमारी से पीड़ित महिलाओं को यह चिप नहीं लगाई जा सकती।



कुछ महिलाओं को शुरुआत में पीरियड बंद होने या अनियमित होने की सामान्य समस्या आ सकती है। लेकिन इस समस्या को सामान्य दवाओं से ठीक किया जा सकता है।



इन अस्पतालों में चल रहा है पायलट प्रोजेक्ट



राजस्थान में वर्तमान में इन प्रमुख चिकित्सा केंद्रों पर यह पायलट प्रोजेक्ट चल रहा है:



जयपुर: एसएमएस मेडिकल कॉलेज से जुड़े जनाना अस्पताल, महिला अस्पताल, गणगौरी अस्पताल और कांवटिया अस्पताल।



उदयपुर: आरएनटी मेडिकल कॉलेज से जुड़ा महिला अस्पताल।



जोधपुर: जोधपुर मेडिकल कॉलेज से जुड़े दो प्रमुख अस्पताल और जोधपुर एम्स (AIIMS)।


कोटा मेडिकल कॉलेज



अजमेर के जेएलएन मेडिकल कॉलेज



तीन साल पहले शुरू हुआ प्रोजेक्ट

जयपुर में एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर एवं चिप इम्प्लांट मास्टर ट्रेनर डॉ. आंचल नागर का कहना है कि यह तकनीक 30 साल पुरानी है, लेकिन महंगी होने से हमारे देश में शुरु नहीं हुई थी। प्रोजेक्ट तीन साल पहले शुरु हुआ था।



प्रोजेक्ट सिर्फ लगाने का नहीं, बल्कि कैसे लगाया और निकाला जाता है यह सिखाने का है। इसके लिए डॉक्टरों को दो दिन की ​ट्रेनिंग दी जाती है।



जब डॉक्टर इसे लगाना व निकालना सीख जाएंगे तभी इसे आम महिलाओं में लगाना शुरु करेंगे। अब तक करीब 7500 महिलाओं के लगा चुके हैं। भविष्य में सरकार इसे मुफ्त में लगाएगी।



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