IAS शिखर अग्रवाल के 40 विला की जांच अब अलवर पहुंची, ACB ने गोयल फैशंस की जमीनों का रिकॉर्ड मांगा
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ACB ने अलवर जिला प्रशासन को पत्र भेजकर कंपनी के सभी लैंड कन्वर्जन की जानकारी मांगी है। इसके बाद जिला प्रशासन ने जिले के पंजीयक कार्यालयों को रिकॉर्ड जुटाने के निर्देश दिए हैं। बताया जा रहा है कि अगले दो दिन में रिपोर्ट तैयार कर ACB को सौंपी जा सकती है। इस जानकारी से कंपनी की जमीनों, संपत्तियों और उनके इस्तेमाल से जुड़े पहलुओं की जांच में मदद मिलेगी।
इससे पहले ACB उद्योग विभाग, सार्वजनिक निर्माण विभाग और उदयपुर-अलवर जिला प्रशासन से भी दस्तावेज मांग चुकी है। जांच एजेंसी का जोर यह पता लगाने पर है कि कंपनी को अलग-अलग सरकारी पदों पर रहते हुए कोई अनुचित लाभ तो नहीं मिला। साथ ही संपत्तियों की खरीद में इस्तेमाल रकम और उनके वास्तविक मूल्य की भी पड़ताल की जा रही है।
6.16 करोड़ में खरीदे 40 विला-कॉटेज
इस पूरे मामले के केंद्र में गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड है। कंपनी अनंता ब्रांड के नाम से होटल और रिसॉर्ट संचालित करती है। शिखर अग्रवाल और उनके परिवार के सदस्यों ने इसी कंपनी से अलवर के अजबगढ़ और उदयपुर के बुझड़ा में विला-कॉटेज खरीदे थे।
रिपोर्ट्स के अनुसार, परिवार ने अजबगढ़ में 20 विला और बुझड़ा में 20 कॉटेज खरीदे। इन सौदों की कुल कीमत करीब 6 करोड़ 16.5 लाख रुपए बताई गई है। खरीद के बाद इन सभी संपत्तियों को उसी कंपनी को लीज पर दे दिया गया, जिससे इन्हें खरीदा गया था।
लीज की शर्तों के मुताबिक, बुझड़ा के 20 कॉटेज के लिए हर कॉटेज पर सालाना 4 लाख रुपए और अजबगढ़ के 20 विला के लिए हर विला पर 5 लाख रुपए किराया तय बताया गया है। इस तरह दोनों जगहों से कुल सालाना लीज आय करीब 1.80 करोड़ रुपए बैठती है। इसमें बुझड़ा से 80 लाख और अजबगढ़ से एक करोड़ रुपए की सालाना आय शामिल है।
शिखर और प्रशाखा के नाम अजबगढ़ में 16 विला
अजबगढ़ स्थित अनंता स्पा एंड रिसॉर्ट में शिखर अग्रवाल के नाम चार विला और उनकी पत्नी IPS अधिकारी प्रशाखा माथुर के नाम 12 विला होने की जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों के अधिकांश विला करीब 89 वर्ग मीटर के हैं। इनमें एक कमरा, टॉयलेट, डाइनिंग एरिया और बालकनी जैसी सुविधाएं हैं।
बताया गया है कि शिखर अग्रवाल ने यहां पहला विला 2024 में खरीदा था। इसके बाद परिवार के अन्य सदस्यों के नाम पर भी खरीदारी हुई। संपत्तियों की रजिस्ट्री और भुगतान से जुड़े दस्तावेज अब जांच के अहम आधार बन सकते हैं।
थानागाजी से शुरू हुई थीं रजिस्ट्रियां
अजबगढ़ में कंपनी ने 2020-21 के दौरान विला निर्माण शुरू किया था। शुरुआती रजिस्ट्रियां थानागाजी तहसील में हुईं। बाद में प्रतापगढ़ तहसील बनने के बाद रजिस्ट्री का काम वहां होने लगा। रिसॉर्ट में एक दिन ठहरने का शुरुआती किराया करीब 8 हजार रुपए बताया गया है।
ACB अब यह भी पता लगाने में जुटी है कि कंपनी ने जिले में कितनी जमीन खरीदी, किन जमीनों का कन्वर्जन कराया और इन पर किस तरह की परियोजनाएं विकसित की गईं। जांच एजेंसी को आशंका है कि कंपनी में दूसरे अधिकारियों या रसूखदार लोगों का निवेश भी हो सकता है। हालांकि, इस संबंध में अभी कोई निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
जांच का एक अहम पहलू यह भी है कि क्या कंपनी को सरकारी स्तर पर मिली रियायतों और परिवार की संपत्ति खरीद के बीच कोई संबंध था। ACB पहले ही इस मामले में प्रारंभिक जांच शुरू कर चुकी है। अब अलवर के जमीन और रजिस्ट्री रिकॉर्ड मिलने के बाद जांच को आगे बढ़ाया जाएगा।
फिलहाल, ये सभी आरोप और जांच के विषय हैं। किसी भी अधिकारी या कंपनी की दोषसिद्धि नहीं हुई है। दस्तावेजों की जांच और संबंधित पक्षों के जवाब के बाद ही तस्वीर साफ हो सकेगी।