IAS शिखर अग्रवाल के विला विवाद मामले में भजनलाल-गहलोत आमने-सामने, सीएम की भूमिका पर उठाए सवाल
विवाद की जड़ अनंता ग्रुप के रिसॉर्ट में IAS अग्रवाल और उनके परिवार के खरीदे गए 40 विला हैं। कंपनी को मिले विशेष निवेश पैकेज और कथित सरकारी रियायतों ने भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। इस बीच सरकार ने अग्रवाल और उनकी IPS पत्नी प्रशाखा माथुर को APO कर दिया है। दोनों से संपत्ति से जुड़े मामलों में सात दिन के अंदर जवाब मांगा गया है।
गहलोत ने पूछा- मुख्यमंत्री की क्या भूमिका है?
इसी मामले को लेकर अशोक गहलोत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पर निशाना साधा है। गहलोत का सवाल है कि जिस निवेश बोर्ड की बैठक में अनंता कंपनी को विशेष रियायत देने का फैसला हुआ, उसके अध्यक्ष खुद मुख्यमंत्री हैं। ऐसे में इस फैसले में उनकी भूमिका क्या थी?
गहलोत ने यह भी पूछा कि मामले की जांच मुख्यमंत्री के अधीन आने वाली ACB से क्यों कराई जा रही है? इसे CBI और ED जैसी केंद्रीय एजेंसियों को क्यों नहीं सौंपा जा रहा? उनका कहना है कि मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाले बोर्ड के फैसले की जांच उनके अधीन काम करने वाली एजेंसी कैसे निष्पक्ष तरीके से कर पाएगी।
भजनलाल का गहलोत पर हमला, 24 घंटे का अल्टीमेटम
यह सियासी विवाद 3 नवंबर को जोधपुर में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के बयान के बाद और तेज हुआ। 'लोकतंत्र बचाओ-अराजकता हटाओ' कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने गहलोत सरकार के कार्यकाल को राजनीतिक अस्थिरता, सत्ता संघर्ष और भ्रष्टाचार से जोड़ते हुए निशाना साधा। उन्होंने किसानों, पेपरलीक, RPSC नियुक्तियों और जल जीवन मिशन से जुड़े मामलों का भी जिक्र किया।
गहलोत ने मुख्यमंत्री के आरोपों को झूठा और तथ्यहीन बताते हुए कहा कि वे आरोपों का पूरा विवरण दस्तावेजों के साथ सार्वजनिक करें। ऐसा नहीं करने पर 24 घंटे में माफी मांगें।
अब इस पूरे विवाद में दो सवाल अहम हैं। पहला, शिखर अग्रवाल और अनंता कंपनी के बीच हुए सौदों में सरकारी पद के कथित दुरुपयोग के आरोप जांच में कितने सही साबित होते हैं। दूसरा, विशेष पैकेज से जुड़े फैसले में मुख्यमंत्री और निवेश बोर्ड की भूमिका पर उठे सवालों का सरकार क्या जवाब देती है। फिलहाल ACB की जांच और दोनों नेताओं के राजनीतिक बयान इस मामले को चर्चा में बनाए हुए हैं।
परिवार ने खरीदे 40 विला, जांच में कीमत और किराये पर सवाल
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अग्रवाल, उनकी पत्नी, दो बेटों और अन्य परिजनों ने उदयपुर के बुझड़ा और अलवर के अजबगढ़ स्थित अनंता रिसॉर्ट में कुल 40 विला और कॉटेज खरीदे। इन संपत्तियों की कुल खरीद कीमत करीब 6.16 करोड़ रुपए बताई गई है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, उदयपुर के बुझड़ा में 20 कॉटेज करीब 15 लाख रुपए प्रति यूनिट की दर से खरीदे गए। वहीं, अलवर के अजबगढ़ में 20 विला की खरीद करीब 16.5 लाख रुपए प्रति यूनिट की दर से बताई गई है। इन संपत्तियों को बाद में उसी कंपनी को लीज पर देने की बात भी सामने आई है। रिपोर्ट्स में इनसे करीब 1.80 करोड़ रुपए सालाना किराया मिलने का दावा किया गया है।
अब जांच एजेंसियां यह पता लगा रही हैं कि संपत्तियों की खरीद कीमत बाजार भाव के मुकाबले कितनी थी और क्या इन सौदों के बदले कंपनी को सरकारी स्तर पर कोई फायदा पहुंचाया गया। संपत्ति के दस्तावेज, रजिस्ट्री और संबंधित वित्तीय लेनदेन की जांच की जा रही है।
अनंता कंपनी को विशेष पैकेज देने का मामला
इस विवाद का दूसरा अहम पहलू गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड को मिला विशेष निवेश पैकेज है। यह कंपनी अनंता ब्रांड के तहत होटल और रिसॉर्ट संचालित करती है। ACB की शुरुआती जांच के अनुसार, कंपनी को रिसॉर्ट निर्माण की शर्तों में छूट, जरूरी प्रमाणपत्रों के सत्यापन के बिना मंजूरी और विशेष रियायती वित्तीय पैकेज जैसे लाभ मिलने के आरोप हैं।
ACB ने अपनी प्रारंभिक पड़ताल में शिखर अग्रवाल और कंपनी के बीच कथित मिलीभगत की आशंका जताई है। एजेंसी का कहना है कि अग्रवाल ने अपने पद और प्रभाव का इस्तेमाल कर कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाया हो सकता है। हालांकि, ये अभी जांच के विषय हैं। किसी भी आरोप को अंतिम रूप से साबित नहीं माना जा सकता।
राज्य सरकार ने 30 अक्टूबर को अग्रवाल के खिलाफ ACB जांच को मंजूरी दी थी। बाद में सरकार ने अनंता कंपनी के विशेष पैकेज को भी जांच पूरी होने तक रोकने का फैसला किया।