IAS टीना डाबी को हाईकोर्ट से राहत, अवमानना मामले में कोर्ट ने अपील की खारिज

Ashish Bhardwaj | Nov 02, 2026, 16:34 IST
अवमानना मामले में टीना डाबी को राहत
टोंक जिला कलेक्टर आईएएस टीना डाबी से जुड़े अवमानना मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने अपील के अधिकार को लेकर कानूनी स्थिति स्पष्ट की है। कोर्ट ने सुखलाल धाकड़ की अपील को खारिज कर दिया है। खंडपीठ ने कहा कि केवल अवमानना याचिका खारिज होने से कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट्स एक्ट की धारा 19 के तहत अपील का अधिकार नहीं मिल जाता। इसके लिए अवमानना अदालत की ओर से दोषसिद्धि होना जरूरी है।

चीफ जस्टिस संजय के. अग्रवाल और जस्टिस समीर जैन की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया। अपील में टोंक कलेक्टर टीना डाबी, देवली की एसडीओ रूबी अंसार, तहसीलदार मेघना गुप्ता सहित अन्य अधिकारियों को प्रतिवादी बनाया गया था। सुखलाल धाकड़ की ओर से अधिवक्ता राज कुमार शर्मा ने पैरवी कर रहे थे।



28 सितंबर को खारिज हुई थी अवमानना याचिका

मामले में अवमानना अदालत ने 28 सितंबर 2026 को आदेश जारी किया था। अदालत ने कहा था कि संबंधित मामले में अवमानना नहीं बनती। इसी आधार पर सुखलाल धाकड़ की अवमानना याचिका खारिज कर दी गई थी।



धाकड़ ने इस आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट की खंडपीठ में अपील दायर की। उनका मामला सुनवाई के लिए आया तो अदालत के सामने सबसे पहले यह सवाल था कि क्या अवमानना याचिका खारिज होने के आदेश के खिलाफ धारा 19 के तहत अपील की जा सकती है?



हाईकोर्ट ने आदेश में क्या देखा?

खंडपीठ ने अवमानना अदालत के 28 सितंबर के आदेश का परीक्षण किया। कोर्ट ने पाया कि उस आदेश में किसी भी प्रतिवादी अधिकारी को अवमानना का दोषी नहीं ठहराया गया था। न ही किसी अधिकारी के खिलाफ दोषसिद्धि का निष्कर्ष दर्ज किया गया था। अदालत ने सिर्फ यह माना था कि उपलब्ध परिस्थितियों में अवमानना का मामला नहीं बनता।



हाईकोर्ट ने इसी अंतर को अहम माना। अदालत के मुताबिक, अवमानना याचिका खारिज होना और किसी व्यक्ति को अवमानना का दोषी ठहराना दो अलग-अलग कानूनी स्थितियां हैं। केवल याचिका खारिज होने से अपील का अधिकार अपने आप पैदा नहीं होता।



धारा 19 में कब मिलती है अपील की सुविधा?

कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट्स एक्ट, 1971 की धारा 19 अवमानना के लिए सजा देने के आदेश के खिलाफ अपील का प्रावधान करती है। इस मामले में खंडपीठ ने कहा कि अवमानना अदालत ने किसी प्रतिवादी को दोषी नहीं ठहराया था। इसलिए धारा 19 के तहत दायर अपील सुनवाई योग्य नहीं है।



कोर्ट ने इसी कानूनी आधार पर सुखलाल धाकड़ की अपील खारिज कर दी। साथ ही लंबित आवेदन, यदि कोई थे, उन्हें भी निस्तारित कर दिया गया।




मूल आरोपों पर हाईकोर्ट ने नहीं दिया फैसला

इस आदेश में हाईकोर्ट ने मूल विवाद के आरोपों की सच्चाई पर कोई अलग निष्कर्ष नहीं दिया। खंडपीठ ने केवल यह तय किया कि धारा 19 के तहत दायर अपील सुनवाई योग्य है या नहीं। अदालत का फैसला अपील की स्वीकार्यता तक सीमित रहा।



इसका मतलब यह है कि इस आदेश को मूल विवाद में लगाए गए आरोपों पर टीना डाबी या अन्य अधिकारियों को क्लीन चिट के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। अदालत ने उस विवाद के गुण-दोष पर सुनवाई नहीं की।




ऐसे मामलों में क्यों अहम है फैसला?

यह आदेश अवमानना मामलों में अपील की कानूनी सीमा समझने के लिहाज से महत्वपूर्ण है। किसी व्यक्ति की ओर से दायर अवमानना याचिका खारिज हो जाए तो वह हर स्थिति में धारा 19 के तहत अपील नहीं कर सकता। पहले यह देखना होगा कि अवमानना अदालत ने किस तरह का आदेश दिया है और क्या उसमें दोषसिद्धि या सजा का निष्कर्ष है।



इस मामले में ऐसा कोई निष्कर्ष नहीं था। इसलिए हाईकोर्ट ने सुखलाल धाकड़ की अपील पर आगे सुनवाई करने के बजाय उसे सुनवाई योग्य नहीं माना और खारिज कर दिया।



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