क्या समय रहते सांभर झील के अवैध बोरवेल और अतिक्रमण की समस्या का समाधान किया जा सकेगा?

Jyoti Mahender Bhardwaj | Oct 01, 2026, 14:59 IST
​सांभर झील पर बढ़ी चिंता ​
सांभर झील में अवैध बोरवेल्स और पानी निकासी की बढ़ती शिकायतों ने चिंता बढ़ा दी है। 2021 में 391 अवैध बोरवेल हटाए गए थे, लेकिन 2023 में शिकायतें फिर से आईं। 2025 में 10 नई बोरवेल्स की पहचान होने पर NGT ने जांच आदेशित किए हैं। 2026 में, एक संयुक्त समिति झील की स्थिति की समीक्षा कर रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।

समझें क्या है पूरा मामला

  • 391 अवैध बोरवेल हटाने के बाद भी सांभर में फिर वही शिकायतें।
  • 2023 में हजारों बोरवेल से पानी निकालने के आरोप सामने आए।
  • 2025 में झील क्षेत्र में फिर 10 अवैध बोरवेल मिले।
  • 2026 में NGT ने सांभर झील की दोबारा जांच के आदेश दिए।
  • छह सप्ताह बाद पता चलेगा, झील में अभी कितने अवैध बोरवेल हैं।

राजस्थान की सांभर झील को अवैध गतिविधियों से बचाने के लिए पिछले कई सालों से कार्रवाई का सिलसिला जारी है। अवैध बोरवेल हटाए गए, अतिक्रमण पर कार्रवाई हुई और झील की सीमा तय करने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई गई। इसके बावजूद अवैध सॉल्ट पैन, बोरवेल और पानी के कथित दोहन से जुड़े मामले बार-बार सामने आते रहे।



अब 2026 में राष्ट्रीय हरित अधिकरण यानी NGT ने सांभर झील को लेकर फिर जांच के आदेश दिए हैं। NGT की सेंट्रल जोन बेंच ने एक संयुक्त समिति गठित करने का आदेश दिया है। समिति मौके पर जाकर अवैध सॉल्ट पैन, अतिक्रमण, भूजल और झील के पानी के कथित दोहन के साथ-साथ प्राकृतिक जल प्रवाह में रुकावट की भी जांच करेगी। समिति को छह सप्ताह के भीतर तथ्यात्मक रिपोर्ट और की गई कार्रवाई की जानकारी देनी होगी। मामले की अगली सुनवाई 9 दिसंबर को होगी। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब 2021 से सांभर में कार्रवाई हो रही है तो वही शिकायतें बार-बार सामने क्यों आ रही हैं?




2021 में हटाए गए थे 391 अवैध बोरवेल

सांभर झील को लेकर 18 मार्च 2021 को NGT में सुनवाई हुई थी। उस दौरान राजस्थान सरकार की ओर से झील क्षेत्र में की गई कार्रवाई की जानकारी दी गई थी। नागौर जिला प्रशासन की रिपोर्ट के मुताबिक 2019-20 में सांभर क्षेत्र में करीब 29.44 हेक्टेयर जमीन से अतिक्रमण हटाया गया था। इसी दौरान 137 अवैध बोरवेल और 10 सबमर्सिबल पंप हटाए गए थे।



इसके बाद 1 अप्रैल 2020 से रिपोर्ट तैयार होने तक 254 और अवैध बोरवेल तथा 27 सबमर्सिबल पंप हटाने की जानकारी दी गई। इस तरह उस समय सरकार ने कुल 391 अवैध बोरवेल और 37 सबमर्सिबल पंप हटाने की कार्रवाई बताई थी। तब यह भी कहा गया था कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई आगे जारी रहेगी। लेकिन कुछ समय बाद फिर इसी तरह की शिकायतें सामने आने लगीं।



2023 में फिर सामने आया पानी निकालने का मामला

2023 में NGT के सामने पेश की गई संयुक्त समिति की रिपोर्ट में सांभर झील के पानी वाले क्षेत्र में बड़ी संख्या में अवैध बोरवेल, बिजली के तार, पंप और पाइपलाइन मिलने का जिक्र किया गया।



रिपोर्ट में आरोपों के तौर पर बताया गया कि बोरवेल के जरिए झील के पानी और ब्राइन को निकालकर अनधिकृत तरीके से नमक उत्पादन किया जा रहा था।इसी रिपोर्ट में सांभर झील की सीमा तय करने का मुद्दा भी सामने आया। समिति ने झील की सीमा तय करने के लिए स्पष्ट समयसीमा और जिम्मेदारी तय करने की जरूरत बताई थी। यानी 2021 में सैकड़ों बोरवेल हटाने की कार्रवाई के बावजूद दो साल बाद फिर अवैध बोरवेल और पानी निकालने की शिकायत NGT तक पहुंच गई।



NGT ने फिर बनाई हाई पावर कमेटी

सांभर झील मामले में NGT ने 2023 में भी कार्रवाई की थी। अवैध बोरवेल, झील के पानी और ब्राइन के कथित दोहन की जांच के लिए हाई पावर कमेटी बनाई गई। कमेटी को यह भी देखना था कि झील में चल रही कथित अवैध गतिविधियों से पर्यावरण को कितना नुकसान हो रहा है और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।राजस्थान के मुख्य सचिव को कमेटी की सिफारिशों पर कार्रवाई सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी दी गई थी।



2025 में फिर मिले 10 अवैध बोरवेल

सांभर में अवैध बोरवेल का मामला इसके बाद भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। मई 2025 में जयपुर जिला प्रशासन के निर्देश पर तहसील प्रशासन, पुलिस और सांभर की संयुक्त टीम ने झील क्षेत्र में कार्रवाई की।



शाकंभरी माता मंदिर के पीछे झील क्षेत्र में कार्रवाई के दौरान 10 अवैध बोरवेल और 3 सबमर्सिबल पंप जब्त किए गए। यह कार्रवाई इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे कुछ साल पहले ही सैकड़ों अवैध बोरवेल हटाने की जानकारी NGT को दी जा चुकी थी।




2026 में फिर वही शिकायतें

अब सितंबर 2026 में सांभर झील को लेकर फिर NGT में शिकायत पहुंची है। आवेदन में झील की सीमा के अंदर कथित तौर पर अवैध सॉल्ट पैन बनाए जाने, झील की जमीन पर अतिक्रमण और बड़ी संख्या में बोरवेल के जरिए भूजल और ब्राइन निकालने के आरोप लगाए गए हैं।



इसके अलावा भारी मशीनरी और पाइपलाइन के इस्तेमाल की बात भी कही गई है। झील में आने वाले प्राकृतिक पानी के रास्ते में बांध, एनीकट और सिंचाई गतिविधियों के कारण रुकावट पैदा होने के आरोप भी लगाए गए हैं। हालांकि NGT ने इन आरोपों को अभी अंतिम रूप से सही नहीं माना है। इन्हीं आरोपों की जांच के लिए संयुक्त समिति गठित की गई है।



अब छह सप्ताह में सामने आएगी स्थिति

NGT के आदेश के बाद संयुक्त समिति मौके पर जाकर सांभर झील क्षेत्र की स्थिति की जांच करेगी। समिति में जयपुर कलेक्टर, राजस्थान स्टेट वेटलैंड अथॉरिटी, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रतिनिधि शामिल हैं।



समिति की रिपोर्ट से यह पता चल सकेगा कि फिलहाल सांभर झील क्षेत्र में कितने अवैध सॉल्ट पैन, बोरवेल और अतिक्रमण मौजूद हैं। साथ ही यह भी सामने आएगा कि पहले की कार्रवाई के बाद क्या स्थिति बदली और अब तक की गई कार्रवाई कितनी प्रभावी रही।



सांभर झील क्यों महत्वपूर्ण है?

सांभर देश की महत्वपूर्ण खारे पानी की झीलों में शामिल है और इसे रामसर साइट का दर्जा प्राप्त है। इसलिए मामला सिर्फ नमक उत्पादन या जमीन के अतिक्रमण तक सीमित नहीं है।



झील का पानी, भूजल, प्राकृतिक जल प्रवाह और यहां आने वाले प्रवासी पक्षियों का पूरा पारिस्थितिकी तंत्र इससे जुड़ा है। यदि भूजल या झील के पानी का अनधिकृत दोहन होता है या प्राकृतिक जल प्रवाह बाधित होता है तो इसका असर झील के पर्यावरणीय संतुलन पर पड़ सकता है।




अब असली सवाल कार्रवाई का असर

सांभर झील में 2021 से लगातार कार्रवाई की जानकारी सामने आती रही है। 2021 में 391 अवैध बोरवेल हटाए गए। 2023 में फिर अवैध बोरवेल और पानी निकालने के आरोप सामने आए।



2025 में 10 और अवैध बोरवेल मिलने की कार्रवाई हुई। अब 2026 में NGT ने फिर जांच के आदेश दिए हैं। छह सप्ताह बाद आने वाली समिति की रिपोर्ट यह बताएगी कि मौजूदा स्थिति क्या है और पिछले वर्षों में हुई कार्रवाई के बावजूद समस्या क्यों बनी हुई है। सांभर में अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि कार्रवाई हुई या नहीं, बल्कि यह है कि कार्रवाई के बाद भी अवैध गतिविधियों की शिकायतें बार-बार क्यों सामने आ रही हैं।




यह खबर क्यों जरूरी है:

सांभर झील राजस्थान के पर्यावरण और जैव विविधता के लिहाज से महत्वपूर्ण क्षेत्र है। झील से जुड़े अवैध बोरवेल, सॉल्ट पैन, अतिक्रमण और प्राकृतिक जल प्रवाह में रुकावट के आरोप सीधे इसके पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़े हैं। पिछले वर्षों में कार्रवाई के बावजूद नए मामले सामने आने के कारण NGT की ताजा जांच महत्वपूर्ण हो गई है। अब समिति की रिपोर्ट से मौजूदा स्थिति और पहले की कार्रवाई के बीच का अंतर सामने आने की उम्मीद है।

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