राजस्थान हाईकोर्ट ने जयपुर में अवैध निर्माण की जांच के लिए अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी
समझें क्या है पूरा मामला
- कागजों में हेरिटेज सुरक्षित, जमीन पर हवेलियां ध्वस्त होती रहीं।
- जियो-टैगिंग और निगरानी के दावों के बीच परकोटे में अवैध निर्माण जारी रहे।
- पांच साल में कितने अवैध निर्माण हुए, हाईकोर्ट अब पूरा हिसाब मांगेगा।
- नोटिस के बाद भी निर्माण चलता रहा, अब हाईकोर्ट ने मांगी रिपोर्ट।
- UNESCO को निगरानी की जानकारी दी गई, फिर भी हवेलियां टूटती रहीं।
जयपुर। जयपुर के ऐतिहासिक परकोटे को संरक्षित रखने के लिए निगरानी और कार्रवाई की व्यवस्था लंबे समय से मौजूद है। हेरिटेज सेल, जियो-टैगिंग, रिपोर्टिंग सिस्टम और अवैध निर्माण पर निगरानी के लिए एनफोर्समेंट सिस्टम की बात सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज है। इसके बावजूद परकोटे में पुरानी हवेलियों को तोड़ने, बिना अनुमति निर्माण और हेरिटेज इमारतों की जगह नए कमर्शियल निर्माण के मामले सामने आते रहे हैं।
अब राजस्थान हाईकोर्ट ने इस पूरे मामले पर स्वतः संज्ञान लिया है। कोर्ट ने जेडीए और नगर निगम से परकोटे में हुए अवैध और नियम विरुद्ध निर्माण का सर्वे कर दो सप्ताह में रिपोर्ट पेश करने को कहा है। साथ ही पिछले पांच साल में अवैध निर्माण के खिलाफ हुई सीलिंग, डिमोलिशन, प्रॉसिक्यूशन और पेनल्टी की कार्रवाई का पूरा रिकॉर्ड भी मांगा है।
UNESCO को दी गई थी जियो-टैगिंग की जानकारी
जयपुर के हेरिटेज संरक्षण को लेकर भारत की ओर से दी गई रिपोर्ट में जियो-टैगिंग और रिपोर्टिंग आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम का उल्लेख किया गया था। हेरिटेज सेल की निगरानी में इस व्यवस्था के जरिए हेरिटेज क्षेत्र में होने वाले बदलावों पर नजर रखने की बात कही गई थी।
रिपोर्ट में करीब 600 प्रमुख हेरिटेज प्रॉपर्टीज की इन्वेंट्री तैयार होने और बाकी संपत्तियों का रिकॉर्ड तैयार किए जाने की जानकारी भी दी गई थी। ऐसे में अब सवाल उठ रहा है कि जब निगरानी का सिस्टम मौजूद था, तो परकोटे में पुरानी हवेलियों को तोड़ने और नए निर्माण के मामले लगातार सामने कैसे आते रहे।
मई में कई जगह सामने आया निर्माण
मई 2026 में अजमेरी गेट से किशनपोल जोन तक निरीक्षण के दौरान नाटाणियों का रास्ता, चौड़ा रास्ता, लाड़ी वालों का रास्ता और सोखियों का रास्ता समेत कई इलाकों में पुरानी हेरिटेज हवेलियों को बिना अनुमति तोड़े जाने के मामले सामने आए थे।
लाड़ी वालों का रास्ता स्थित एक मकान में पुरानी हवेली तोड़कर नया निर्माण किए जाने के मामले में संपत्ति सील करने की कार्रवाई भी की गई। अधिकारियों के अनुसार इससे पहले नोटिस जारी किए जा चुके थे।
पुंडरिक जी की हवेली भी नहीं बच सकी
पुंडरिक जी की हवेली का मामला भी सामने आया था। स्थानीय लोगों ने फरवरी 2026 में हवेली तोड़े जाने का विरोध किया था। शिकायतों के बाद जब नगर निगम की टीम मौके पर पहुंची, तब तक इमारत का बड़ा हिस्सा तोड़ा जा चुका था।
अधिकारियों ने मामले में जिम्मेदार लोगों की जांच की बात कही थी। यह मामला शिकायत मिलने और मौके पर कार्रवाई होने के बीच के अंतर पर भी सवाल खड़े करता है।
नोटिस के बाद भी पांचवीं मंजिल तक निर्माण
मई में हांडीपुरा के जगन्नाथ शाह का रास्ता क्षेत्र में एक निर्माणाधीन बहुमंजिला इमारत में पिलर खिसकने का मामला सामने आया था। आसपास के मकानों को खाली करवाना पड़ा था। नगर निगम के अनुसार इमारत की पांचवीं मंजिल पर किया जा रहा निर्माण अवैध था और इससे पहले दो नोटिस भी जारी किए जा चुके थे।
कमर्शियल निर्माण को लेकर भी शिकायतें
जुलाई 2026 में परकोटे के कई इलाकों में पुरानी हवेलियों की जगह कमर्शियल कॉम्प्लेक्स बनाए जाने की शिकायतें सामने आईं। स्थानीय लोगों ने कई इलाकों में पुरानी इमारतें तोड़े जाने के आरोप लगाए।
नगर निगम की ओर से कहा गया कि जरूरी अनुमति और एनओसी के बिना किए गए निर्माण के खिलाफ नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी। वहीं जर्जर या असुरक्षित इमारतों के पुनर्निर्माण के लिए भी संबंधित अनुमति लेना जरूरी बताया गया।
UNESCO की चिंता भी सामने आ चुकी
जयपुर के हेरिटेज क्षेत्र में ऐतिहासिक इमारतों को नुकसान पहुंचने का मुद्दा पहले भी उठ चुका है। हेरिटेज संरक्षण को लेकर बिना अनुमति निर्माण और पुराने भवनों में बदलाव जैसी गतिविधियों पर चिंता जताई गई है। साथ ही बड़े संरक्षण, पुनर्विकास या इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट से पहले हेरिटेज इम्पैक्ट असेसमेंट किए जाने की जरूरत पर भी जोर दिया गया है।
1 दिसंबर तक देनी है अपडेटेड रिपोर्ट
जयपुर की हेरिटेज स्थिति को लेकर भारत को 1 दिसंबर 2026 तक अपडेटेड स्टेट ऑफ कंजर्वेशन रिपोर्ट देनी है। इसमें संरक्षण, अवैध निर्माण और पहले उठाए गए मुद्दों पर हुई कार्रवाई की जानकारी शामिल होगी।
इसी बीच हाईकोर्ट ने भी पिछले पांच साल का रिकॉर्ड मांग लिया है। जेडीए और नगर निगम को बताना होगा कि कितने अवैध निर्माण सामने आए, कितनी संपत्तियां सील हुईं, कितने निर्माण हटाए गए और कितने मामलों में कानूनी कार्रवाई या जुर्माना लगाया गया।
अब पांच साल का रिकॉर्ड खोलेगा पूरी तस्वीर
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद अब सिर्फ मौजूदा स्थिति नहीं, बल्कि पिछले पांच साल की कार्रवाई भी जांच के दायरे में आ गई है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब हेरिटेज संरक्षण के लिए जियो-टैगिंग, मॉनिटरिंग और एनफोर्समेंट जैसी व्यवस्थाएं मौजूद थीं, तो परकोटे में पुरानी हवेलियों के टूटने और नोटिस के बावजूद निर्माण जारी रहने के मामले बार-बार क्यों सामने आए। अब जेडीए और नगर निगम की रिपोर्ट से यह तस्वीर साफ हो सकती है कि जयपुर के हेरिटेज संरक्षण की व्यवस्था जमीन पर कितनी प्रभावी रही।