नेवी लेफ्टिनेंट अंशु राठौड़ की सड़क हादसे में मौत, पांच पीढ़ियों में थी पहली सैन्य अधिकारी

Ashish Bhardwaj | Apr 06, 2026, 18:07 IST
Photograph: (the sootr)
भारतीय नौसेना की लेफ्टिनेंट अंशु राठौड़ की सड़क हादसे में मौत हो गई। 23 वर्षीय अंशु ड्यूटी पर जाते समय गुजरात में एक दुर्घटना का शिकार हो गईं। वे अपने परिवार की पांच पीढ़ियों में पहली महिला सैन्य अधिकारी थीं।

News In Short

  • भारतीय नौसेना की लेफ्टिनेंट अंशु राठौड़ का गुजरात में सड़क हादसे में निधन।
  • अंशु पुणे में प्रशिक्षण के बाद अपनी अगली ड्यूटी के लिए आईएनएस वलसुरा जा रही थीं।
  • वह परिवार की पांच पीढ़ियों में पहली सैन्य अधिकारी महिला थीं, 23 साल की उम्र में निधन।
  • अंशु राठौड़ ने 2024 में पहले प्रयास में सेना में कमीशन प्राप्त किया था।
  • अंशु राठौड़ को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई।

News In Detail

राजस्थान की बेटी और भारतीय नौसेना में नेवी लेफ्टिनेंट अंशु राठौड़ का गुजरात के जामनगर में एक सड़क हादसे में निधन हो गया। वह ड्यूटी पर जाते समय कार में सवार थीं, तभी उनकी गाड़ी की किसी दूसरे वाहन से टक्कर हो गई। इस दुर्घटना में उन्हें गंभीर चोटें आईं और उन्होंने मौके पर ही दम तोड़ दिया। अंशु की उम्र मात्र 23 साल थी। सोमवार दोपहर जब उनकी पार्थिव देह तिरंगे में लिपटकर उनके पैतृक गांव बिठुड़ा पहुंची तो हर आंख नम हो गई।



ड्यूटी के लिए जाते समय हुआ हादसा

जिला सैनिक कल्याण अधिकारी कर्नल राजेंद्र सिंह राठौड़ के अनुसार हादसा रविवार सुबह करीब 10 बजे हुआ। लेफ्टिनेंट अंशु पुणे में प्रशिक्षण पूरा करने के बाद अपनी अगली ड्यूटी के लिए आईएनएस वलसुरा जा रही थीं। इसी दौरान उनकी कार की दूसरी गाड़ी से टक्कर हो गई। टक्कर इतनी तेज थी कि अंशु ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। कार में मौजूद अन्य दो सैन्य अधिकारी सुरक्षित बताए जा रहे हैं।



पांच पीढ़ियों में पहली सैन्य अधिकारी

अंशु का परिवार पीढ़ियों से देश सेवा में समर्पित रहा है। उनके दादा और पिता (किशन सिंह) दोनों भारतीय सेना से रिटायर्ड हैं। वर्तमान में उनके पिता जयपुर में आबकारी थाना अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं।



पिता किशन सिंह ने गर्व और भारी मन से बताया कि अंशु हमारे परिवार की पांच पीढ़ियों में पहली लड़की थी, जिसने सेना में कमीशन प्राप्त किया था। उसने 2024 में अपने पहले ही प्रयास में यह मुकाम हासिल किया था।



आईएएस बनकर करना चाहती थीं देश सेवा

अंशु न केवल एक कुशल सैन्य अधिकारी थीं, बल्कि उनकी आंखों में भविष्य के लिए बड़े सपने थे। वे भविष्य में IAS या IPS बनकर प्रशासनिक सेवा के जरिए देश की सेवा करना चाहती थीं और बाद में राजनीति में आने का भी लक्ष्य रखती थीं। विशाखापट्टनम, मुंबई और पुणे में प्रशिक्षण के बाद वे अपनी नई जिम्मेदारी संभालने जा रही थीं, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।



राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई

सोमवार को अंशु की पार्थिव देह सड़क मार्ग से उनके पैतृक गांव बिठुड़ा लाई गई। प्रशासन, सैन्य अधिकारियों और हजारों ग्रामीणों की उपस्थिति में उन्हें राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। अंशु के परिवार में उनके माता-पिता के अलावा एक छोटा भाई है, जो वर्तमान में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा है।



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